निम्नलिखित में से कौन-सा केंद्रीय बैंक का कार्य है ?
- (a)सरकार को बैंक सुविधाएँ
- (b)रेपो-रेट का प्रबंधन करना
- (c)वाणिज्यिक बैंक को ऋण देना
- (d)उपरोक्त सभी
सही — (d) उपरोक्त सभी। नामित तीनों बातें केन्द्रीय बैंक के पाठ्यपुस्तक-सम्मत कार्य हैं, और भारत में तीनों रिज़र्व बैंक ही करता है। सरकार को बैंक सुविधाएँ : RBI संघ तथा राज्य सरकारों का बैंकर है, उनके खाते रखता है, उनकी ओर से धन प्राप्त करता तथा चुकाता है, उनके बाज़ार-ऋण तथा लोक ऋण का प्रबन्ध करता है, और अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ लेन-देन में सरकार के अभिकर्ता के रूप में काम करता है। रेपो-रेट का प्रबन्ध : मौद्रिक प्राधिकारी के रूप में RBI मौद्रिक नीति बनाता तथा लागू करता है, और रेपो दर उसका प्रमुख नीतिगत उपकरण है, जिसे मौद्रिक नीति समिति तय करती है। वाणिज्यिक बैंकों को ऋण : रेपो दर ठीक वही दर है जिस पर बैंक RBI से अल्पकालिक धन उधार लेते हैं, और उससे आगे केन्द्रीय बैंक अन्तिम ऋणदाता के रूप में खड़ा रहता है — वह संस्था जिसके पास कोई ऐसा बैंक जा सकता है जो शोधक्षम तो है पर तत्काल नक़दी से तंग है, और जिसे कोई और उधार नहीं देगा। ध्यान दीजिए कि दूसरी और तीसरी बात कितनी कसकर जुड़ी हैं — रेपो दर ठीक उसी उधारी का मूल्य है जिसका वर्णन तीसरा विकल्प करता है, इसलिए जो अभ्यर्थी इनमें से किसी एक को मानता है उसे दोनों माननी ही पड़ेंगी। तीनों सही होने पर एकमात्र पूरा उत्तर (d) ही है। यह उसी कसौटी का सकारात्मक रूप है जो 'उपरोक्त में से एक से अधिक' पर लागू होती है : 'उपरोक्त सभी' तब सही होता है जब आप हर सूचीबद्ध बात का बचाव कर सकें, और यहाँ आप कर सकते हैं।
- (a)सरकार को बैंक सुविधाएँ — सही है, और ठीक इसीलिए ऐसे प्रश्न पर अकेला उत्तर होने के नाते ग़लत है जो 'उपरोक्त सभी' का विकल्प भी देता है। सरकार का बैंकर होना केन्द्रीय बैंकिंग के सबसे पुराने कार्यों में से है — सरकार के खाते रखना तथा उसके ऋण का प्रबन्ध करना — पर यह कई कार्यों में से एक कार्य है, और इसे अकेले चुनने का अर्थ है दो अन्य कथनों को अनदेखा कर देना जो उतने ही सही हैं।
- (b)रेपो-रेट का प्रबंधन करना — यह भी सही है और यह भी अधूरा। रेपो दर मौद्रिक ढाँचे के केन्द्र में बैठी नीतिगत दर है, जिसे मौद्रिक नीति समिति तय करती है। इसे अकेले चुनना प्रायः उस अभ्यर्थी का संकेत है जिसका पढ़ना दर-सम्बन्धी समाचारों तक सीमित है — जो केन्द्रीय बैंक का सबसे दिखने वाला काम तो है, पर एकमात्र काम नहीं।
- (c)वाणिज्यिक बैंक को ऋण देना — यह भी सही — केन्द्रीय बैंक बैंकों का बैंकर तथा अन्तिम ऋणदाता है, और रेपो के अन्तर्गत दिया गया ऋण ठीक यही कार्य क्रिया-रूप में है। चूँकि यह कथन और पिछला कथन एक ही लेन-देन के दो पहलुओं का वर्णन हैं, इसलिए जो अभ्यर्थी इनमें से किसी एक को सही मानता है वह पहले ही यह सिद्ध कर चुका है कि कम-से-कम दो विकल्प सही हैं — और इतने भर से किसी एक बात वाला उत्तर बाहर हो जाता है।
केन्द्रीय बैंक की पहचान उसके स्वामित्व से नहीं, उन कार्यों से होती है जो वह करता है। मानक सूची है : मुद्रा जारी करना, सरकार का बैंकर होना, बैंकों का बैंकर तथा अन्तिम ऋणदाता होना, मौद्रिक नीति चलाना, वित्तीय तन्त्र का नियमन तथा पर्यवेक्षण करना, विदेशी मुद्रा तथा देश के भण्डार का प्रबन्ध करना, और विकासात्मक भूमिकाएँ निभाना। भारतीय रिज़र्व बैंक ये सभी करता है। इसकी स्थापना हिल्टन यंग आयोग की सिफ़ारिश पर, भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के अन्तर्गत 1 अप्रैल 1935 को हुई, और इसका राष्ट्रीयकरण 1 जनवरी 1949 को हुआ। इसके नीतिगत उपकरण मात्रात्मक तथा गुणात्मक में बँटे हैं। मात्रात्मक उपकरण हैं रेपो तथा रिवर्स रेपो दरें और स्थायी सुविधाएँ, बैंक दर, नक़द आरक्षित अनुपात तथा सांविधिक तरलता अनुपात, और खुले बाज़ार की क्रियाएँ। गुणात्मक उपकरण चयनात्मक साख नियन्त्रण हैं — मार्जिन अपेक्षाएँ, साख की उच्चतम सीमा, नैतिक दबाव तथा प्रत्यक्ष कार्रवाई। ध्यान रखिए कि ये सभी मौद्रिक उपकरण हैं, जिन्हें केन्द्रीय बैंक चलाता है; कराधान तथा लोक व्यय राजकोषीय उपकरण हैं, और वे सरकार के हैं, RBI के नहीं।
यहाँ परीक्षक की रचना को नाम दे देना उपयोगी है, क्योंकि यह बार-बार लौटती है। तीन में से दो बातें — रेपो दर का प्रबन्ध और वाणिज्यिक बैंकों को ऋण — एक ही लेन-देन का दो बार किया गया वर्णन हैं, क्योंकि रेपो दर वही दर है जिस पर RBI बैंकों को उधार देता है। यह दिख जाने पर ज्ञान के एक ही टुकड़े से दो सही कथन मिल जाते हैं, और किसी एक बात वाला कोई विकल्प टिक नहीं सकता। 'उपरोक्त सभी' वाले विकल्प का सामान्य नियम 'इनमें से कोई नहीं' के नियम का दर्पण-प्रतिबिम्ब है : 'सभी' तब चुनिए जब आप हर सूचीबद्ध बात का बचाव कर सकें, और 'कोई नहीं' तब जब आप हर सूचीबद्ध बात का खण्डन कर सकें; दोनों ही स्थितियों में काम एक-एक बात पर करना होता है, समग्र प्रभाव से कभी नहीं। दूसरी आदत जो अर्थव्यवस्था के हर प्रश्न में साथ ले जानी चाहिए, वह है मौद्रिक तथा राजकोषीय खानों को अलग रखना — मौद्रिक ओर रेपो, CRR, SLR, बैंक दर तथा खुले बाज़ार की क्रियाएँ, राजकोषीय ओर कर, व्यय, घाटे तथा लोक ऋण — क्योंकि एक ही पत्र प्रायः दोनों में से एक-एक प्रश्न पूछता है और इसी भरोसे रहता है कि अभ्यर्थी इन्हें आपस में मिला देंगे।
- भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना हिल्टन यंग आयोग की सिफ़ारिश पर भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के अन्तर्गत 1 अप्रैल 1935 को हुई, और राष्ट्रीयकरण 1 जनवरी 1949 को
- सरकार के बैंकर के रूप में RBI संघ तथा राज्यों के खाते रखता है, उनके ऋण तथा लोक ऋण का प्रबन्ध करता है, और अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के सम्बन्ध में सरकार के अभिकर्ता के रूप में काम करता है
- रेपो दर वह दर है जिस पर बैंक RBI से अल्पकालिक धन उधार लेते हैं; यह मौद्रिक नीति का प्रमुख उपकरण है और इसे मौद्रिक नीति समिति तय करती है
- बैंकों के बैंकर के रूप में RBI अनुसूचित बैंकों के खाते रखता है और अन्तिम ऋणदाता के रूप में कार्य करता है
- मात्रात्मक उपकरणों में रेपो तथा रिवर्स रेपो दरें, बैंक दर, नक़द आरक्षित अनुपात, सांविधिक तरलता अनुपात तथा खुले बाज़ार की क्रियाएँ आती हैं; गुणात्मक उपकरणों में मार्जिन अपेक्षाएँ, साख की उच्चतम सीमा, नैतिक दबाव तथा प्रत्यक्ष कार्रवाई
- बैंक दर की परिभाषा RBI अधिनियम की धारा 49 में है — वह मानक दर जिस पर बैंक पात्र विनिमय-पत्र ख़रीदने या पुनर्भुनाने को तैयार रहता है
केन्द्रीय बैंक की पहचान उसके स्वामित्व से नहीं, उसके कार्यों से होती है : मुद्रा जारी करना, सरकार का बैंकर, बैंकों का बैंकर तथा अन्तिम ऋणदाता, मौद्रिक नीति, नियमन तथा पर्यवेक्षण, विदेशी मुद्रा तथा भण्डार, और विकासात्मक भूमिकाएँ। मौद्रिक खाने (रेपो, CRR, SLR, बैंक दर, खुले बाज़ार की क्रियाएँ) को राजकोषीय खाने (कर, व्यय, घाटे, लोक ऋण) से अलग रखिए — पत्र नियमित रूप से दोनों में से एक-एक प्रश्न पूछते हैं और इसी भरोसे रहते हैं कि अभ्यर्थी इन्हें मिला देंगे।
- ऐसे प्रश्न पर कोई एक सही कथन चुन लेना जो 'उपरोक्त सभी' का विकल्प भी देता है; जब हर बात टिकती हो, तो वह विकल्प एक असली उत्तर है
- मौद्रिक उपकरणों को राजकोषीय उपकरणों से गड्डमड्ड कर देना — रेपो दर RBI तय करता है, कर सरकार लगाती है
- रेपो दर तथा बैंकों को ऋण देने को दो अलग तथ्य मान लेना, जबकि वे एक ही लेन-देन के दो पहलू हैं
BPSC इन कार्यों को एक जाँच-सूची के रूप में पूछता है और अन्त में 'उपरोक्त सभी' रख देता है, इसलिए अंक किसी एक बात को पहचान लेने पर नहीं, बल्कि हर बात को जाँच लेने पर टिकता है। UPSC इसी संस्था को परिणामों तथा परिभाषाओं के रास्ते पूछता है — रेपो दर है क्या, विस्तारकारी नीति के अन्तर्गत RBI क्या नहीं करेगा, उसका लेखा-वर्ष कौन-सा है — इसलिए अभ्यर्थी को सूची के साथ-साथ प्रक्रिया भी चाहिए।
भारतीय रिज़र्व बैंक के सम्बन्ध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : I. यह केन्द्र सरकार का बैंकर है। II. यह मौद्रिक नीति बनाता तथा उसका प्रशासन करता है। III. यह IMF की सदस्यता के सम्बन्ध में भारत सरकार के अभिकर्ता के रूप में कार्य करता है। IV. यह भारत सरकार के ऋण-कार्यक्रम को सँभालता है। इनमें से कौन-से कथन सही हैं ?
- (a) I तथा II
- (b) II, III तथा IV
- (c) I, II, III तथा IV
- (d) III तथा IV
उत्तर(c) I, II, III तथा IV
केन्द्रीय बैंक के कार्यों की वही जाँच-सूची, और उत्तर की वही रचना — हर सूचीबद्ध बात सही है। सरकार का बैंकर, मौद्रिक प्राधिकारी, IMF में अभिकर्ता तथा ऋण-कार्यक्रम का प्रबन्धक — ये उन्हीं दो कार्यों के चार चेहरे हैं जिन्हें यह प्रश्न नाम देता है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. रेपो दर वह दर है जिस पर अन्य बैंक भारतीय रिज़र्व बैंक से उधार लेते हैं। 2. किसी देश के लिए गिनी गुणांक का मान 1 होने का अर्थ है कि उसकी जनसंख्या में सबकी आय पूर्णतः बराबर है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं ?
- (a) केवल 1
- (b) केवल 2
- (c) 1 तथा 2 दोनों
- (d) न तो 1 और न ही 2
उत्तर(a) केवल 1
यह इस प्रश्न के दो विकल्पों के बीच का सम्बन्ध स्थापित कर देता है — रेपो दर वही दर है जिस पर बैंक केन्द्रीय बैंक से उधार लेते हैं, इसलिए रेपो दर का प्रबन्ध और वाणिज्यिक बैंकों को ऋण देना एक ही कार्य के दो रुख़ हैं।
आर० बी० आइ० के विदेशी मुद्रा भंडार (एफ० ई० आर०) में, निम्नलिखित में से कौन-से शामिल हैं? 1. विदेशी मुद्रा परिसम्पत्तियाँ (एफ० सी० ए०) 2. सोना 3. विशेष आहरण अधिकार (एस० डी० आर०) 4. आरक्षित किश्त स्थिति नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- (a) केवल 1 और 2
- (b) केवल 2, 3 और 4
- (c) केवल 1, 2 और 3
- (d) उपर्युक्त सभी
उत्तर(d) उपर्युक्त सभी
69वीं CCE ने RBI की एक और जाँच-सूची पूछी और उसका उत्तर भी इसी ढंग से रखा — हर सूचीबद्ध घटक उसमें आता है। दोनों में जो सीख साझा है वह उत्तर नहीं, विधि है : एक-एक बात पर काम कीजिए, और हर बात पर आया फ़ैसला ही तय करने दीजिए कि अन्तिम विकल्प टिकता है या नहीं।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन भारत में मौद्रिक नीति का उपकरण नहीं है ?
- (a)नक़द आरक्षित अनुपात
- (b)खुले बाज़ार की क्रियाएँ
- (c)आयकर की दरें
- (d)रेपो दर
उत्तर(c) आयकर की दरें — यह सरकार द्वारा तय किया गया राजकोषीय उपकरण है; CRR, खुले बाज़ार की क्रियाएँ तथा रेपो दर सभी रिज़र्व बैंक द्वारा चलाए जाने वाले मौद्रिक उपकरण हैं।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
भारतीय रिज़र्व बैंक का 'अन्तिम ऋणदाता' के रूप में कार्य करने का अर्थ है कि वह
- (a)कर-राजस्व कम पड़ने पर संघ सरकार को उधार देता है
- (b)उन बैंकों को साख देता है जो शोधक्षम हैं पर अस्थायी रूप से नक़दी की तंगी में हैं
- (c)वाणिज्यिक बैंकों द्वारा मना कर देने पर व्यक्तियों को सीधे उधार देता है
- (d)वाणिज्यिक बैंकों में रखी सभी जमाओं की गारण्टी देता है
उत्तर(b) उन बैंकों को साख देता है जो शोधक्षम हैं पर अस्थायी रूप से नक़दी की तंगी में हैं — वही कार्य जो केन्द्रीय बैंक को बैंकों का बैंकर बनाता है।