निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है ?
- (a)न्यूट्रॉन एक इलेक्ट्रॉन और एक प्रोटोन के संयोजन से बनता है । इसलिए यह उदासीन (न्यूट्रल) होता है
- (b)एक इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान, एक प्रोटोन के द्रव्यमान का लगभग 1/2000 गुना होता है
- (c)कोबाल्ट के एक समस्थानिक का उपयोग घेंघा (Goiter) के उपचार में किया जाता है
- (d)जे. जे. थॉमसन ने प्रस्तावित किया कि परमाणु के नाभिक में केवल न्यूट्रॉन होते हैं
सही — B, अर्थात् इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान। इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान — प्रोटोन का लगभग 1/1836 — प्रोटोन के द्रव्यमान का मोटे तौर पर 1/2000 होता है, इसलिए नाभिकीय कणों की तुलना में यह लगभग नगण्य है। अतः कथन (b) ही वह कथन है जो सही है।
- (a)न्यूट्रॉन एक इलेक्ट्रॉन और एक प्रोटोन के संयोजन से बनता है । इसलिए यह उदासीन (न्यूट्रल) होता है — न्यूट्रॉन एक मूलभूत नाभिकीय कण है, न कि शाब्दिक रूप से प्रोटोन से चिपका हुआ इलेक्ट्रॉन; इस तरह उसका वर्णन करना गलत है, भले ही उसका कुल आवेश शून्य हो।
- (c)कोबाल्ट के एक समस्थानिक का उपयोग घेंघा (Goiter) के उपचार में किया जाता है — कोबाल्ट-60 का उपयोग विकिरण चिकित्सा द्वारा कैंसर के उपचार में होता है, घेंघा के लिए नहीं; घेंघा और थाइरॉइड विकारों का उपचार आयोडीन-131 से किया जाता है।
- (d)जे. जे. थॉमसन ने प्रस्तावित किया कि परमाणु के नाभिक में केवल न्यूट्रॉन होते हैं — थॉमसन ने प्लम-पुडिंग मॉडल प्रस्तावित किया था — धनावेशित गोले में जड़े हुए इलेक्ट्रॉन; उन्होंने कभी नहीं कहा कि नाभिक में केवल न्यूट्रॉन होते हैं, और न्यूट्रॉन तो बहुत बाद में, 1932 में चैडविक द्वारा खोजा गया।
परमाणु में प्रोटोन और न्यूट्रॉन का एक अत्यंत छोटा सघन नाभिक होता है, जिसके चारों ओर इलेक्ट्रॉन रहते हैं। प्रोटोन और न्यूट्रॉन प्रत्येक का द्रव्यमान लगभग एक परमाणु द्रव्यमान इकाई होता है, जबकि इलेक्ट्रॉन लगभग 1836 गुना हल्का है।
प्रत्येक गलत विकल्प एक जानी-पहचानी भूल छिपाए है — न्यूट्रॉन का गलत मॉडल, अदल-बदल किया गया चिकित्सीय समस्थानिक, या गलत व्यक्ति को दिया गया परमाणु मॉडल। जाँच में केवल इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान वाला आँकड़ा ही टिकता है।
- इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान प्रोटोन के द्रव्यमान का लगभग 1/1836 (मोटे तौर पर 1/2000) होता है।
- प्रोटोन और न्यूट्रॉन प्रत्येक का द्रव्यमान लगभग एक परमाणु द्रव्यमान इकाई होता है।
- कोबाल्ट-60 का उपयोग कैंसर की विकिरण चिकित्सा में होता है; आयोडीन-131 का उपयोग थाइरॉइड और घेंघा के लिए होता है।
- जे. जे. थॉमसन ने 1897 में इलेक्ट्रॉन की खोज की और प्लम-पुडिंग मॉडल दिया।

- कोबाल्ट-60 (कैंसर) और आयोडीन-131 (थाइरॉइड और घेंघा) को आपस में गड्डमड्ड कर देना।
- न्यूट्रॉन को इलेक्ट्रॉन-प्रोटोन की बद्ध जोड़ी मान लेना।
'कौन-सा कथन सही है' प्रकार का प्रश्न, जिसमें कणों के द्रव्यमान, चिकित्सीय समस्थानिक और परमाणु मॉडलों के श्रेय को मिला दिया गया है।
NDA_GAT_2024_I_Q642024बोरॉन (जो दो समस्थानिक रूपों 10B और 11B में पाया जाता है) का सापेक्ष परमाणु द्रव्यमान 10.81 है। 10B और 11B की प्रचुरता क्रमशः क्या होगी?
- (a) 19% और 81%
- (b) 81% और 19%
- (c) 38% और 62%
- (d) 62% और 38%
Answer(a) 19% और 81% — दोनों समस्थानिकों के द्रव्यमानों का भारित औसत 10.81 देता है।
परमाणु-संरचना का वही परिवार — समस्थानिक और सापेक्ष परमाणु द्रव्यमान। यह यहाँ के कथन (c) से जुड़ता है, जो कोबाल्ट के एक समस्थानिक की बात करता है, और दोनों ही परमाणुओं तथा उनके कणों के द्रव्यमान की समझ पर टिके हैं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
घेंघा और अन्य थाइरॉइड विकारों के उपचार में सामान्यतः किस रेडियो-समस्थानिक का उपयोग होता है?
- (a)कोबाल्ट-60
- (b)आयोडीन-131
- (c)कार्बन-14
- (d)यूरेनियम-235
Answer(b) आयोडीन-131 — इसे थाइरॉइड ग्रंथि ग्रहण कर लेती है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
प्रोटोन का द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन के द्रव्यमान का लगभग कितने गुना होता है?
- (a)200
- (b)1836
- (c)92
- (d)6
Answer(b) लगभग 1836 गुना।