निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है ?
- (a)धारा मापने के लिए ऐमीटर को परिपथ में सदैव श्रेणीक्रम में संयोजित किया जाता है
- (b)वोल्टता मापने के लिए वोल्टमीटर को परिपथ में सदैव पार्श्वक्रम में संयोजित किया जाता है
- (c)वोल्टमीटर में उच्च प्रतिरोध होता है और ऐमीटर में प्रतिरोध कम होता है
- (d)वोल्टमीटर में प्रतिरोध कम होता है और ऐमीटर में उच्च प्रतिरोध होता है
सही — D, यही अशुद्ध कथन है। आदर्श ऐमीटर का प्रतिरोध बहुत कम होता है और वोल्टमीटर का बहुत अधिक — कथन (d) इसे उलट देता है, अतः वह ग़लत है। ऐमीटर को श्रेणीक्रम में लगाया जाता है और उसका प्रतिरोध कम होना चाहिए ताकि वह जिस धारा को माप रहा है उसे घटा न दे; वोल्टमीटर को पार्श्वक्रम में लगाया जाता है और उसका प्रतिरोध अधिक होना चाहिए ताकि वह जिस शाखा को माप रहा है उससे लगभग कोई धारा न खींचे।
- (a)धारा मापने के लिए ऐमीटर को परिपथ में सदैव श्रेणीक्रम में संयोजित किया जाता है — यह सही है — ऐमीटर श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है ताकि पूरी धारा उसमें से गुज़रे, अतः यह वह ग़लत कथन नहीं है।
- (b)वोल्टता मापने के लिए वोल्टमीटर को परिपथ में सदैव पार्श्वक्रम में संयोजित किया जाता है — यह सही है — वोल्टमीटर विभवांतर पढ़ने के लिए पार्श्वक्रम में (अवयव के सिरों पर) जोड़ा जाता है, अतः यह वह ग़लत कथन नहीं है।
- (c)वोल्टमीटर में उच्च प्रतिरोध होता है और ऐमीटर में प्रतिरोध कम होता है — यही सही जोड़ी है (वोल्टमीटर उच्च, ऐमीटर कम), अतः यह वह कथन नहीं है जो खोजा जा रहा है।
ऐमीटर धारा मापता है और श्रेणीक्रम में लगाया जाता है, इसलिए उसका प्रतिरोध बहुत कम (आदर्शतः शून्य) होना चाहिए ताकि धारा में परिवर्तन न हो। वोल्टमीटर विभवांतर मापता है और किसी अवयव के सिरों पर पार्श्वक्रम में लगाया जाता है, इसलिए उसका प्रतिरोध बहुत अधिक (आदर्शतः अनंत) होना चाहिए ताकि वह धारा न खींचे और पाठ्यांक को विक्षुब्ध न करे। धारामापी को पार्श्वक्रम में कम प्रतिरोध वाला शंट लगाकर ऐमीटर में, और श्रेणीक्रम में उच्च प्रतिरोध लगाकर वोल्टमीटर में बदला जाता है।
तीन कथन सही हैं और एक प्रतिरोध वाले नियम को उलट देता है। याद रखने योग्य जोड़ी यह है कि श्रेणीक्रम वाला कम प्रतिरोध का मापी ऐमीटर है, जबकि पार्श्वक्रम वाला उच्च प्रतिरोध का मापी वोल्टमीटर। कथन (d) प्रतिरोधों की अदला-बदली कर देता है, जिससे वही अशुद्ध बन जाता है।
- ऐमीटर श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है और उसका प्रतिरोध कम होता है (आदर्श मान शून्य)।
- वोल्टमीटर पार्श्वक्रम में जोड़ा जाता है और उसका प्रतिरोध उच्च होता है (आदर्श मान अनंत)।
- धारामापी पार्श्वक्रम में कम प्रतिरोध वाला शंट लगाने पर ऐमीटर बन जाता है।
- धारामापी श्रेणीक्रम में उच्च प्रतिरोध लगाने पर वोल्टमीटर बन जाता है।

- प्रतिरोधों की अदला-बदली — ऐमीटर का कम, वोल्टमीटर का अधिक होता है, उल्टा नहीं।
- संयोजन गड्डमड्ड कर देना — ऐमीटर श्रेणीक्रम में, वोल्टमीटर पार्श्वक्रम में।
ऐमीटर और वोल्टमीटर के संयोजन या प्रतिरोध की तुलना करवाकर, अथवा यह पूछकर कि धारामापी को इनमें से प्रत्येक में कैसे बदला जाता है।
No directly related past PYQ was found.
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
धारामापी को ऐमीटर में बदलने के लिए हम जोड़ते हैं
- (a)श्रेणीक्रम में उच्च प्रतिरोध
- (b)पार्श्वक्रम में कम प्रतिरोध (शंट)
- (c)पार्श्वक्रम में उच्च प्रतिरोध
- (d)श्रेणीक्रम में कम प्रतिरोध
Answer(b) पार्श्वक्रम में कम प्रतिरोध (शंट) — इससे अधिकांश धारा कुंडली को छोड़कर निकल जाती है और कम प्रतिरोध वाला ऐमीटर बन जाता है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
आदर्श वोल्टमीटर का प्रतिरोध होना चाहिए
- (a)शून्य
- (b)कम
- (c)अनंत
- (d)परिपथ के बराबर
Answer(c) अनंत — जिससे वह कोई धारा न खींचे और जिस वोल्टता को माप रहा है उसे विक्षुब्ध न करे।