किसी क्षैतिज विद्युत लाइन के माध्यम से धारा पूर्व से पश्चिम दिशा में प्रवाहित होती है । पूर्वी सिरे से देखने पर इसके ठीक नीचे स्थित बिंदु पर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा क्या होगी ?
- (a)तार के लंबवत् तल में दक्षिणावर्त (Clockwise)
- (b)तार के लंबवत् तल में वामावर्त (Anti-clockwise)
- (c)तार के समानांतर तल में दक्षिणावर्त (Clockwise)
- (d)तार के समानांतर तल में वामावर्त (Anti-clockwise)
सही — A, तार के लंबवत् तल में दक्षिणावर्त (Clockwise)। धारावाही सीधे तार के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र संकेंद्री वृत्त बनाता है जो तार के लंबवत् तलों में स्थित होते हैं। पूर्वी सिरे से देखने पर प्रेक्षक पश्चिम की ओर देख रहा होता है, अतः पूर्व-से-पश्चिम धारा उससे दूर जाती है (पृष्ठ के भीतर की ओर)। दाहिने हाथ के नियम से — अंगूठा धारा की दिशा में और मुड़ी हुई अंगुलियाँ क्षेत्र की दिशा में — इस प्रेक्षक को क्षेत्र दक्षिणावर्त घूमता दिखाई देता है।
- (b)तार के लंबवत् तल में वामावर्त (Anti-clockwise) — तल तो सही है, किंतु घूर्णन की दिशा ग़लत है: धारा पूर्वी सिरे वाले प्रेक्षक से दूर जा रही है, अतः दाहिने हाथ का नियम दक्षिणावर्त परिक्रमण देता है, वामावर्त नहीं।
- (c)तार के समानांतर तल में दक्षिणावर्त (Clockwise) — परिक्रमण की दिशा सही है, किंतु सीधे तार की क्षेत्र रेखाएँ उसके लंबवत् तलों में होती हैं, समानांतर तलों में नहीं।
- (d)तार के समानांतर तल में वामावर्त (Anti-clockwise) — दोनों भाग ग़लत हैं — तल तार के लंबवत् होना चाहिए और इस दृष्टिबिंदु के लिए दिशा दक्षिणावर्त होनी चाहिए।
किसी लंबे सीधे तार में बहती स्थिर धारा ऐसा चुंबकीय क्षेत्र बनाती है जिसकी रेखाएँ तार पर केंद्रित संकेंद्री वृत्त होती हैं और तार के समकोण पर स्थित तलों में पड़ी रहती हैं। परिक्रमण की दिशा दाहिने हाथ के नियम (या मैक्सवेल के कॉर्कस्क्रू नियम) से तय होती है: दाहिने हाथ का अंगूठा धारा की दिशा में रखिए और मुड़ी हुई अंगुलियाँ क्षेत्र की दिशा बता देंगी।
दो बातें तय करनी हैं — वृत्तों का तल (सदैव तार के लंबवत्) और दिशा (दक्षिणावर्त या वामावर्त), जो प्रेक्षक के दृष्टिबिंदु पर निर्भर करती है। दृष्टिबिंदु 'पूर्वी सिरे से' नियत कर देने पर धारा पृष्ठ के भीतर की ओर जाती है, जिससे क्षेत्र दक्षिणावर्त मिलता है।
- धारावाही सीधे तार की क्षेत्र रेखाएँ तार के लंबवत् तलों में संकेंद्री वृत्त होती हैं।
- क्षेत्र की प्रबलता B = μ₀I / (2πr) तार से दूरी r बढ़ने पर घटती जाती है।
- दाहिने हाथ का नियम: अंगूठा धारा की दिशा में, मुड़ी हुई अंगुलियाँ चुंबकीय क्षेत्र की दिशा देती हैं।
- जब धारा पृष्ठ के भीतर की ओर (प्रेक्षक से दूर) हो, तो उस प्रेक्षक को क्षेत्र दक्षिणावर्त परिक्रमण करता दिखता है।
- क्षेत्र रेखाओं को तार के समानांतर तल में रख देना — वे सदैव उसके लंबवत् होती हैं।
- दिए गए दृष्टिबिंदु की उपेक्षा कर दक्षिणावर्त/वामावर्त दिशा ग़लत कर देना।
धारा की दिशा और कोई दृष्टिबिंदु देकर क्षेत्र की दिशा पूछी जाती है, अथवा तार के चारों ओर क्षेत्र रेखाओं का आकार/तल पूछा जाता है।
NDA_GAT_2025_II_Q622025किसी धारावाही अत्यंत लंबी परिनालिका के भीतर चुंबकीय क्षेत्र होता है
- (a) एकसमान
- (b) असमान
- (c) शून्य
- (d) मध्य-बिंदु पर उच्चतम
Answer(a) एकसमान
वही विषय — विद्युत् धारा का चुंबकीय प्रभाव। वह NDA प्रश्न परिनालिका के भीतर के क्षेत्र (एकसमान) के बारे में पूछता है; यह प्रश्न सीधे तार के चारों ओर क्षेत्र की दिशा पूछता है — दोनों ही धारा द्वारा उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र के अनुप्रयोग हैं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
किसी लंबे सीधे धारावाही तार के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ होती हैं
- (a)तार के समानांतर सीधी रेखाएँ
- (b)तार के लंबवत् तलों में संकेंद्री वृत्त
- (c)तार के तल में दीर्घवृत्त
- (d)तार से दूर की ओर जाती त्रिज्य रेखाएँ
Answer(b) तार के लंबवत् तलों में संकेंद्री वृत्त — दाहिने हाथ के नियम से मिलने वाला मानक प्रतिरूप।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
किसी सीधे धारावाही चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने के लिए प्रयुक्त नियम है
- (a)फ्लेमिंग का वाम-हस्त नियम
- (b)दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ (कॉर्कस्क्रू) नियम
- (c)फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम
- (d)लेंज़ का नियम
Answer(b) दक्षिण-हस्त अंगुष्ठ (कॉर्कस्क्रू) नियम — अंगूठा धारा की दिशा में, मुड़ी हुई अंगुलियाँ क्षेत्र देती हैं।