एक सरल लोलक की लंबाई उसके पूर्ववर्ती मान से चार गुना बढ़ा दी गई है, जबकि द्रव्यमान दोगुना कर दिया गया है । लोलक के नए और पूर्ववर्ती आवर्तकाल का अनुपात क्या है ?
- (a)3 : 1
- (b)2 : 5
- (c)2 : 1
- (d)3 : 2
सही — C, 2 : 1। सरल लोलक का आवर्तकाल T = 2.π.√(L/g) होता है, अतः T, √L के समानुपाती है और गोलक के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करता। लंबाई चार गुना करने पर T_नया/T_पुराना = √(4L/L) = √4 = 2, अर्थात 2 : 1; द्रव्यमान दोगुना करने का कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
- (a)3 : 1 — 3 : 1 का अनुपात तभी मिलता जब लंबाई नौ गुना की जाती, क्योंकि T, √L के समानुपाती है — चार गुना करने पर नहीं।
- (b)2 : 5 — यह √4 नहीं है; इसमें द्रव्यमान के परिवर्तन को ग़लत ढंग से जोड़ लिया गया है, जबकि उसका आवर्तकाल पर कोई प्रभाव नहीं होता।
- (d)3 : 2 — यह अनुपात ग़लत है; √4 = 2 से 2 : 1 मिलता है, और गोलक का द्रव्यमान अप्रासंगिक है।
सरल लोलक का आवर्तकाल केवल उसकी लंबाई और स्थानीय गुरुत्वीय त्वरण पर निर्भर करता है: T = 2.π.√(L/g)। यह गोलक के द्रव्यमान से, और छोटे कंपनों के लिए आयाम से भी, स्वतंत्र होता है। अतः द्रव्यमान बदलने से कुछ नहीं बदलता, जबकि लंबाई चार गुना करने पर आवर्तकाल दोगुना हो जाता है।
यहाँ भ्रामक तत्व है दोगुना किया गया द्रव्यमान — यह केवल ध्यान भटकाने के लिए है, क्योंकि T = 2.π.√(L/g) में द्रव्यमान आता ही नहीं। केवल लंबाई मायने रखती है: T, √L के समानुपाती है, इसलिए L से 4L होने पर T से 2T हो जाता है, अर्थात 2 : 1 का अनुपात।
- सरल लोलक का आवर्तकाल: T = 2.π.√(L/g)।
- T गोलक के द्रव्यमान से, और छोटे कोणों के लिए आयाम से भी, स्वतंत्र होता है।
- लंबाई चार गुना करने पर आवर्तकाल √4 = 2 गुना हो जाता है — अनुपात 2 : 1।
- T, g पर निर्भर करता है, इसलिए जहाँ g कम होता है वहाँ लोलक धीमा चलता है (उदाहरण के लिए, चंद्रमा पर)।

- गोलक का द्रव्यमान आवर्तकाल को प्रभावित नहीं करता — 'द्रव्यमान दोगुना' वाले भ्रम को छोड़ दें।
- T, √L के समानुपाती है, इसलिए लंबाई चार गुना करने पर आवर्तकाल दोगुना होता है, चार गुना नहीं।
पूछा जाता है कि लंबाई, द्रव्यमान या g बदलने पर आवर्तकाल कैसे बदलता है, जिसका आधार T = 2.π.√(L/g) है।
निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: एक सरल लोलक को दोलन कराया जाता है । तब I. जब गोलक माध्य स्थिति से गुज़रता है तब त्वरण शून्य होता है । II. प्रत्येक चक्र में गोलक कोई दिया गया वेग दो बार प्राप्त करता है । III. दोलन के दौरान जब गोलक अपनी चरम स्थिति पर पहुँचता है तब उसका त्वरण और वेग दोनों शून्य होते हैं । IV. सरल लोलक के दोलन का आयाम समय के साथ घटता जाता है । इनमें से कौन-से कथन सही हैं ?
- (a) I और II
- (b) III और IV
- (c) I, II और IV
- (d) II, III और IV
Answer(c) I, II और IV — माध्य स्थिति पर त्वरण शून्य होता है, प्रत्येक चक्र में हर चाल दो बार प्राप्त होती है, और वास्तविक लोलक का आयाम समय के साथ क्षीण होता जाता है।
UPSC प्रारंभिक परीक्षा में सरल लोलक की गति सीधे पूछी गई थी — वही दोलन संबंधी अवधारणा जो इस आवर्तकाल वाले प्रश्न के पीछे है।
NDA_GAT_2024_I_Q87सरल लोलक के गुणों (उसका आयाम-निरपेक्ष आवर्तकाल) पर पूछा गया एक पुराना NDA GAT प्रश्न — बिल्कुल यही अवधारणा।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
सरल लोलक का आवर्तकाल निर्भर करता है
- (a)गोलक के द्रव्यमान पर
- (b)बड़े कंपनों के लिए आयाम पर
- (c)इसकी लंबाई और गुरुत्वीय त्वरण पर
- (d)डोरी के पदार्थ पर
Answer(c) इसकी लंबाई और गुरुत्वीय त्वरण पर — T = 2.π.√(L/g)।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
सरल लोलक का आवर्तकाल दोगुना करने के लिए उसकी लंबाई करनी होगी
- (a)दो गुना
- (b)चार गुना
- (c)तीन गुना
- (d)आधी
Answer(b) चार गुना — क्योंकि T, √L के समानुपाती है।