उन्नीसवीं और बीसवीं शताब्दियों में सामाजिक सिद्धांतकारों द्वारा औद्योगिकीकरण, शहरीकरण, धर्मनिरपेक्षीकरण, और नौकरशाहीकरण के उद्भव को किसकी कसौटी के रूप में बल दिया गया ?
- (a)आधुनिकता
- (b)सामंतवाद
- (c)राजतंत्र
- (d)मध्ययुगीनवाद
सही — A, आधुनिकता । प्रश्न में नामित चारों प्रक्रियाएँ आधुनिक सामाजिक व्यवस्था के पाठ्यपुस्तकीय चिह्न हैं — कारखाना-आधारित औद्योगिक उत्पादन, नगरों की तीव्र वृद्धि, सार्वजनिक सत्ता से धर्म का पीछे हटना, और बड़े, नियम-बद्ध संगठनों का प्रसार । उन्नीसवीं और बीसवीं शताब्दी के सामाजिक सिद्धांतकारों ने — मार्क्स और दुर्खीम से लेकर मैक्स वेबर तक — ठीक इसी समुच्चय से पारंपरिक, कृषि-आधारित, धर्म-शासित समाज से आधुनिक औद्योगिक समाज की ओर हुए संक्रमण का वर्णन किया । कुल मिलाकर ये चारों आधुनिकता की परिभाषक कसौटियाँ हैं ।
- (b)सामंतवाद — सामंतवाद स्वामियों, अनुचरों और कृषिदासों की पूर्व-आधुनिक, भूमि-आधारित व्यवस्था थी, जो वंशानुगत दायित्व और ग्रामीण कृषि अर्थव्यवस्था पर टिकी थी । वही पारंपरिक व्यवस्था है जिसे आधुनिकता ने प्रतिस्थापित किया, न कि उद्योग, नगरों और नौकरशाही का युग ।
- (c)राजतंत्र — राजतंत्र शासन का एक रूप है, सामाजिक संगठन का कोई चरण नहीं । वह प्राचीन, मध्यकालीन और आधुनिक — सभी कालों में रहा है और उसका औद्योगिकीकरण या नौकरशाहीकरण से कोई विशेष संबंध नहीं ।
- (d)मध्ययुगीनवाद — मध्ययुग पर सामंती पदानुक्रम, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक जीवन के केंद्र में धर्म का प्रभुत्व था । यही वह पारंपरिक व्यवस्था है जिससे ये चारों आधुनिक प्रक्रियाएँ समाज को दूर ले गईं ।
आधुनिकता वह समाज-प्रकार है जो यूरोप में लगभग सत्रहवीं से उन्नीसवीं शताब्दी के बीच उभरा और फिर विश्व भर में फैला । समाजशास्त्री उसे परस्पर गुँथे परिवर्तनों के एक समुच्चय से पहचानते हैं — यंत्र-आधारित औद्योगिक उत्पादन, नगरों की वृद्धि, धर्म की सार्वजनिक सत्ता का ह्रास, और अवैयक्तिक, नियम-शासित प्रशासन का उदय । इसे प्रायः पारंपरिक या सामंती समाज के विरोध में परिभाषित किया जाता है ।
जाल यह है कि इन चारों पदों को असंबद्ध मान लिया जाए, या उन्हें किसी समाज-प्रकार के बजाय शासन के किसी रूप (राजतंत्र) से जोड़ दिया जाए । वस्तुतः इनमें से प्रत्येक मध्यकालीन व्यवस्था से दूर हटने को दर्शाता है — अर्थव्यवस्था औद्योगिक बनती है, लोग नगरों की ओर जाते हैं, सत्ता धार्मिक के बजाय धर्मनिरपेक्ष हो जाती है, और प्रशासन नौकरशाही तथा अवैयक्तिक । इनमें से किसी एक को भी पहचान लेना — जैसे वेबर का नौकरशाहीकरण वाला विषय या दुर्खीम का धर्मनिरपेक्ष समाज का विवरण — सीधे आधुनिकता की ओर संकेत कर देता है ।
- औद्योगिकीकरण, शहरीकरण, धर्मनिरपेक्षीकरण और नौकरशाहीकरण आधुनिकता के मानक समाजशास्त्रीय चिह्न हैं ।
- नौकरशाहीकरण और तर्कीकरण विशेष रूप से मैक्स वेबर से जुड़े हैं; श्रम विभाजन और धर्मनिरपेक्ष सामाजिक बंधन एमील दुर्खीम से ।
- आधुनिकता को पारंपरिक या सामंती समाज के विरोध में परिभाषित किया जाता है, जो कृषि-आधारित, ग्रामीण और धर्म-केंद्रित था ।
- राजतंत्र शासन का एक रूप है जो अनेक युगों में मिलता है, सामाजिक विकास का कोई अलग चरण नहीं ।
- राजतंत्र (शासन के एक रूप) को सामाजिक संगठन के किसी चरण से गड्डमड्ड कर देना ।
- इन चारों पदों को आधुनिकता की ओर एक ही संक्रमण के पहलुओं के बजाय यादृच्छिक मान लेना ।
यह चिह्न-प्रक्रियाएँ गिनाकर उस युग या समाज का नाम पूछकर, या किसी सिद्धांतकार को उसके अध्ययन की गई प्रक्रिया से जोड़कर पूछा जाता है ।
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- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
प्रशिक्षित अधिकारियों द्वारा चलाए जाने वाले बड़े, नियम-शासित संगठनों वाली व्यवस्था किस प्रक्रिया का वर्णन करती है ?
- (a)सामंतीकरण
- (b)नौकरशाहीकरण
- (c)शहरीकरण
- (d)धर्मनिरपेक्षीकरण
Answer(b) नौकरशाहीकरण — अधिकारियों द्वारा अवैयक्तिक, नियम-बद्ध प्रशासन, जो विषय सर्वाधिक मैक्स वेबर से जुड़ा है ।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
सार्वजनिक जीवन पर धर्म के प्रभाव के लगातार ह्रास को क्या कहा जाता है ?
- (a)औद्योगिकीकरण
- (b)शहरीकरण
- (c)धर्मनिरपेक्षीकरण
- (d)आधुनिकीकरण
Answer(c) धर्मनिरपेक्षीकरण — सार्वजनिक सत्ता से धर्म का पीछे हटना, जो आधुनिक समाज के चिह्नों में से एक है ।