पृथ्वी से पलायन चाल (एस्केप स्पीड) 11·2 km s⁻¹ के निकट है । दूसरे उपग्रह में, जिसकी त्रिज्या पृथ्वी की त्रिज्या की आधी है और जिसका द्रव्यमान घनत्व पृथ्वी के द्रव्यमान घनत्व से चार गुना है, पलायन चाल km s⁻¹ में किसके निकट होगी ?
- (a)11·2
- (b)15·8
- (c)5·6
- (d)7·9
सही — A, 11·2 km s⁻¹. पलायन चाल v = sqrt(2GM/R) होती है । द्रव्यमान M के स्थान पर घनत्व x आयतन रखने पर, M = rho x (4/3)piR^3, जिससे v = sqrt((8piG/3) x rho x R^2) मिलता है, अर्थात् v, R x sqrt(rho) के समानुपाती है । नए पिंड के लिए R आधी है और rho चार गुना, जिससे अनुपात (1/2) x sqrt(4) = (1/2) x 2 = 1 बनता है । अतः पलायन चाल मूलतः पृथ्वी जितनी ही रहती है — लगभग 11.2 km/s ।
- (b)15·8 — यह लगभग 11.2 x sqrt(2) है । यह घनत्व अनुपात के वर्गमूल sqrt(4) = 2 से गुणा करने पर, किंतु त्रिज्या का 1/2 गुणक भूल जाने पर आता है — अर्थात् केवल घनत्व-परिवर्तन लेने पर ।
- (c)5·6 — यह ठीक 11.2 का आधा है । यह केवल त्रिज्या का गुणक (R आधी) लगाने और घनत्व की चार गुनी वृद्धि की उपेक्षा करने से निकलता है ।
- (d)7·9 — यह लगभग 11.2/sqrt(2) है, जो गुणकों के किसी भ्रांत संयोजन से मिलता है; यह v के R x sqrt(rho) के समानुपाती होने से नहीं निकलता, जो ठीक 11.2 देता है ।
पलायन चाल वह न्यूनतम प्रक्षेपण चाल है जिससे कोई वस्तु आगे किसी प्रणोदन के बिना किसी ग्रह के गुरुत्व से बाहर निकल जाती है । ऊर्जा संरक्षण से यह sqrt(2GM/R) के बराबर होती है, जहाँ M उस पिंड का द्रव्यमान और R उसकी त्रिज्या है । यह पलायन करने वाली वस्तु के द्रव्यमान पर निर्भर नहीं करती ।
जब प्रश्न द्रव्यमान के बजाय घनत्व दे, तो M को (घनत्व) x (आयतन) = rho x (4/3)piR^3 लिख लीजिए । प्रतिस्थापन करने पर पलायन चाल घटकर v, R x sqrt(rho) के समानुपाती रह जाती है, जिससे प्रश्न सरल अनुमापन बन जाता है । त्रिज्या और घनत्व के गुणकों का अलग-अलग हिसाब रखिए, और यहाँ दोनों परिवर्तन ठीक-ठीक कट जाते हैं ।
- पलायन चाल v = sqrt(2GM/R); पृथ्वी के लिए इसका मान लगभग 11.2 km/s है ।
- द्रव्यमान को घनत्व x आयतन लिखने पर v, R x sqrt(घनत्व) के समानुपाती हो जाता है ।
- पलायन चाल, पलायन करने वाले पिंड के द्रव्यमान से स्वतंत्र होती है ।
- इस पिंड के लिए: (R आधी) x sqrt(घनत्व x4) = (1/2) x 2 = 1, अतः v अपरिवर्तित रहती है ।
- दोनों को एक साथ लेने के बजाय केवल घनत्व-परिवर्तन या केवल त्रिज्या-परिवर्तन लगा देना ।
- पलायन चाल को कक्षीय चाल से गड्डमड्ड कर देना, जिनमें sqrt(2) का अंतर होता है ।
यह अनुमापन समस्या के रूप में पूछा जाता है — ऐसे ग्रह पर पलायन चाल, g या कक्षीय चाल की तुलना जिसकी त्रिज्या और घनत्व पृथ्वी से भिन्न हों ।
कथन (A): कृत्रिम उपग्रह सदैव पृथ्वी से पूर्व दिशा में प्रक्षेपित किए जाते हैं । कारण (R): पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है और इसलिए उपग्रह पलायन वेग प्राप्त कर लेता है ।
- (a) A और R दोनों अलग-अलग सही हैं और R, A की सही व्याख्या है
- (b) A और R दोनों अलग-अलग सही हैं, किंतु R, A की सही व्याख्या नहीं है
- (c) A सही है, किंतु R गलत है
- (d) A गलत है, किंतु R सही है
Answer(c) A सही है, किंतु R गलत है
वही अवधारणा — पलायन वेग । UPSC में कारण इसलिए गलत ठहरता है कि उपग्रह को केवल कक्षीय वेग चाहिए, पलायन वेग नहीं — जिससे पलायन बनाम कक्षीय का वही भेद तीखा होता है जो इस NDA अनुमापन प्रश्न के मूल में है ।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
किसी ग्रह से पलायन चाल निम्नलिखित में से किस पर निर्भर करती है ?
- (a)पलायन करने वाली वस्तु के द्रव्यमान पर
- (b)उस ग्रह के द्रव्यमान और त्रिज्या पर
- (c)केवल प्रक्षेपण की दिशा पर
- (d)वस्तु के रंग पर
Answer(b) उस ग्रह के द्रव्यमान और त्रिज्या पर — v = sqrt(2GM/R), जो पलायन करने वाली वस्तु के द्रव्यमान से स्वतंत्र है ।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
यदि किसी ग्रह का घनत्व पृथ्वी जितना ही हो, किंतु त्रिज्या दोगुनी, तो उसकी पलायन चाल होगी :
- (a)उतनी ही
- (b)आधी
- (c)दोगुनी
- (d)चार गुनी
Answer(c) दोगुनी — चूँकि v, R x sqrt(घनत्व) के समानुपाती है, इसलिए घनत्व स्थिर रखते हुए R दोगुनी करने पर पलायन चाल दोगुनी हो जाती है ।