इस्पात से 0·24 kg द्रव्यमान का एक एकसमान मीटर स्केल बनाया जाता है । इसे क्षैतिज स्थिति में, दो वेजों, W₁ और W₂ में रखा जाता है । W₁ इसके एक सिरे से 0·2 m की दूरी पर है, जबकि W₂ दूसरे सिरे से 0·4 m की दूरी पर है । यदि स्केल पर W₁ के कारण अधिरोपित बल N₁ और W₂ के कारण अधिरोपित बल N₂ है, तो : (g = 10·0 m s⁻² लीजिए)
- (a)N₁ = 1·6 N और N₂ = 0·8 N
- (b)N₁ = 0·8 N और N₂ = 1·6 N
- (c)N₁ = 0·6 N और N₂ = 1·8 N
- (d)N₁ = 1·8 N और N₂ = 0·6 N
सही — C, N₁ = 0·6 N और N₂ = 1·8 N. स्केल का भार W = mg = 0.24 x 10 = 2.4 N है, जो उसके केंद्र (0.5 m चिह्न) पर नीचे की ओर कार्य करता है । W₁ उसे 0.2 m चिह्न पर और W₂ 0.6 m चिह्न पर (दूसरे सिरे से 0.4 m) सहारा देता है । W₁ के परितः बल-आघूर्ण लेने पर: N₂ x (0.6 - 0.2) = W x (0.5 - 0.2), अर्थात् N₂ x 0.4 = 2.4 x 0.3, जिससे N₂ = 1.8 N । फिर ऊर्ध्वाधर संतुलन से N₁ = W - N₂ = 2.4 - 1.8 = 0.6 N । द्रव्यमान-केंद्र के अधिक निकट वाला आधार (W₂) बड़ा हिस्सा उठाता है, इसलिए N₂ > N₁ ।
- (a)N₁ = 1·6 N और N₂ = 0·8 N — इन दोनों का योग तो 2.4 N बनता है, किंतु ये बड़ा बल W₁ पर डाल देते हैं । W₁ द्रव्यमान-केंद्र से (0.3 m) अधिक दूर है और W₂ (0.1 m) अधिक निकट, इसलिए W₁ को छोटा भार उठाना चाहिए — यहाँ आबंटन उलटा है ।
- (b)N₁ = 0·8 N और N₂ = 1·6 N — दिशा तो ठीक है (N₂ बड़ा), किंतु अंकगणित गलत है: W₁ के परितः बल-आघूर्ण संतुलन 1.8 N और 0.6 N देता है, 1.6 N और 0.8 N नहीं । यह संभवतः किसी वेज या द्रव्यमान-केंद्र की स्थिति गलत रखने से आता है ।
- (d)N₁ = 1·8 N और N₂ = 0·6 N — संख्याओं का युग्म तो सही है, किंतु वे गलत आधारों से जुड़ी हैं । 1.8 N का भार W₂ (केंद्र के अधिक निकट) का है, W₁ का नहीं ।
दो आधारों पर टिका कोई दृढ़ पिंड साम्य में होता है: ऊपर की ओर लगने वाले आधार-बल भार को संतुलित करते हैं (ऊर्ध्वाधर बलों का योग = 0), और घुमाने के प्रभाव आपस में कट जाते हैं (किसी भी बिंदु के परितः बल-आघूर्णों का योग = 0) । एकसमान स्केल के लिए पूरा भार उसके ज्यामितीय केंद्र — अर्थात् द्रव्यमान-केंद्र — पर कार्यरत माना जा सकता है ।
दो-आधार वाली समस्याओं को हल करने का सुथरा ढंग यह है कि किसी एक आधार के परितः बल-आघूर्ण लीजिए, जिससे उसका अज्ञात बल स्वयं हट जाए (उसकी आघूर्ण भुजा शून्य होती है) । दूसरा बल निकालिए, फिर ऊर्ध्वाधर संतुलन से पहला । एक त्वरित जाँच: द्रव्यमान-केंद्र के अधिक निकट वाला आधार सदैव अधिक भार उठाता है । यहाँ W₂ केंद्र से केवल 0.1 m पर है जबकि W₁ 0.3 m दूर, इसलिए N₂ ही बड़ा बल होना चाहिए ।
- स्केल का भार = mg = 0.24 kg x 10 m/s^2 = 2.4 N, जो 0.5 m (केंद्र) चिह्न पर कार्य करता है ।
- 'W₂ दूसरे सिरे से 0.4 m पर है' को स्थिति में बदलिए: पहले सिरे से 1.0 - 0.4 = 0.6 m ।
- W₁ के परितः बल-आघूर्ण संतुलन: N₂ x 0.4 = 2.4 x 0.3 -> N₂ = 1.8 N ।
- ऊर्ध्वाधर संतुलन: N₁ + N₂ = 2.4 N -> N₁ = 0.6 N ।
- 'दूसरे सिरे से दूरी' को किसी एक ही संदर्भ सिरे से नापी गई स्थिति में बदलना भूल जाना ।
- बड़ा प्रतिक्रिया बल द्रव्यमान-केंद्र से अधिक दूर वाले आधार को दे देना, अधिक निकट वाले को नहीं ।
यह दो आधारों पर टिकी धरन/स्केल, या भार लदे तख्ते के रूप में पूछा जाता है, जिसमें बल-आघूर्ण संतुलन से दोनों प्रतिक्रिया बल निकालने होते हैं ।
No directly related past PYQ was found.
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
एक एकसमान तख्ता दो आधारों पर टिका है । तख्ते के द्रव्यमान-केंद्र के अधिक निकट वाला आधार उठाएगा :
- (a)भार का छोटा हिस्सा
- (b)भार का बड़ा हिस्सा
- (c)ठीक आधा भार
- (d)कोई भार नहीं
Answer(b) भार का बड़ा हिस्सा — अधिक निकट वाला आधार सदैव बड़ा प्रतिक्रिया बल उठाता है ।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
किसी बिंदु के परितः किसी बल का घुमाव प्रभाव (उसका बल-आघूर्ण) किससे मिलता है ?
- (a)बल x द्रव्यमान
- (b)बल x समय
- (c)बल x उस बिंदु से लंबवत दूरी
- (d)बल / दूरी
Answer(c) बल x उस बिंदु से लंबवत दूरी — बल-आघूर्ण = F x d ।