निम्नलिखित कोशिका प्रकारों पर विचार कीजिए : 1. मोनोसाइट; 2. कॉन्ड्रोसाइट; 3. बेसोफिल; 4. लिम्फोसाइट; उपर्युक्त में से कितना/कितने, प्राणि कोशिका प्रकार में शामिल है/हैं ?
- (a)1
- (b)2
- (c)3
- (d)4
सही — D, 4. नामित चारों कोशिकाएँ प्राणि कोशिकाएँ हैं । मोनोसाइट, बेसोफिल और लिम्फोसाइट श्वेत रक्त कोशिकाएँ (ल्यूकोसाइट) हैं जो प्राणियों के रक्त में परिसंचरण करती हैं, और कॉन्ड्रोसाइट वह जीवित कोशिका है जो प्राणियों में उपास्थि बनाती और बनाए रखती है । इनमें से कोई भी पादप कोशिका, जीवाणु या अकोशिकीय संरचना नहीं है, अतः चारों ही प्राणि कोशिका प्रकार में आती हैं — गिनती 4 है ।
- (a)1 — गिनती 1 का अर्थ होता कि चारों में से केवल एक ही प्राणि कोशिका है । वस्तुतः मोनोसाइट, कॉन्ड्रोसाइट, बेसोफिल और लिम्फोसाइट — चारों प्राणि कोशिकाएँ हैं, इसलिए 1 बहुत ही कम है ।
- (b)2 — गिनती 2 तब लुभाती है जब आप केवल दो परिचित रक्त कोशिकाएँ (लिम्फोसाइट और मोनोसाइट) पहचानें और बेसोफिल तथा कॉन्ड्रोसाइट को छोड़ दें । किंतु वे दोनों भी प्राणि कोशिकाएँ हैं, अतः 2 गिनती कम कर देता है ।
- (c)3 — गिनती 3 प्रायः अपरिचित कॉन्ड्रोसाइट को गलत ढंग से बाहर कर देने से आती है । कॉन्ड्रोसाइट एक वास्तविक प्राणि कोशिका (उपास्थि की कोशिका) है, इसलिए चारों इस श्रेणी में आते हैं और उत्तर 4 है, 3 नहीं ।
प्राणी सुकेंद्रकी प्राणि कोशिकाओं से बने होते हैं, जिनमें पादप कोशिकाओं वाली कोशिका भित्ति और हरितलवक नहीं होते । ये कोशिकाएँ रक्त कोशिकाओं और संयोजी ऊतक कोशिकाओं जैसे कुलों में विशिष्टीकृत होती हैं । श्वेत रक्त कोशिकाओं (ल्यूकोसाइट) में मोनोसाइट, लिम्फोसाइट तथा कणिकाणु — न्यूट्रोफिल, इओसिनोफिल और बेसोफिल — आते हैं, जबकि कॉन्ड्रोसाइट उपास्थि नामक संयोजी ऊतक की निवासी कोशिका है ।
यह सूची जान-बूझकर दो अक्सर मिलने वाली रक्त कोशिकाओं (लिम्फोसाइट, मोनोसाइट) को एक कम परिचित कणिकाणु (बेसोफिल) और एक संयोजी ऊतक कोशिका (कॉन्ड्रोसाइट) के साथ मिला देती है । जाल यह है कि किसी अपरिचित नाम को 'सचमुच कोई कोशिका नहीं' मानकर छोड़ दिया जाए, या उनमें से किसी को पादप कोशिका समझ लिया जाए । एक बार प्रत्येक नाम को उसकी जगह रख दीजिए — तीन ल्यूकोसाइट और एक उपास्थि कोशिका — तो दिख जाता है कि चारों साधारण प्राणि कोशिकाएँ हैं और गिनती 4 है ।
- मोनोसाइट, लिम्फोसाइट और बेसोफिल — सभी प्राणियों में मिलने वाली श्वेत रक्त कोशिकाएँ (ल्यूकोसाइट) हैं ।
- बेसोफिल सबसे विरल कणिकाणु है और एलर्जी तथा शोथ प्रतिक्रियाओं में हिस्टामिन और हेपैरिन मुक्त करता है ।
- कॉन्ड्रोसाइट वे जीवित कोशिकाएँ हैं जो उपास्थि नामक संयोजी ऊतक के आधात्री में धँसी रहती हैं ।
- प्रत्येक प्राणि कोशिका सुकेंद्रकी होती है और उसमें वह दृढ़ कोशिका भित्ति तथा हरितलवक नहीं होते जो पादप कोशिकाओं की पहचान हैं ।

- कॉन्ड्रोसाइट या बेसोफिल जैसे अपरिचित कोशिका-नाम को 'वास्तविक कोशिका प्रकार नहीं' मानकर छोड़ देना ।
- यह मान लेना कि सूचीबद्ध कोशिकाओं में से कोई पादप कोशिका होगी — चारों में से कोई नहीं है ।
यह 'निम्नलिखित में से कितनी प्राणि/पादप कोशिकाएँ हैं' के रूप में, या किसी नामित कोशिका को उसके ऊतक से सुमेलित कराकर पूछा जाता है ।
मानव शरीर के किस अंग में लिम्फोसाइट कोशिकाएँ बनती हैं ?
- (a) यकृत
- (b) लंबी अस्थि
- (c) अग्न्याशय
- (d) प्लीहा
Answer(b) लंबी अस्थि
वही अवधारणा — लिम्फोसाइट, जो इस NDA प्रश्न की प्राणि (रक्त) कोशिकाओं में से एक है । UPSC पूछता है कि लिम्फोसाइट कहाँ बनती हैं; उत्तर है लंबी अस्थियों की अस्थि मज्जा ।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
निम्नलिखित में से कौन-सी श्वेत रक्त कोशिका नहीं है ?
- (a)मोनोसाइट
- (b)बेसोफिल
- (c)कॉन्ड्रोसाइट
- (d)लिम्फोसाइट
Answer(c) कॉन्ड्रोसाइट — यह उपास्थि की कोशिका है; शेष तीन श्वेत रक्त कोशिकाएँ हैं ।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
कॉन्ड्रोसाइट किस ऊतक की विशिष्ट कोशिकाएँ हैं ?
- (a)रक्त
- (b)उपास्थि
- (c)तंत्रिका ऊतक
- (d)पेशी
Answer(b) उपास्थि — कॉन्ड्रोसाइट उपास्थि के आधात्री में धँसी रहती हैं ।