मानव नेत्र एक ऐसे कैमरे के समान है जिसके लेन्स :
- (a)स्थिर फोकस दूरी और स्थिर द्वारक आमाप (अपर्चर साइज़) के हैं ।
- (b)परिवर्ती फोकस दूरी और स्थिर द्वारक आमाप (अपर्चर साइज़) के हैं ।
- (c)स्थिर फोकस दूरी और परिवर्ती द्वारक आमाप (अपर्चर साइज़) के हैं ।
- (d)परिवर्ती फोकस दूरी और परिवर्ती द्वारक आमाप (अपर्चर साइज़) के हैं ।
सही — D, परिवर्ती फोकस दूरी और परिवर्ती द्वारक आमाप (अपर्चर साइज़) के हैं । नेत्र समंजन द्वारा फोकस करता है: पक्ष्माभी पेशियाँ लचीले नेत्र लेन्स की वक्रता बदल देती हैं, जिससे उसकी फोकस दूरी बदलती है और पास तथा दूर — दोनों की वस्तुएँ दृष्टिपटल पर स्पष्ट प्रतिबिंब बनाती हैं । अतः साधारण कैमरे के विपरीत यहाँ फोकस दूरी परिवर्ती है । साथ ही परितारिका एक स्वचालित डायाफ्राम की तरह काम करती है और पुतली को खोलकर या सिकोड़कर भीतर आने वाले प्रकाश की मात्रा नियंत्रित करती है, जो एक परिवर्ती द्वारक है । दोनों राशियाँ समायोजित होती हैं, इसलिए विकल्प (d) सही है ।
- (a)स्थिर फोकस दूरी और स्थिर द्वारक आमाप (अपर्चर साइज़) के हैं । — यह किसी सस्ते स्थिर-फोकस कैमरे का वर्णन है, नेत्र का नहीं । नेत्र अपनी फोकस दूरी (समंजन द्वारा) और अपना द्वारक (पुतली) — दोनों बदलता है, इसलिए इनमें से कोई भी स्थिर नहीं है ।
- (b)परिवर्ती फोकस दूरी और स्थिर द्वारक आमाप (अपर्चर साइज़) के हैं । — फोकस दूरी का परिवर्ती होना तो ठीक है, पर द्वारक स्थिर नहीं है — प्रकाश का स्तर बदलते ही परितारिका पुतली को लगातार चौड़ा या सँकरा करती रहती है ।
- (c)स्थिर फोकस दूरी और परिवर्ती द्वारक आमाप (अपर्चर साइज़) के हैं । — इसमें फोकस दूरी वाला भाग गलत है । नेत्र लेन्स समंजन के द्वारा अपनी फोकस दूरी बदलता ही है; वह किसी कठोर कैमरा-लेन्स की तरह एक ही स्थिर मान पर नहीं टिका रहता ।
नेत्र की तुलना प्राय: कैमरे से की जाती है: कॉर्निया और लेन्स प्रकाश को दृष्टिपटल ('फ़िल्म') पर फोकस करते हैं, और परितारिका पुतली (द्वारक) से भीतर आने वाले प्रकाश को नियंत्रित करती है । मुख्य अंतर यह है कि नेत्र का लेन्स लचीला है — पक्ष्माभी पेशियाँ उसका आकार बदलकर फोकस दूरी बदल देती हैं — जबकि साधारण कैमरे में लेन्स कठोर रहता है और फोकस उसे आगे-पीछे खिसकाकर किया जाता है ।
विकल्प के दोनों हिस्सों को अलग-अलग परखिए । नेत्र समंजन से फोकस समायोजित करता है, इसलिए फोकस दूरी परिवर्ती है — इससे 'स्थिर फोकस दूरी' वाले विकल्प निकल जाते हैं । पुतली मंद प्रकाश में स्पष्ट रूप से चौड़ी और तेज़ प्रकाश में सँकरी हो जाती है, इसलिए द्वारक भी परिवर्ती है — इससे 'स्थिर द्वारक' वाले विकल्प निकल जाते हैं । केवल वही विकल्प बचता है जो दोनों को परिवर्ती कहता है ।
- समंजन द्वारा पक्ष्माभी पेशियाँ नेत्र लेन्स की वक्रता और इस प्रकार उसकी फोकस दूरी बदलती हैं, जिससे भिन्न दूरियों की वस्तुएँ फोकस में आती हैं ।
- सामान्य नेत्र निकट बिंदु (लगभग 25 cm) से लेकर दूर बिंदु (अनंत) तक फोकस कर सकता है ।
- परितारिका पुतली को नियंत्रित करती है, जो नेत्र का द्वारक है — तेज़ प्रकाश में यह सँकरी और मंद प्रकाश में चौड़ी हो जाती है ।
- साधारण कैमरे में स्थिर फोकस दूरी वाला लेन्स होता है और फोकस लेन्स को खिसकाकर किया जाता है — नेत्र लेन्स की तरह आकार बदलकर नहीं ।
- दृष्टिपटल पर बना प्रतिबिंब वास्तविक, उल्टा और वस्तु से छोटा होता है; मस्तिष्क उसकी व्याख्या सीधी के रूप में करता है ।

- यह मान लेना कि नेत्र लेन्स को (कैमरे की तरह) खिसकाकर फोकस करता है, न कि उसका आकार बदलकर ।
- यह सोचना कि पुतली का आमाप स्थिर है — वह प्रकाश के स्तर के साथ लगातार बदलती रहती है ।
- दृष्टिपटल (प्रकाश-संवेदी भाग) को द्वारक (पुतली) समझ बैठना ।
NDA/UPSC नेत्र की तुलना कैमरे से करते हैं या पूछते हैं कि वह फोकस और प्रकाश को कैसे नियंत्रित करता है — समंजन (परिवर्ती फोकस दूरी) और परितारिका/पुतली (परिवर्ती द्वारक) याद रखिए ।
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- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भिन्न दूरियों की वस्तुओं को फोकस करने के लिए नेत्र लेन्स की फोकस दूरी बदलने की क्षमता कहलाती है
- (a)दृष्टि निर्बंधता
- (b)समंजन
- (c)वर्ण-विक्षेपण
- (d)पूर्ण आंतरिक परावर्तन
Answer(b) समंजन — पक्ष्माभी पेशियाँ लचीले लेन्स का आकार बदलकर उसकी फोकस दूरी बदल देती हैं ।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
मानव नेत्र का कौन-सा भाग पुतली का आमाप समायोजित कर भीतर आने वाले प्रकाश की मात्रा नियंत्रित करता है ?
- (a)कॉर्निया
- (b)दृष्टिपटल
- (c)परितारिका
- (d)लेन्स
Answer(c) परितारिका — यह डायाफ्राम की तरह काम करती है और प्रकाश के स्तर के साथ पुतली को चौड़ा या सँकरा करती है ।