गाँधीजी ने किस आन्दोलन के समय वेल्स के राजकुमार का बहिष्कार करने का आह्वान किया ?
- (a)ख़िलाफ़त आन्दोलन
- (b)असहयोग आन्दोलन
- (c)सविनय अवज्ञा आन्दोलन
- (d)भारत छोड़ो आन्दोलन
सही उत्तर — (b) असहयोग आन्दोलन। जब वेल्स के राजकुमार एडवर्ड (बाद में सम्राट एडवर्ड अष्टम) ने भारत का दौरा किया और 17 नवम्बर 1921 को बम्बई पहुँचे, तब कांग्रेस ने — चल रहे असहयोग आन्दोलन (1920 में आरम्भ) के भाग के रूप में — इस यात्रा के पूर्ण बहिष्कार का आह्वान किया। उस दिन को राष्ट्रव्यापी हड़ताल से चिह्नित किया गया: दुकानें, मिलें और बाजार बंद रहे, तथा आन्दोलन के स्वदेशी घटक के भाग के रूप में विदेशी कपड़ों की होली जलाई गई।
- (a)ख़िलाफ़त आन्दोलन — उस्मानी खिलाफत को लेकर ख़िलाफ़त आंदोलन इसी काल में असहयोग आन्दोलन के साथ-साथ चला और उसमें विलीन भी हुआ, परन्तु वेल्स के राजकुमार का बहिष्कार असहयोग आन्दोलन की कार्रवाई थी, कोई अलग ख़िलाफ़त माँग नहीं।
- (c)सविनय अवज्ञा आन्दोलन — यह 1930 में दांडी मार्च के साथ आरम्भ हुआ — वेल्स के राजकुमार की 1921 की यात्रा के लगभग एक दशक बाद, इसलिए यह इस बहिष्कार का आह्वान नहीं कर सकता था।
- (d)भारत छोड़ो आन्दोलन — यह अगस्त 1942 में आरम्भ हुआ — 1921 की वेल्स के राजकुमार की यात्रा के दो दशक से अधिक बाद, इसलिए यह कालानुक्रमिक रूप से असंभव है।
असहयोग आन्दोलन (1920-22) ने ख़िलाफ़त शिकायत को स्वराज की माँग के साथ जोड़ा, और इसकी विधि के रूप में ब्रिटिश वस्तुओं, उपाधियों, अदालतों और संस्थानों के बहिष्कार का उपयोग किया। नवम्बर 1921 में वेल्स के राजकुमार की यात्रा का बहिष्कार इसकी सबसे दृश्यमान सामूहिक कार्रवाइयों में से एक था — एक सहज विरोध के बजाय एक समन्वित, राष्ट्रव्यापी हड़ताल।
परीक्षाएँ यह परखती हैं कि किसी विशिष्ट विरोध घटना को उसके सही मूल आन्दोलन व दशक में रखा गया है या नहीं — जाल यह है कि वर्ष की जाँच किए बिना अधिक 'प्रसिद्ध' बाद के आन्दोलन (सविनय अवज्ञा, भारत छोड़ो) को डिफ़ॉल्ट मान लिया जाए।
- वेल्स के राजकुमार (बाद में एडवर्ड अष्टम) 17 नवम्बर 1921 को बम्बई पहुँचे; इस यात्रा का बहिष्कार राष्ट्रव्यापी हड़ताल से किया गया।
- यह बहिष्कार असहयोग आन्दोलन (1920-22) के भाग के रूप में आयोजित किया गया था, न कि किसी स्वतंत्र आन्दोलन के रूप में।
- असहयोग आन्दोलन ने ख़िलाफ़त मुद्दे को स्वराज की माँग के साथ जोड़ा।
- फरवरी 1922 में चौरी-चौरा कांड के बाद गाँधी ने इस आन्दोलन को वापस ले लिया।

- असहयोग आन्दोलन आरम्भ (1920)
- वेल्स के राजकुमार की यात्रा का बहिष्कार — राष्ट्रव्यापी हड़ताल (17 नवम्बर 1921)
- चौरी-चौरा कांड (4 फरवरी 1922)
- गाँधी ने आन्दोलन वापस लिया (12 फरवरी 1922)
वेल्स के राजकुमार का बहिष्कार असहयोग आन्दोलन के एक वर्ष बाद हुआ और चौरी-चौरा के बाद इसके वापस लिए जाने से कुछ महीने पहले।
- 1920 के दशक की किसी विरोध घटना को वर्ष जाँचे बिना किसी बाद के, अधिक 'प्रसिद्ध' आन्दोलन (सविनय अवज्ञा या भारत छोड़ो) में रख देना
- ख़िलाफ़त आन्दोलन और असहयोग आन्दोलन को समान्तर, विलीन अभियानों के बजाय एक ही मान लेना
MPPSC/UPSC प्रायः पूछते हैं कि कोई विशिष्ट विरोध घटना या नारा किस आन्दोलन से संबंधित है — 'स्वतंत्रता संग्राम' की सामान्य समझ के बजाय प्रत्येक घटना को उसके सटीक वर्ष व आन्दोलन से जोड़कर याद रखें।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
असहयोग आन्दोलन को गाँधी ने औपचारिक रूप से किस घटना के बाद वापस लिया?
- (a)जलियाँवाला बाग हत्याकांड
- (b)चौरी-चौरा कांड (फरवरी 1922)
- (c)रौलेट एक्ट के विरोध
- (d)वेल्स के राजकुमार की यात्रा
उत्तर(b) चौरी-चौरा कांड, फरवरी 1922 — एक पुलिस थाने पर हुई हिंसा के कारण गाँधी ने आन्दोलन स्थगित कर दिया।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
1920 में आरम्भ असहयोग आन्दोलन ने स्वराज की माँग को किस अन्य शिकायत के साथ जोड़ा?
- (a)ख़िलाफ़त मुद्दा
- (b)बंगाल का विभाजन
- (c)इल्बर्ट बिल विवाद
- (d)साइमन कमीशन का बहिष्कार
उत्तर(a) ख़िलाफ़त मुद्दा — इस आन्दोलन ने उस्मानी खिलाफत को लेकर मुस्लिम शिकायतों को स्वराज की माँग के साथ जोड़ा।