मौर्य कालीन प्रशासनिक व्यवस्था में प्रदेष्टा किस विभाग से सम्बन्धित है ?
- (a)राजस्व विभाग
- (b)न्याय विभाग
- (c)सैन्य विभाग
- (d)आर्थिक विभाग
सही उत्तर — (b) न्याय विभाग। कौटिल्य के अर्थशास्त्र में वर्णित प्रदेष्ट्री (प्रदेष्टा), मौर्यकालीन एक अधिकारी था, जो कण्टकशोधन न्यायालयों — आपराधिक मामलों तथा लोक-व्यवस्था के विरुद्ध अपराधों की सुनवाई करने वाले न्यायाधिकरण — की अध्यक्षता करता था, और साथ ही स्थानीय प्रशासन के निरीक्षण हेतु नियमित रूप से जिलों का दौरा भी करता था। यह आपराधिक-न्यायिक अधिकार व प्रशासनिक निरीक्षण का संयोजन प्रदेष्ट्री को स्पष्ट रूप से न्याय/आपराधिक-प्रशासन कार्य में रखता है, जो राजस्व, सैन्य या कोषागार अधिकारियों से भिन्न है।
- (a)राजस्व विभाग — मौर्यकालीन राजस्व निर्धारण व संग्रहण समाहर्ता (राजस्व के मुख्य संग्रहकर्ता) का क्षेत्र था, प्रदेष्ट्री का नहीं।
- (c)सैन्य विभाग — मौर्य प्रशासन में सैन्य कमान सेनापति (सेना का प्रधान सेनापति) के अधीन थी; प्रदेष्ट्री की भूमिका न्यायिक व प्रशासनिक भ्रमण की थी, सैन्य नहीं।
- (d)आर्थिक विभाग — मौर्य प्रशासन में इस अर्थ में कोई अलग 'आर्थिक विभाग' नहीं था, और प्रदेष्ट्री का दस्तावेज़ित कार्य न्यायिक निरीक्षण था, आर्थिक प्रबंधन नहीं।
कौटिल्य का अर्थशास्त्र एक संरचित मौर्य नौकरशाही का वर्णन करता है, जिसमें अधिकारियों को स्पष्ट कार्यों के लिए नियुक्त किया गया था। प्रदेष्ट्री दो भूमिकाओं को जोड़ता था: कण्टकशोधन न्यायालयों (जो आपराधिक अपराधों व लोक-व्यवस्था के लिए खतरों की सुनवाई करते थे) की अध्यक्षता करना, तथा जिला अधिकारियों के आचरण के निरीक्षण हेतु आवधिक रूप से अपने क्षेत्राधिकार का दौरा करना — जिससे इस पद के लिए 'न्याय/आपराधिक प्रशासन' सही वर्गीकरण बनता है।
MPPSC/UPSC मौर्य प्रशासनिक अधिकारियों की परीक्षा प्रत्येक विशिष्ट पदवी (प्रदेष्ट्री, समाहर्ता, सेनापति, सन्निधाता) को उसके सही कार्य से मिलाकर लेते हैं — जाल यह है कि अधिकारी के दस्तावेज़ित अर्थशास्त्र-कार्य की जाँच किए बिना नाम के 'ध्वनि' के आधार पर अनुमान लगाया जाए।
- प्रदेष्ट्री (प्रदेष्टा) — कण्टकशोधन न्यायालयों की अध्यक्षता करता था, जो आपराधिक मामलों व लोक-व्यवस्था के विरुद्ध अपराधों की सुनवाई करते थे।
- प्रदेष्ट्री अपने क्षेत्राधिकार के जिला अधिकारियों के प्रशासन का निरीक्षण करने हेतु दौरा भी करता था।
- समाहर्ता मौर्यकालीन राजस्व का मुख्य संग्रहकर्ता था — प्रदेष्ट्री से एक अलग पद।
- सेनापति सैन्य प्रशासन की देखरेख करने वाला प्रधान सेनापति था — यह भी प्रदेष्ट्री से अलग था।

मौर्य प्रशासन ने विशिष्ट कार्यों के लिए अलग-अलग अधिकारी नियुक्त किए थे — प्रदेष्ट्री का क्षेत्र न्याय व आपराधिक निरीक्षण था, राजस्व, सैन्य या कोषागार नहीं।
- किसी अधिकारी के विभाग का अनुमान उसकी पदवी की ध्वनि से लगाना, न कि अर्थशास्त्र में दस्तावेज़ित कार्य से
- प्रदेष्ट्री (न्यायिक/भ्रमण अधिकारी) को समाहर्ता (राजस्व) या सेनापति (सैन्य) के साथ भ्रमित कर देना
MPPSC/UPSC मौर्य प्रशासन के लिए 'अधिकारी X किस विभाग से संबंधित है' अक्सर परखते हैं — पदवियों को अलग-अलग रटने के बजाय एक स्थिर अधिकारी-से-कार्य तालिका बनाएँ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
मौर्य प्रशासन में, राज्य के राजस्व के निर्धारण एवं संग्रहण हेतु उत्तरदायी अधिकारी क्या कहलाता था?
- (a)प्रदेष्ट्री
- (b)समाहर्ता
- (c)सेनापति
- (d)सन्निधाता
उत्तर(b) समाहर्ता — राजस्व का मुख्य संग्रहकर्ता।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
कौटिल्य के अर्थशास्त्र में वर्णित कण्टकशोधन न्यायालय मुख्यतः किससे संबंधित थे?
- (a)नागरिक संपत्ति विवाद
- (b)आपराधिक मामले और लोक-व्यवस्था के विरुद्ध खतरे
- (c)व्यापार व कराधान विवाद
- (d)जिला अधिकारियों के बीच विवाद
उत्तर(b) आपराधिक मामले और लोक-व्यवस्था के विरुद्ध खतरे — इनकी अध्यक्षता प्रदेष्ट्री सहित अधिकारी करते थे।