किसके कारण रेल बजट को आम बजट से अलग किया गया ?
- (a)1925 का वितरण सम्मेलन
- (b)1924 का पृथकता सम्मेलन
- (c)1924 का प्राक्कलनों का द्विभाजन
- (d)1925 का समकारी सम्मेलन
सही उत्तर — B, (b) 1924 का पृथकता सम्मेलन । यहाँ सबसे पहले एक शब्द साफ़ कर लेना आवश्यक है, क्योंकि हिन्दी स्तंभ में वही सबसे अधिक भ्रम पैदा करता है : पुस्तिका 'Convention' के लिए 'सम्मेलन' छापती है, जिससे लगता है कि कोई बैठक या अधिवेशन हुआ था । यहाँ अर्थ वह नहीं है । 'Convention' का अर्थ है वह मान्य परिपाटी अथवा संकल्प जिसे विधानमंडल स्वीकार करके आगे के लिए नियम बना ले । ऐसा ही एक संकल्प 1924 में केंद्रीय विधान सभा ने स्वीकार किया और उसी से रेल बजट आम बजट से अलग हुआ । पृष्ठभूमि यह थी कि रेलवे का लेखा शेष सरकारी आय-व्यय में मिला रहने के कारण उसका घाटा या लाभ सामान्य राजस्व को झकझोर देता था और रेलवे के अपने विकास के लिए स्थायी योजना बन नहीं पाती थी । सर विलियम एक्वर्थ की अध्यक्षता वाली समिति ने 1921 में यही कहकर रेल वित्त को अलग करने की सिफ़ारिश की, और 1924 के इसी संकल्प से वह लागू हुई । उसके बाद रेलवे अपना बजट अलग से प्रस्तुत करने लगा और सामान्य राजस्व को अपनी पूँजी पर एक निश्चित वार्षिक अंशदान देने लगा । यह व्यवस्था बानवे वर्ष चली । 2017-18 से रेल बजट पुनः आम बजट में मिला दिया गया, जिसकी सिफ़ारिश बिबेक देबरॉय की अध्यक्षता वाली समिति ने की थी । अतः इस प्रश्न में तिथि और साधन दोनों ही मिलाकर देखने पड़ते हैं — वर्ष 1924 और साधन पृथकता संबंधी संकल्प ।
- (a)1925 का वितरण सम्मेलन — '1925 का वितरण सम्मेलन' दो कारणों से बाहर है । पहला, वर्ष ही ठीक नहीं है — रेल बजट का पृथक्करण 1924 के संकल्प से हुआ, 1925 के किसी संकल्प से नहीं । दूसरा, जिस दस्तावेज़ के आधार पर यह पृथक्करण इतिहास में दर्ज है उसका नाम पृथक्करण से ही जुड़ा है, वितरण से नहीं । यह विकल्प उस अभ्यर्थी को फँसाता है जिसे केवल यह याद रह गया हो कि बीसवीं शताब्दी के तीसरे दशक में कोई संकल्प हुआ था, पर वर्ष और नाम दोनों धुँधले हों ।
- (c)1924 का प्राक्कलनों का द्विभाजन — '1924 का प्राक्कलनों का द्विभाजन' इस प्रश्न का सबसे चतुर विकल्प है, क्योंकि इसमें वर्ष सही है और विवरण भी सुनने में ठीक लगता है — प्राक्कलन का अर्थ बजट अनुमान है और द्विभाजन का अर्थ दो भागों में बाँटना, अर्थात् वही जो हुआ । पर प्रश्न यह पूछ रहा है कि पृथक्करण किसके कारण हुआ, अर्थात् वह किस साधन से किया गया ; और वह साधन विधान सभा द्वारा स्वीकार किया गया पृथक्करण संबंधी संकल्प था । 'प्राक्कलनों का द्विभाजन' उस संकल्प का परिणाम बताने वाला वर्णन भर है, उसका नाम नहीं ।
- (d)1925 का समकारी सम्मेलन — '1925 का समकारी सम्मेलन' में भी वर्ष ठीक नहीं है, और नाम भी उस दस्तावेज़ का नहीं है जिससे रेल बजट अलग हुआ । 'समकारी' का अर्थ बराबर करने वाला होता है, और रेल वित्त की व्यवस्था में उतार-चढ़ाव को संतुलित करने के लिए आगे चलकर कोष अवश्य बनाए गए ; पर वे उसी 1924 वाली व्यवस्था के भीतर की बातें हैं, पृथक्करण का कारण नहीं । ऐसे विकल्पों में सुरक्षित कसौटी यह है कि पहले वर्ष जाँच लिया जाए — तिथि गलत हो तो नाम पढ़ने की आवश्यकता ही नहीं रहती ।
भारत में रेलवे उन्नीसवीं शताब्दी से ही अर्थव्यवस्था और राजकोष दोनों का बड़ा अंग रहा है । बीसवीं शताब्दी के आरंभ में रेलवे का लेखा सरकार के सामान्य लेखे में ही मिला हुआ था, जिससे दो कठिनाइयाँ थीं : रेलवे के अच्छे वर्षों का लाभ दूसरी मदों में चला जाता था और बुरे वर्षों का घाटा सामान्य राजस्व पर पड़ता था ; और रेलवे अपनी दीर्घकालिक योजना के लिए किसी स्थिर स्रोत पर भरोसा नहीं कर पाता था । एक्वर्थ समिति ने 1921 में इसी को दूर करने के लिए रेल वित्त को अलग करने और रेलवे के प्रशासन को पुनर्गठित करने की सिफ़ारिश की, और 1924 के संकल्प से यह व्यवस्था लागू हुई, जिसमें रेलवे सामान्य राजस्व को अपनी पूँजी पर वार्षिक अंशदान देता था ।
यह प्रश्न प्रश्नपत्र के अर्थव्यवस्था और शासन वाले खंड का है और उसकी उपयोगिता आज भी है, क्योंकि रेल बजट का इतिहास बजट-प्रक्रिया के सुधारों की कड़ी में आता है । 2017-18 वह वर्ष है जब तीन बड़े परिवर्तन एक साथ हुए — रेल बजट का आम बजट में विलय, बजट प्रस्तुत करने की तिथि फ़रवरी के अंतिम कार्यदिवस से हटाकर 1 फ़रवरी करना, और योजना तथा योजनेतर व्यय का भेद समाप्त करना । हिन्दी स्तंभ में शब्दावली विधि-हिन्दी की है : 'प्राक्कलन' का अर्थ अनुमान अथवा बजट अनुमान है, 'द्विभाजन' का अर्थ दो भागों में बाँटना, 'पृथकता' का अर्थ अलगाव, और 'समकारी' का अर्थ बराबर करने वाला । सबसे बड़ी सावधानी 'सम्मेलन' को लेकर आवश्यक है, जो यहाँ बैठक नहीं, स्वीकृत परिपाटी के अर्थ में आया है ।
- सर विलियम एक्वर्थ की अध्यक्षता वाली समिति ने 1921 में रेल वित्त को सामान्य वित्त से अलग करने की सिफ़ारिश की ।
- 1924 में केंद्रीय विधान सभा द्वारा स्वीकार किए गए पृथक्करण संबंधी संकल्प से रेल बजट आम बजट से अलग हुआ ।
- इस व्यवस्था में रेलवे सामान्य राजस्व को अपनी पूँजी पर एक निश्चित वार्षिक अंशदान देता था ।
- रेल बजट 2017-18 से पुनः आम बजट में मिला दिया गया, अर्थात् अलग बजट की परंपरा बानवे वर्ष चली ।
- विलय की सिफ़ारिश बिबेक देबरॉय की अध्यक्षता वाली समिति ने की थी ।
- 2017-18 से ही बजट प्रस्तुत करने की तिथि 1 फ़रवरी की गई और योजना तथा योजनेतर व्यय का भेद समाप्त कर दिया गया ।
- 'सम्मेलन' को बैठक समझ लेना ; यहाँ वह स्वीकृत परिपाटी के अर्थ में है ।
- एक्वर्थ समिति के वर्ष 1921 को ही पृथक्करण का वर्ष मान लेना ; सिफ़ारिश 1921 की है और कार्यान्वयन 1924 का ।
- 'प्राक्कलनों का द्विभाजन' को दस्तावेज़ का नाम मान लेना ; वह घटना का वर्णन है ।
इस प्रकरण पर प्रश्न प्रायः दो सिरों से पूछे जाते हैं — पृथक्करण किस वर्ष और किसके कारण हुआ, तथा विलय किस वर्ष और किसकी सिफ़ारिश पर हुआ । बीच की कड़ी, अर्थात् एक्वर्थ समिति, स्वतंत्र रूप से भी पूछी जाती है । कभी-कभी प्रश्न इस रूप में आता है कि 2017-18 के बजट में कौन-कौन से परिवर्तन एक साथ हुए । तैयारी के लिए इस पूरी कथा को तीन तिथियों में बाँधकर याद रखना पर्याप्त है — 1921 की सिफ़ारिश, 1924 का पृथक्करण और 2017-18 का विलय ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
रेल वित्त को सामान्य वित्त से अलग करने की सिफ़ारिश निम्नलिखित में से किस समिति ने की थी ?
- (a)एक्वर्थ समिति
- (b)इंचकेप समिति
- (c)मुडीमैन समिति
- (d)साइमन आयोग
उत्तर(a) एक्वर्थ समिति — इंचकेप समिति व्यय में कटौती से संबंधित थी, मुडीमैन समिति संवैधानिक सुधारों की समीक्षा के लिए बनी थी और साइमन आयोग 1927 का है ।
- practice — not a real PYQ
रेल बजट को किस वित्तीय वर्ष से आम बजट में पुनः मिला दिया गया ?
- (a)2014-15
- (b)2015-16
- (c)2016-17
- (d)2017-18
उत्तर(d) 2017-18 — इसी वर्ष से बजट प्रस्तुत करने की तिथि भी 1 फ़रवरी कर दी गई ।