(·1101)₂ का दशमलव समतुल्य क्या है ?
- (a)0·8122
- (b)0·8123
- (c)0·8124
- (d)0·8125
सही उत्तर — D, (d) 0·8125 । द्विआधारी संख्या में दशमलव बिंदु के बाद के अंकों का मान 2 की ऋणात्मक घातों से निकलता है : पहला स्थान 2⁻¹ = 0·5, दूसरा 2⁻² = 0·25, तीसरा 2⁻³ = 0·125 और चौथा 2⁻⁴ = 0·0625 । दी गई संख्या ·1101 के अंक क्रमशः 1, 1, 0 और 1 हैं, अतः उसका मान होगा 0·5 + 0·25 + 0 + 0·0625 = 0·8125 । यही उत्तर दूसरे तरीक़े से और तेज़ी से आता है : बिंदु हटाकर 1101 को पूर्णांक की तरह पढ़िए, जो 8 + 4 + 0 + 1 = 13 होता है ; बिंदु के बाद चार अंक थे, इसलिए उसे 2⁴ = 16 से भाग दीजिए । 13 ÷ 16 = 0·8125 । ध्यान देने योग्य बात यह है कि चारों विकल्प केवल अंतिम अंक में भिन्न हैं — 0·8122, 0·8123, 0·8124 और 0·8125 — इसलिए अनुमान से काम नहीं चलता । पर एक कसौटी पूरी गणना किए बिना ही तीन विकल्प काट देती है : जिस द्विआधारी भिन्न का अंतिम अंक 1 हो, उसका मान सदैव किसी विषम संख्या को 2 की घात से भाग देने पर मिलता है, और ऐसी हर भिन्न का दशमलव विस्तार समाप्त होता है तथा उसका अंतिम अंक 5 ही होता है । कारण सरल है — 2 की घात से भाग देने के लिए अंश और हर दोनों को 5 की उतनी ही घात से गुणा कर दिया जाता है, और विषम संख्या को 5 से गुणा करने पर अंत में 5 ही आता है । इसलिए यहाँ उत्तर केवल वही हो सकता था जो 5 पर समाप्त होता है । पुस्तिका दशमलव बिंदु को उठे हुए मध्य-बिंदु के रूप में छापती है, और स्टेम में कोष्ठक के आगे लिखा छोटा 2 यह बताता है कि संख्या द्विआधारी आधार में है ।
- (a)0·8122 — 0·8122 गणना से नहीं निकलता । यह और इसके साथ के दो विकल्प केवल इसलिए रखे गए हैं कि अभ्यर्थी अंतिम अंक पर ध्यान न दे और लगभग सही दिखने वाला कोई मान चुन ले । कोई भी परिमित द्विआधारी भिन्न, जिसका अंतिम अंक 1 हो, दशमलव में 5 पर ही समाप्त होती है, इसलिए 2 पर समाप्त होने वाला मान इस प्रकार की किसी भी संख्या का हो ही नहीं सकता ।
- (b)0·8123 — 0·8123 भी उसी कारण से बाहर है । यदि इसे सही मान लिया जाए तो इसका अर्थ यह होगा कि ·1101 का मान 8123/10000 है, जबकि द्विआधारी भिन्न का हर सदैव 2 की कोई घात होता है — यहाँ 16 । 8123/10000 को घटाकर हर में 2 की घात लाना संभव नहीं, क्योंकि 8123 विषम है और 10000 में 5 की घातें भी हैं । अतः यह मान संरचना से ही असंगत है ।
- (c)0·8124 — 0·8124 सम अंक पर समाप्त होता है, इसलिए वह भी किसी ऐसी द्विआधारी भिन्न का मान नहीं हो सकता जिसका अंतिम अंक 1 हो । यदि कोई अभ्यर्थी अंतिम स्थान का भार 0·0625 के बदले 0·0624 जैसा कुछ मान ले, या 13/16 को भाग देने में एक स्थान की चूक कर बैठे, तो वह इसी विकल्प पर पहुँचता है । सही भार 2⁻⁴ = 0·0625 है और भाग पूरा होता है, शेष कुछ नहीं बचता ।
किसी भी आधार में स्थानीय मान का नियम एक ही है । बिंदु के बाईं ओर के अंक आधार की बढ़ती धनात्मक घातों से गुणा होते हैं और दाईं ओर के अंक घटती ऋणात्मक घातों से । आधार 2 में ये भार 2⁻¹ = 0·5, 2⁻² = 0·25, 2⁻³ = 0·125, 2⁻⁴ = 0·0625, 2⁻⁵ = 0·03125 हैं । इससे दो व्यावहारिक नियम निकलते हैं । पहला — बिंदु के बाद n अंकों वाली द्विआधारी भिन्न का मान सदैव (उन अंकों से बनी पूर्णांक संख्या) ÷ 2ⁿ होता है । दूसरा — ऐसी हर संख्या का दशमलव विस्तार परिमित होता है, क्योंकि 2 दस का गुणनखंड है ; उलटा सत्य नहीं है, क्योंकि 0·1 या 1/3 जैसी संख्याएँ द्विआधारी में अनंत हो जाती हैं ।
संख्या पद्धतियाँ इस प्रश्नपत्र के कंप्यूटर खंड की स्थायी सामग्री हैं, और उनका व्यावहारिक महत्व यही है कि कंप्यूटर हर संख्या को द्विआधारी में ही रखता है । यही कारण है कि 0·1 जैसी सीधी दशमलव संख्या भी मशीन में ठीक-ठीक नहीं बैठती और गणना में सूक्ष्म अंतर आ जाता है । इस प्रश्न में हिन्दी और अंग्रेज़ी दोनों स्तंभों के विकल्प अक्षरशः एक हैं, क्योंकि वे केवल संख्याएँ हैं । एक छपाई की बात ध्यान में रखिए — यह पुस्तिका दशमलव बिंदु को साधारण बिंदु के बदले उठे हुए मध्य-बिंदु के रूप में छापती है, और स्टेम में संख्या को कोष्ठक में रखकर उसके आगे छोटा 2 लिखा गया है, जो आधार बताता है ।
- द्विआधारी भिन्न में बिंदु के बाद के भार क्रमशः 0·5, 0·25, 0·125, 0·0625, 0·03125 हैं ।
- (·1101)₂ = 0·5 + 0·25 + 0 + 0·0625 = 0·8125 ।
- तेज़ विधि : बिंदु हटाकर 1101₂ = 13 निकालिए और बिंदु के बाद के अंकों की संख्या के अनुसार 2⁴ = 16 से भाग दीजिए ; 13/16 = 0·8125 ।
- जिस द्विआधारी भिन्न का अंतिम अंक 1 हो, उसका दशमलव विस्तार सदैव अंक 5 पर समाप्त होता है ।
- हर परिमित द्विआधारी भिन्न का दशमलव रूप परिमित होता है, पर हर परिमित दशमलव भिन्न का द्विआधारी रूप परिमित नहीं होता — 0·1 इसका उदाहरण है ।
- दशमलव भिन्न को द्विआधारी में बदलने की विधि उलटी है : भिन्न भाग को बार-बार 2 से गुणा कीजिए और हर बार निकलने वाला पूर्णांक अंक क्रम से लिखते जाइए ।
- बिंदु के बाद के भारों को 2⁻¹ से आरंभ करने के बदले 2⁰ से आरंभ कर देना ।
- 0 वाले स्थान को गिनती में छोड़ देना, जिससे शेष अंकों के भार एक स्थान खिसक जाते हैं ।
- अंतिम अंक में ही भिन्न दिखने वाले चार विकल्पों को देखकर अनुमान लगा लेना ।
इस विषय पर प्रश्न प्रायः चार रूपों में आते हैं — द्विआधारी से दशमलव, दशमलव से द्विआधारी, द्विआधारी से षोडश आधारी, और सीधा द्विआधारी अंकगणित । भिन्न वाला रूप, जैसा यहाँ है, सबसे अधिक चूक कराता है, क्योंकि अभ्यर्थी पूर्णांक वाली विधि का अभ्यास तो कर आता है पर बिंदु के बाद के ऋणात्मक भारों का नहीं । सुरक्षित तरीक़ा यही है कि बिंदु के बाद के अंकों को पूर्णांक की तरह पढ़कर 2 की उपयुक्त घात से भाग दे दिया जाए — इसमें भार याद रखने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
(0·101)₂ का दशमलव समतुल्य क्या है ?
- (a)0·615
- (b)0·625
- (c)0·635
- (d)0·645
उत्तर(b) 0·625 — 0·5 + 0 + 0·125 = 0·625 ; अथवा 101₂ = 5 और बिंदु के बाद तीन अंक, अतः 5 ÷ 8 = 0·625 ।
- practice — not a real PYQ
दशमलव संख्या 0·375 का द्विआधारी रूप क्या है ?
- (a)0·011
- (b)0·101
- (c)0·110
- (d)0·111
उत्तर(a) 0·011 — 0·375 = 0·25 + 0·125 ; शेष तीनों का मान क्रमशः 0·625, 0·75 और 0·875 होता है ।