निम्नलिखित में से किस एक का, 1773 के रेगुलेटिंग ऐक्ट में उपबंध नहीं किया गया था ?
- (a)इसने युद्ध और शान्ति से संबंधित मामलों में बंगाल प्रेसिडेंसी को बॉम्बे प्रेसिडेंसी और मद्रास प्रेसिडेंसी से सर्वोपरि बनाया ।
- (b)गवर्नर-जनरल और उनके काउन्सिलरों की पदावधि पाँच वर्ष नियत की गई ।
- (c)कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ जस्टिस स्थापित किया गया ।
- (d)गवर्नर-जनरल-इन-काउन्सिल को बॉम्बे प्रेसिडेंसी और मद्रास प्रेसिडेंसी के उत्तराधिकारियों को नियुक्त करने के लिए प्राधिकृत किया गया ।
सही उत्तर — D, (d) ‘गवर्नर-जनरल-इन-काउन्सिल को बॉम्बे प्रेसिडेंसी और मद्रास प्रेसिडेंसी के उत्तराधिकारियों को नियुक्त करने के लिए प्राधिकृत किया गया’ । ध्यान दीजिए कि प्रश्न में 'नहीं' मोटे तिरछे अक्षरों में छपा है : पूछा यह गया है कि कौन-सा उपबंध रेगुलेटिंग ऐक्ट, 1773 में था ही नहीं । 1773 का रेगुलेटिंग ऐक्ट ब्रिटिश संसद का पहला ऐसा अधिनियम था जिसने ईस्ट इंडिया कंपनी के भारतीय शासन को विनियमित करने का प्रयास किया । इसने बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' (फोर्ट विलियम में) बना दिया, उसकी सहायता के लिए चार सदस्यों की एक कार्यकारी परिषद बनाई, और युद्ध तथा शान्ति के मामलों में बॉम्बे व मद्रास प्रेसिडेंसियों को बंगाल के अधीन (सर्वोपरिता में नीचे) कर दिया — यही विकल्प (a) है, और यह ऐक्ट में था । वॉरेन हेस्टिंग्स पहले गवर्नर-जनरल बने । किन्तु 'अधीनता' का अर्थ 'नियुक्ति की शक्ति' नहीं होता । बॉम्बे और मद्रास के गवर्नरों की नियुक्ति लंदन में बैठे कंपनी के कोर्ट ऑफ़ डायरेक्टर्स के पास ही बनी रही ; गवर्नर-जनरल-इन-काउन्सिल को उन प्रेसिडेंसियों में पद-उत्तराधिकारी नियुक्त करने का प्राधिकार 1773 के ऐक्ट ने नहीं दिया । अतः विकल्प (d) वह कथन है जिसका उपबंध नहीं किया गया था, और वही उत्तर है । इस भ्रम की जड़ यह है कि 1773 का ऐक्ट पर्यवेक्षण (superintendence) देता है, नियुक्ति नहीं — और नियुक्ति-संबंधी केंद्रीकरण बहुत बाद में, 1833 के चार्टर ऐक्ट की दिशा में, आता है ।
- (a)इसने युद्ध और शान्ति से संबंधित मामलों में बंगाल प्रेसिडेंसी को बॉम्बे प्रेसिडेंसी और मद्रास प्रेसिडेंसी से सर्वोपरि बनाया । — यह कथन सही है, इसलिए 'नहीं' वाले प्रश्न का उत्तर नहीं बन सकता । रेगुलेटिंग ऐक्ट ने बॉम्बे और मद्रास प्रेसिडेंसियों को युद्ध, शान्ति तथा देशी रियासतों से संधि जैसे विषयों में बंगाल के गवर्नर-जनरल-इन-काउन्सिल के अधीन कर दिया — व्यवहार में यह अधीनता कमज़ोर रही (मद्रास व बॉम्बे प्रायः स्वतंत्र रूप से युद्ध छेड़ते रहे) और इसी कमज़ोरी को 1784 के पिट्स इंडिया ऐक्ट तथा 1833 के चार्टर ऐक्ट ने क्रमशः कसा ।
- (b)गवर्नर-जनरल और उनके काउन्सिलरों की पदावधि पाँच वर्ष नियत की गई । — यह भी सही कथन है । ऐक्ट ने गवर्नर-जनरल और उनकी परिषद के चारों सदस्यों की पदावधि पाँच वर्ष नियत की, और यह भी उपबंध किया कि कोर्ट ऑफ़ डायरेक्टर्स के अभ्यावेदन पर ब्रिटिश सम्राट उन्हें पदावधि से पहले हटा सकता है । अधिनियम में नामतः वॉरेन हेस्टिंग्स तथा चार काउन्सिलर (क्लैवरिंग, मॉन्सन, बारवेल, फ्रांसिस) निर्दिष्ट किए गए थे । चूँकि यह ऐक्ट में उपबंधित था, यह इस प्रश्न का उत्तर नहीं है ।
- (c)कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ जस्टिस स्थापित किया गया । — यह भी ऐक्ट में था । रेगुलेटिंग ऐक्ट ने कलकत्ता में एक सुप्रीम कोर्ट की स्थापना का उपबंध किया, जो 1774 में एक मुख्य न्यायाधीश (सर एलिजा इम्पे) और तीन अन्य न्यायाधीशों के साथ अस्तित्व में आया । इसी न्यायालय ने महाराजा नंदकुमार का प्रसिद्ध मुक़दमा चलाया, और परिषद तथा न्यायालय के बीच अधिकार-क्षेत्र का टकराव ही आगे चलकर 1781 के संशोधक अधिनियम (ऐक्ट ऑफ़ सेटलमेंट) का कारण बना ।
रेगुलेटिंग ऐक्ट, 1773 भारत में ब्रिटिश संवैधानिक विकास का आरंभ-बिंदु है । 1765 में बंगाल की दीवानी मिलने के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी एक व्यापारिक कंपनी से शासक बन चुकी थी, किन्तु उस पर संसद का कोई नियंत्रण नहीं था । 1770 के बंगाल के अकाल, कंपनी कर्मचारियों के निजी व्यापार व भेंट-उपहार से हुई अकूत कमाई और स्वयं कंपनी के दिवालियेपन के संकट ने ब्रिटिश संसद को हस्तक्षेप के लिए विवश किया । ऐक्ट की चार धुरी याद रखिए : (1) बंगाल के गवर्नर को गवर्नर-जनरल बनाना और चार सदस्यीय परिषद देना, (2) बॉम्बे व मद्रास को युद्ध-शान्ति के मामलों में बंगाल के अधीन करना, (3) कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट, और (4) कंपनी कर्मचारियों के निजी व्यापार तथा भेंट लेने पर रोक तथा कोर्ट ऑफ़ डायरेक्टर्स द्वारा ब्रिटिश सरकार को राजस्व, सिविल व सैन्य मामलों की रिपोर्ट देना ।
इस प्रश्न का असली कौशल 'अधीनता' और 'नियुक्ति' के बीच का अंतर पकड़ना है । परीक्षक चारों विकल्पों में तीन पाठ्यपुस्तक-मानक उपबंध रखता है और चौथे में एक ऐसी शक्ति जोड़ देता है जो सुनने में स्वाभाविक लगती है — यदि बंगाल 'सर्वोपरि' है तो क्या वह दूसरी प्रेसिडेंसियों में नियुक्तियाँ भी नहीं करेगा ? — पर जो ऐक्ट में नहीं है । कंपनी के भीतर नियुक्ति की शक्ति लंदन के कोर्ट ऑफ़ डायरेक्टर्स के पास थी, और 1784 के पिट्स इंडिया ऐक्ट ने बोर्ड ऑफ़ कंट्रोल बनाकर राजनीतिक नियंत्रण ब्रिटिश सरकार को सौंपा, जबकि व्यापार व संरक्षण (patronage) डायरेक्टरों के पास ही रहा । 1833 का चार्टर ऐक्ट अंततः 'भारत का गवर्नर-जनरल' पद बनाकर बॉम्बे व मद्रास से विधायी शक्तियाँ छीनता है । नकारात्मक प्रश्नों में सदैव पहले तीन 'ज्ञात-सही' कथन छाँटिए, बचा हुआ ही उत्तर है ।
- रेगुलेटिंग ऐक्ट, 1773 ने बंगाल के गवर्नर को 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' बनाया और उसकी सहायता के लिए चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद बनाई ; वॉरेन हेस्टिंग्स पहले गवर्नर-जनरल हुए ।
- बॉम्बे और मद्रास प्रेसिडेंसियाँ युद्ध व शान्ति के मामलों में बंगाल के अधीन कर दी गईं — किन्तु उनके गवर्नरों की नियुक्ति की शक्ति कोर्ट ऑफ़ डायरेक्टर्स के पास ही रही ।
- गवर्नर-जनरल तथा उनके काउन्सिलरों की पदावधि पाँच वर्ष रखी गई ; कोर्ट ऑफ़ डायरेक्टर्स के अभ्यावेदन पर सम्राट उन्हें हटा सकता था ।
- कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट का उपबंध किया गया, जो 1774 में एक मुख्य न्यायाधीश (सर एलिजा इम्पे) तथा तीन अन्य न्यायाधीशों के साथ स्थापित हुआ ।
- ऐक्ट ने कंपनी कर्मचारियों के निजी व्यापार तथा भेंट-रिश्वत लेने पर रोक लगाई और कोर्ट ऑफ़ डायरेक्टर्स को ब्रिटिश सरकार के समक्ष राजस्व, सिविल व सैन्य मामलों की रिपोर्ट देने को बाध्य किया ।
- 'सर्वोपरिता / अधीनता' को 'नियुक्ति की शक्ति' मान लेना — 1773 का ऐक्ट बंगाल को युद्ध-शान्ति में ऊपर रखता है, पर उसे बॉम्बे-मद्रास में नियुक्तियाँ करने का प्राधिकार नहीं देता ।
- 'भारत का गवर्नर-जनरल' और 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' को एक मान लेना — 1773 में पद 'बंगाल का गवर्नर-जनरल' था ; 'भारत का गवर्नर-जनरल' 1833 के चार्टर ऐक्ट से बना ।
- सुप्रीम कोर्ट के लिए 1773 और 1774 के बीच चयन — उपबंध 1773 के ऐक्ट में है, स्थापना 1774 में हुई ।
EPFO, UPSC और राज्य आयोग इस ऐक्ट को लगभग सदैव 'कौन-सा उपबंध इसमें नहीं था' या 'निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सुमेलित नहीं है' के रूप में पूछते हैं, क्योंकि 1773-1784-1833 की शक्तियाँ आपस में गड्डमड्ड करना आसान है । तैयारी का सबसे कारगर तरीक़ा यह है कि प्रत्येक अधिनियम के लिए तीन-चार 'हस्ताक्षर उपबंध' कंठस्थ कर लिए जाएँ और यह भी याद रखा जाए कि कौन-सी शक्ति किस अधिनियम में पहली बार आई ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
1773 के रेगुलेटिंग ऐक्ट के अधीन कलकत्ता में स्थापित सुप्रीम कोर्ट के प्रथम मुख्य न्यायाधीश कौन थे ?
- (a)सर एलिजा इम्पे
- (b)सर विलियम जोन्स
- (c)सर जॉन शोर
- (d)सर बैरी क्लोज़
उत्तर(a) सर एलिजा इम्पे — 1774 में स्थापित कलकत्ता सुप्रीम कोर्ट के प्रथम मुख्य न्यायाधीश ; उनके साथ तीन अन्य न्यायाधीश थे ।
- practice — not a real PYQ
'भारत का गवर्नर-जनरल' पद पहली बार किस अधिनियम द्वारा सृजित किया गया ?
- (a)रेगुलेटिंग ऐक्ट, 1773
- (b)पिट्स इंडिया ऐक्ट, 1784
- (c)चार्टर ऐक्ट, 1833
- (d)भारत शासन अधिनियम, 1858
उत्तर(c) चार्टर ऐक्ट, 1833 — इसने 'बंगाल के गवर्नर-जनरल' को 'भारत का गवर्नर-जनरल' बनाया ; 1773 का ऐक्ट केवल बंगाल का गवर्नर-जनरल पद बनाता है ।