'परिमाणित घरेलू न्यूनतम उपरि कर (क्वांटिफाइड डोमेस्टिक मिनिमम टॉप-अप टैक्स)' की आमतौर पर किसके सन्दर्भ में बात होती है ?
- (a)वैश्विक प्रति-आधार क्षरण नियम (ग्लोबल एंटी-बेस इरोजन रूल्स)
- (b)धन-शोधन (मनी लॉन्डरिंग) की रोकथाम
- (c)क्रिप्टो-मुद्रा का विनियमन
- (d)आभासी अंकीय परिसंपत्ति लेनदेन (वर्चुअल डिजिटल ऐसेट ट्रांज़ैक्शंस)
सही उत्तर — A, (a) वैश्विक प्रति-आधार क्षरण नियम (ग्लोबल एंटी-बेस इरोजन रूल्स) — यह पद आर्थिक सहयोग और विकास संगठन तथा जी-20 के उस दो-स्तंभीय समाधान से आता है जिस पर समावेशी ढाँचे के सदस्य देश अक्टूबर 2021 में सहमत हुए थे । उसका पहला स्तंभ कर लगाने के कुछ अधिकार उन देशों को लौटाता है जहाँ उपभोक्ता और बाज़ार हैं, और दूसरा स्तंभ एक न्यूनतम कर की मंज़िल बनाता है — बड़े बहुराष्ट्रीय उद्यम समूहों पर, जिनका वार्षिक समेकित राजस्व 75 करोड़ यूरो से अधिक हो, 15 प्रतिशत की न्यूनतम प्रभावी कर दर । इसी दूसरे स्तंभ के नियमों को वैश्विक प्रति-आधार क्षरण नियम कहा जाता है । उन्हें लागू करने के तीन तंत्र हैं । आय समावेशन नियम के अधीन मूल कंपनी वाला देश विदेश में कम कर चुकाए गए लाभ पर अंतर की वसूली करता है ; अल्प-कराधित लाभ नियम पिछली सुरक्षा-पंक्ति है ; और तीसरा तंत्र यही घरेलू न्यूनतम उपरि कर है, जिससे वह देश स्वयं अपने भीतर उत्पन्न कम-कराधित लाभ पर अंतर वसूल लेता है और इस वसूली को दूसरों पर वरीयता मिलती है । यह उपरि कर उस राशि में समायोजित हो जाता है जो अन्यथा कहीं और चुकानी पड़ती, इसलिए इससे कुल कर बढ़ता नहीं, केवल राजस्व का बँटवारा बदल जाता है । एक बात ध्यान देने योग्य है : संगठन का अपना पद 'अर्हक' (Qualified) है, जबकि पुस्तिका दोनों स्तंभों में 'परिमाणित' अर्थात Quantified छापती है ; अर्थ का केन्द्र वही रहता है और उत्तर नहीं बदलता ।
- (b)धन-शोधन (मनी लॉन्डरिंग) की रोकथाम — धन-शोधन की रोकथाम एक बिलकुल अलग विषय है । उसका ढाँचा भारत में धन-शोधन निवारण अधिनियम 2002 से बनता है, जिसके अधीन प्रवर्तन निदेशालय जाँच करता है और वित्तीय आसूचना इकाई संदिग्ध लेनदेन की सूचनाएँ एकत्र करती है ; अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय कार्रवाई कार्य बल इसके मानक तय करता है । यह अपराध से अर्जित धन को वैध दिखाने की रोकथाम का क्षेत्र है, जबकि उपरि कर लाभ पर लगने वाले कर की न्यूनतम दर सुनिश्चित करने का । दोनों में कर-आश्रयों का नाम आता है, और संभवतः इसी समानता के कारण यह विकल्प रखा गया है — पर एक अपराध-विधि का विषय है और दूसरा अंतर्राष्ट्रीय कर-नीति का ।
- (c)क्रिप्टो-मुद्रा का विनियमन — क्रिप्टो-मुद्रा के विनियमन की बहस अलग चलती है और उसके प्रश्न भी अलग हैं — मुद्रा के रूप में मान्यता, विनिमय मंचों का पंजीकरण, उपभोक्ता संरक्षण और केन्द्रीय बैंक की अपनी अंकीय मुद्रा । उपरि कर का इनमें से किसी से संबंध नहीं है ; वह बहुराष्ट्रीय समूहों के लाभ पर लगने वाले कर की न्यूनतम मंज़िल से जुड़ा है, चाहे वह समूह किसी भी उद्योग का हो । यह विकल्प इसलिए आकर्षक लगता है कि दोनों विषय एक ही कालखंड की वैश्विक वित्तीय चर्चा में साथ-साथ उठे । नाम में आए 'कर' शब्द से विषय तय करना यहाँ भारी पड़ता है ।
- (d)आभासी अंकीय परिसंपत्ति लेनदेन (वर्चुअल डिजिटल ऐसेट ट्रांज़ैक्शंस) — यह विकल्प सबसे कपटी है, क्योंकि आभासी अंकीय परिसंपत्ति भारत के कर-क़ानून का वास्तविक पद है : आयकर अधिनियम में वित्त अधिनियम 2022 के द्वारा जोड़ी गई धारा 115BBH ऐसी परिसंपत्तियों के अंतरण से हुई आय पर तीस प्रतिशत कर लगाती है और धारा 194S उस पर एक प्रतिशत की दर से स्रोत पर कर कटौती की व्यवस्था करती है । पर यह भारत के घरेलू आयकर का विषय है, वैश्विक न्यूनतम कर के ढाँचे का नहीं । उपरि कर का संबंध बहुराष्ट्रीय समूहों की प्रभावी कर दर से है, किसी विशेष परिसंपत्ति-वर्ग से नहीं । दो सही पदों को एक ही ढाँचे का मान लेना यहाँ की असली भूल है ।
आधार क्षरण और लाभ स्थानांतरण की समस्या यह है कि बहुराष्ट्रीय समूह अपना लाभ उन अधिकारक्षेत्रों में दिखा देते हैं जहाँ कर बहुत कम या शून्य है, जबकि उनका वास्तविक कारोबार कहीं और होता है । इसके उत्तर में आर्थिक सहयोग और विकास संगठन तथा जी-20 के समावेशी ढाँचे ने अक्टूबर 2021 में दो-स्तंभीय समाधान पर सहमति बनाई । स्तंभ एक सबसे बड़े और सबसे लाभप्रद समूहों के लाभ के एक हिस्से पर कर लगाने का अधिकार उन देशों को देता है जहाँ उनके उपभोक्ता हैं, चाहे वहाँ उनकी भौतिक उपस्थिति हो या न हो । स्तंभ दो एक न्यूनतम मंज़िल बनाता है — 75 करोड़ यूरो से अधिक वार्षिक समेकित राजस्व वाले समूहों पर 15 प्रतिशत की न्यूनतम प्रभावी कर दर — और इसी के नियमों को वैश्विक प्रति-आधार क्षरण नियम कहा जाता है । यदि किसी अधिकारक्षेत्र में समूह की प्रभावी दर 15 प्रतिशत से कम निकले तो अंतर की राशि 'उपरि कर' के रूप में वसूली जाती है ; प्रश्न में आया पद उसी वसूली को स्रोत-देश के हाथ में रखने वाला तंत्र है ।
यह प्रश्न भाग B के अंतिम खंड का है और उस श्रेणी का है जिसे 'समाचारों में आया पद पहचानिए' कहा जा सकता है । ऐसे प्रश्नों में उत्तर तक पहुँचने का रास्ता प्रायः पद के भीतर ही होता है : यहाँ 'न्यूनतम' और 'उपरि कर' दोनों शब्द वैश्विक न्यूनतम कर की ओर संकेत करते हैं, और शेष तीन विकल्प — धन-शोधन, क्रिप्टो-मुद्रा और आभासी अंकीय परिसंपत्ति — वित्तीय समाचारों के दूसरे कोनों से उठाए गए हैं । भारत आर्थिक सहयोग और विकास संगठन तथा जी-20 के समावेशी ढाँचे का सदस्य है और उसने अक्टूबर 2021 के इस समाधान का समर्थन किया था, इसलिए यह विषय भारतीय कर-प्रशासन के लिए भी सीधा प्रासंगिक है । शब्दावली की दो बातें ध्यान देने योग्य हैं । पहली, संगठन का अपना पद 'Qualified' है, जिसका अर्थ है नियमों की कसौटी पर खरा उतरने वाला ; पुस्तिका ने अंग्रेज़ी स्तंभ में 'Quantified' और हिन्दी में उसी का अनुवाद 'परिमाणित' छापा है । दूसरी, हिन्दी 'top-up tax' के लिए 'उपरि कर' रखती है और साथ ही कोष्ठक में पूरा अंग्रेज़ी पद भी देती है, जिससे पहचान आसान हो जाती है ।
- अक्टूबर 2021 का दो-स्तंभीय समाधान : स्तंभ एक कर लगाने के कुछ अधिकार बाज़ार-अधिकारक्षेत्रों को पुनरावंटित करता है ; स्तंभ दो न्यूनतम प्रभावी कर की मंज़िल बनाता है ।
- स्तंभ दो के नियमों को वैश्विक प्रति-आधार क्षरण नियम कहा जाता है और वे 75 करोड़ यूरो से अधिक वार्षिक समेकित राजस्व वाले बहुराष्ट्रीय उद्यम समूहों पर 15 प्रतिशत की न्यूनतम प्रभावी कर दर लागू करते हैं ।
- वसूली के तीन तंत्र — आय समावेशन नियम, जिसमें मूल कंपनी वाला देश अंतर वसूलता है ; अल्प-कराधित लाभ नियम, जो पिछली सुरक्षा-पंक्ति है ; और घरेलू न्यूनतम उपरि कर, जिसे अन्य दोनों पर वरीयता मिलती है ।
- घरेलू न्यूनतम उपरि कर से स्रोत-देश स्वयं अपने भीतर उत्पन्न कम-कराधित लाभ पर अंतर वसूल लेता है ; वह उस राशि में समायोजित हो जाता है जो अन्यथा कहीं और चुकानी पड़ती, इसलिए कुल कर नहीं बढ़ता, राजस्व का बँटवारा बदलता है ।
- 'अर्हक' (Qualified) का अर्थ है कि वह घरेलू कर दायरे, आय की गणना और सम्मिलित करों की दृष्टि से आदर्श नियमों के अनुरूप हो ; पुस्तिका इसे 'परिमाणित' (Quantified) छापती है ।
- विकल्प (d) का पद भी वास्तविक है, पर दूसरे क़ानून का : आयकर अधिनियम की धारा 115BBH आभासी अंकीय परिसंपत्तियों के अंतरण से हुई आय पर तीस प्रतिशत कर लगाती है और धारा 194S एक प्रतिशत की स्रोत-कटौती की व्यवस्था करती है ।
- पद में आए 'कर' शब्द से विषय तय कर देना । चारों विकल्प वित्तीय समाचारों से हैं, पर केवल एक अंतर्राष्ट्रीय न्यूनतम कर के ढाँचे से आता है ।
- आभासी अंकीय परिसंपत्ति के पद को इसी ढाँचे का मान लेना । वह भारत के घरेलू आयकर का पद है, वैश्विक न्यूनतम कर का नहीं ।
- उपरि कर को अतिरिक्त कर-भार समझ लेना । वह उस राशि में समायोजित हो जाता है जो अन्यथा कहीं और चुकानी पड़ती, इसलिए वह राजस्व का पुनर्वितरण है ।
- 'अर्हक' और 'परिमाणित' के भेद पर उलझ जाना । पुस्तिका ने अनुवाद में जो पद चुना है वह मानक नहीं है, पर उससे प्रश्न का उत्तर नहीं बदलता ।
अंतर्राष्ट्रीय कराधान पर प्रश्न प्रायः तीन रूपों में आते हैं । पहला — 'यह पद किस सन्दर्भ में आता है' वाला रूप, जैसा यहाँ है, जिसमें चार अलग-अलग नीति-क्षेत्र विकल्पों में रख दिए जाते हैं । दूसरा — संख्या वाला रूप, जिसमें न्यूनतम कर दर अथवा राजस्व की सीमा पूछी जाती है ; इसमें 15 प्रतिशत और 75 करोड़ यूरो — दोनों अंक याद रखने पड़ते हैं । तीसरा — संस्थागत रूप, जिसमें यह पूछा जाता है कि यह पहल किस संगठन की है और कब सहमति बनी । तैयारी की सुरक्षित विधि यह है कि दोनों स्तंभों को एक-एक पंक्ति में अलग-अलग याद रखा जाए — स्तंभ एक अधिकारों का पुनरावंटन, स्तंभ दो न्यूनतम दर — और उसके बाद स्तंभ दो के तीनों वसूली-तंत्रों के नाम । प्रश्न पढ़ते समय पद के भीतर के शब्दों को सुराग़ की तरह पढ़िए : 'न्यूनतम' और 'उपरि कर' दोनों एक ही दिशा में इशारा करते हैं ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
वैश्विक न्यूनतम कर के अंतर्गत बड़े बहुराष्ट्रीय उद्यम समूहों पर लागू न्यूनतम प्रभावी कर दर कितनी है ?
- (a)10 प्रतिशत
- (b)12·5 प्रतिशत
- (c)15 प्रतिशत
- (d)20 प्रतिशत
उत्तर(c) 15 प्रतिशत — यह दर वैश्विक प्रति-आधार क्षरण नियमों के अधीन उन समूहों पर लागू होती है जिनका वार्षिक समेकित राजस्व 75 करोड़ यूरो से अधिक है ।
- practice — not a real PYQ
आर्थिक सहयोग और विकास संगठन तथा जी-20 के दो-स्तंभीय समाधान में स्तंभ एक का मुख्य विषय क्या है ?
- (a)कर लगाने के कुछ अधिकारों का बाज़ार-अधिकारक्षेत्रों को पुनरावंटन
- (b)न्यूनतम प्रभावी कर दर की मंज़िल तय करना
- (c)धन-शोधन की रोकथाम के मानक बनाना
- (d)क्रिप्टो-परिसंपत्तियों के विनियमन का ढाँचा बनाना
उत्तर(a) कर लगाने के कुछ अधिकारों का बाज़ार-अधिकारक्षेत्रों को पुनरावंटन — न्यूनतम कर दर की मंज़िल स्तंभ दो का विषय है, और वहीं से वैश्विक प्रति-आधार क्षरण नियम आते हैं ।