राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही नहीं है/हैं ? 1. यह कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय द्वारा स्थापित ग़ैर-लाभकारी पब्लिक लिमिटेड कंपनी है । 2. यह केवल बड़े, गुणवत्ता वाले और ग़ैर-लाभकारी व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों के सृजन को उत्प्रेरित कर कौशल विकास का संवर्धन करता है । नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
- (a)केवल 1
- (b)केवल 2
- (c)1 और 2 दोनों
- (d)न तो 1, न ही 2
सही उत्तर — B, (b) केवल 2 — सबसे पहले प्रश्न की माँग पर ध्यान दीजिए, क्योंकि आपके इस पूरे खंड में यही एकमात्र प्रश्न है जो उलटा पूछता है : कौन-सा कथन सही 'नहीं' है । पुस्तिका ने यह 'नहीं' मोटे तिरछे अक्षरों में छापा है, और यह इस प्रश्नपत्र की भली आदत है — जहाँ भी निषेध है, वहाँ दोनों स्तंभों में उसे उभारकर छापा गया है । सुरक्षित विधि यह है कि पहले सीधे ढंग से तय कीजिए कि कौन-सा कथन सही है, फिर उत्तर उलट दीजिए । कथन 1 राष्ट्रीय कौशल विकास निगम की विधिक बनावट बताता है — यह ग़ैर-लाभकारी पब्लिक लिमिटेड कंपनी है और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के अधीन काम करती है ; कुंजी इसे सही मानती है । कथन 2 उसका उद्देश्य बताता है, और यहीं दो शब्द बदल दिए गए हैं । निगम का घोषित उद्देश्य बड़े, गुणवत्तापूर्ण और लाभकारी व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों के सृजन को उत्प्रेरित करना है, जबकि कथन में 'लाभकारी' को उलटकर 'ग़ैर-लाभकारी' कर दिया गया है और साथ ही 'केवल' शब्द जोड़ दिया गया है, जो उद्देश्य को अनुचित रूप से संकुचित कर देता है । यही इस निगम का सबसे रोचक विरोधाभास भी है — संस्था स्वयं लाभ के लिए नहीं चलती, पर उसका काम निजी पूँजी को प्रशिक्षण के व्यवसाय में लाना है । इसलिए सही नहीं होने वाला कथन केवल 2 है और उत्तर विकल्प (b) है ।
- (a)केवल 1 — यह विकल्प कहता है कि केवल कथन 1 सही नहीं है, अर्थात कथन 2 सही है । पर कथन 2 में दो स्पष्ट दोष हैं । पहला, 'ग़ैर-लाभकारी' शब्द उद्देश्य को उलट देता है : निगम का काम लाभकारी व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों के सृजन को उत्प्रेरित करना है, क्योंकि विचार यही था कि प्रशिक्षण में निजी पूँजी और उद्यमशीलता आए । दूसरा, 'केवल' शब्द उसे एक ही प्रकार के संस्थानों तक सीमित कर देता है, जबकि निगम वित्तपोषण के साथ-साथ गुणवत्ता आश्वासन और क्षेत्र कौशल परिषदों जैसी सहायक व्यवस्थाएँ भी खड़ी करता है । इसलिए कथन 2 को सही मानना संभव नहीं ।
- (c)1 और 2 दोनों — आयोग की कुंजी यह विकल्प नहीं लेती, यद्यपि कथन 1 पर एक वास्तविक ऐतिहासिक बारीकी मौजूद है और उसे जान लेना उपयोगी है । निगम 31 जुलाई 2008 को कंपनी अधिनियम 1956 की धारा 25 — जो अब 2013 अधिनियम की धारा 8 है — के अधीन पंजीकृत हुआ था, और उसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी के रूप में वित्त मंत्रालय ने खड़ा किया था ; कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय तो नवंबर 2014 में बना । आज उसी मंत्रालय के माध्यम से सरकार निगम की 49 प्रतिशत अंश-पूँजी रखती है और वही उसका प्रशासनिक मंत्रालय है । कुंजी कथन 1 को निगम के वर्तमान स्वरूप और मंत्रालय के वर्णन के रूप में पढ़कर सही मानती है, इसलिए दोनों कथनों को ग़लत ठहराना कुंजी के विरुद्ध जाता है ।
- (d)न तो 1, न ही 2 — यह विकल्प कहता है कि दोनों में से कोई भी कथन ग़लत नहीं है, अर्थात दोनों सही हैं । यह टिक नहीं सकता, क्योंकि कथन 2 का 'ग़ैर-लाभकारी व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थान' वाला अंश निगम के घोषित उद्देश्य के ठीक उलट है । ध्यान दीजिए कि निषेधात्मक प्रश्न में यह विकल्प सबसे कपटी होता है : सीधे प्रश्न में 'न तो 1, न ही 2' का अर्थ होता है 'दोनों ग़लत', पर यहाँ प्रश्न स्वयं उलटा है, इसलिए उसका अर्थ हो जाता है 'दोनों सही' । इसी उलटफेर में अभ्यर्थी सबसे अधिक चूकते हैं, और इसीलिए उत्तर चुनने से पहले प्रश्न की अंतिम पंक्ति दोबारा पढ़ लेना चाहिए ।
राष्ट्रीय कौशल विकास निगम भारत में कौशल विकास के ढाँचे की सबसे असामान्य संस्था है, क्योंकि उसकी बनावट और उसका उद्देश्य एक-दूसरे के उलट दिखते हैं । बनावट की दृष्टि से वह ग़ैर-लाभकारी पब्लिक लिमिटेड कंपनी है, जो कंपनी अधिनियम 1956 की धारा 25 — आज की धारा 8 — के अधीन 31 जुलाई 2008 को पंजीकृत हुई । स्वामित्व सार्वजनिक-निजी भागीदारी का है : सरकार 49 प्रतिशत अंश-पूँजी रखती है और निजी क्षेत्र 51 प्रतिशत, जो भारत में अपने ढंग की अनोखी व्यवस्था है । उद्देश्य की दृष्टि से उसका काम बड़े, गुणवत्तापूर्ण और लाभकारी व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों के सृजन को उत्प्रेरित करना है — अर्थात स्वयं प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि प्रशिक्षण देने वालों को वित्त और सहारा देकर खड़ा करना । इसी के साथ वह गुणवत्ता आश्वासन, सूचना प्रणालियाँ और क्षेत्र कौशल परिषदों जैसी सहायक व्यवस्थाएँ भी विकसित करता है, और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना जैसी प्रमुख योजनाओं के क्रियान्वयन में मंत्रालय की सहायक संस्था है ।
यह प्रश्न भाग B के शासन और अर्थव्यवस्था वाले खंड का है, और आपके इस बैच में यही एकमात्र निषेधात्मक प्रश्न है । पूरे प्रश्नपत्र में ऐसे सत्रह प्रश्न हैं, और पुस्तिका हर बार निषेध को मोटे तिरछे अक्षरों में छापती है — दोनों स्तंभों में — जो अभ्यर्थी के लिए बड़ी राहत है, क्योंकि निषेध छूट जाने से उत्तर ठीक उलट हो जाता है । रचना की दृष्टि से यह प्रश्न कथन बदलने की उस मानक तकनीक का उदाहरण है, जिसमें किसी संस्था के आधिकारिक विवरण की एक पंक्ति उठाकर उसमें एक शब्द उलट दिया जाता है और एक शब्द जोड़ दिया जाता है । यहाँ 'लाभकारी' को 'ग़ैर-लाभकारी' कर दिया गया और 'केवल' जोड़ दिया गया । ऐसे प्रश्नों में सबसे उपयोगी आदत यह है कि कथन को उसकी मूल पंक्ति से मिलाकर पढ़ा जाए और यह देखा जाए कि कौन-सा शब्द अतिरिक्त है । हिन्दी और अंग्रेज़ी दोनों स्तंभ यहाँ एक ही कथन देते हैं ।
- राष्ट्रीय कौशल विकास निगम ग़ैर-लाभकारी पब्लिक लिमिटेड कंपनी है, जो 31 जुलाई 2008 को कंपनी अधिनियम 1956 की धारा 25 — आज की धारा 8 — के अधीन पंजीकृत हुई थी ।
- स्वामित्व सार्वजनिक-निजी भागीदारी का है : भारत सरकार कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के माध्यम से 49 प्रतिशत अंश-पूँजी रखती है और निजी क्षेत्र के पास 51 प्रतिशत है ।
- घोषित उद्देश्य — बड़े, गुणवत्तापूर्ण और लाभकारी व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों के सृजन को उत्प्रेरित करके कौशल विकास का संवर्धन करना । कथन 2 इसी 'लाभकारी' को उलट देता है ।
- ऐतिहासिक क्रम : निगम 2008 में बना और उसे वित्त मंत्रालय ने खड़ा किया था ; कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय नवंबर 2014 में बना और आज वही उसका प्रशासनिक मंत्रालय है ।
- निगम स्वयं प्रशिक्षण नहीं देता ; वह वित्तपोषण, गुणवत्ता आश्वासन, सूचना प्रणालियों और क्षेत्र कौशल परिषदों के माध्यम से प्रशिक्षण देने वालों की क्षमता खड़ी करता है ।
- इस प्रश्नपत्र में सत्रह निषेधात्मक प्रश्न हैं और हर बार निषेध का शब्द मोटे तिरछे अक्षरों में छापा गया है — हिन्दी और अंग्रेज़ी, दोनों स्तंभों में ।
- प्रश्न का निषेध छूट जाना । यहाँ पूछा गया है कि कौन-सा कथन सही नहीं है, इसलिए पहले सही कथन पहचानिए और फिर उत्तर उलट दीजिए ।
- 'न तो 1, न ही 2' को यंत्रवत 'दोनों ग़लत' पढ़ लेना । निषेधात्मक प्रश्न में उसका अर्थ उलट जाता है और वह 'दोनों सही' कहने लगता है ।
- संस्था के अपने स्वरूप और उसके उद्देश्य को एक मान लेना । निगम स्वयं ग़ैर-लाभकारी है, पर वह लाभकारी प्रशिक्षण संस्थानों के सृजन को उत्प्रेरित करता है ।
- 'केवल' जैसे परिसीमक शब्दों की उपेक्षा करना । ऐसे शब्द किसी सही वाक्य को भी ग़लत बना देते हैं, और परीक्षक उन्हें जान-बूझकर जोड़ता है ।
संस्थाओं पर प्रश्न प्रायः चार बिंदुओं पर टिकते हैं — विधिक स्वरूप, स्वामित्व या अंश-पूँजी का ढाँचा, प्रशासनिक मंत्रालय, और घोषित उद्देश्य । कथन-आधारित रूप में परीक्षक आधिकारिक विवरण की एक पंक्ति उठाकर उसमें एक शब्द बदल देता है, जैसे यहाँ 'लाभकारी' को 'ग़ैर-लाभकारी' कर दिया गया, अथवा 'केवल', 'सभी', 'सदा' जैसा कोई परिसीमक जोड़ देता है । दूसरा प्रचलित रूप निषेधात्मक होता है, जिसमें सही कथन नहीं, ग़लत कथन पूछा जाता है । तीसरा रूप सुमेलन का है, जिसमें संस्थाओं को उनके मंत्रालयों या अधिनियमों से जोड़ना पड़ता है । उत्तर देने की सुरक्षित विधि तीन चरणों की है : प्रश्न की अंतिम पंक्ति में निषेध खोजिए, हर कथन को स्वतंत्र रूप से सही या ग़लत ठहराइए, और उसके बाद ही कूट देखिए । कूट पहले देख लेने पर मन उसी की ओर खिंच जाता है ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
राष्ट्रीय कौशल विकास निगम में भारत सरकार की अंश-पूँजी का हिस्सा कितना है ?
- (a)26 प्रतिशत
- (b)49 प्रतिशत
- (c)51 प्रतिशत
- (d)74 प्रतिशत
उत्तर(b) 49 प्रतिशत — शेष 51 प्रतिशत निजी क्षेत्र के पास है, और यही अनुपात इसे सार्वजनिक-निजी भागीदारी बनाता है ; सरकार का हिस्सा कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के माध्यम से रखा जाता है ।
- practice — not a real PYQ
राष्ट्रीय कौशल विकास निगम की विधिक स्थिति निम्नलिखित में से क्या है ?
- (a)ग़ैर-लाभकारी पब्लिक लिमिटेड कंपनी
- (b)संसद के अधिनियम से बना सांविधिक निगम
- (c)शत-प्रतिशत सरकारी अंश-पूँजी वाली सरकारी कंपनी
- (d)बहु-राज्यीय सहकारी समिति
उत्तर(a) ग़ैर-लाभकारी पब्लिक लिमिटेड कंपनी — यह कंपनी अधिनियम 1956 की धारा 25, अर्थात आज की धारा 8, के अधीन पंजीकृत है ; सरकार के पास केवल 49 प्रतिशत अंश-पूँजी होने के कारण यह सरकारी कंपनी नहीं है ।