महासागरों के अम्लीभवन का मुख्य कारण क्या है?
- (a)कार्बन डाइऑक्साइड
- (b)कार्बन मोनोऑक्साइड
- (c)हाइड्रोजन सल्फाइड
- (d)क्लोरोफ्लुओरोकार्बन
सही उत्तर — A, (a) कार्बन डाइऑक्साइड — महासागरों का अम्लीभवन वायुमंडल की कार्बन डाइऑक्साइड के समुद्री जल में घुलने से होता है। रसायन सीधी है। मानवजनित उत्सर्जन से वायुमंडल में बढ़ी हुई कार्बन डाइऑक्साइड का एक बड़ा भाग महासागर सोख लेते हैं। घुलने पर वह जल से मिलकर कार्बोनिक अम्ल बनाती है, और वह अम्ल विघटित होकर हाइड्रोजन आयन तथा बाइकार्बोनेट आयन देता है। हाइड्रोजन आयनों की सांद्रता बढ़ने का अर्थ ही pH का घटना है, और यही महासागरीय अम्लीभवन है। मात्रा की दृष्टि से देखिए तो परिवर्तन छोटा दिखता है और है बड़ा : औद्योगिक युग के आरंभ से अब तक सतही महासागर का pH लगभग 0·1 इकाई घट चुका है। pH चूँकि लघुगणकीय मापक्रम है, इसलिए इतनी-सी गिरावट का अर्थ हाइड्रोजन आयनों की सांद्रता में लगभग तीस प्रतिशत की वृद्धि है। यहाँ शब्द को ठीक से समझ लेना आवश्यक है, क्योंकि परीक्षा इसी पर फिसलाती है : ‘अम्लीभवन’ का अर्थ यह नहीं कि महासागर अम्लीय हो गए हैं। समुद्री जल अब भी क्षारीय है, उसका pH आठ के आसपास है; अम्लीभवन परिवर्तन की दिशा बताता है, अंतिम अवस्था नहीं — जल क्षारीय पक्ष में रहते हुए भी उदासीन बिंदु की ओर खिसक रहा है। परिणाम भी उसी रसायन से निकलते हैं। हाइड्रोजन आयनों की वृद्धि कार्बोनेट आयनों से क्रिया करके उन्हें बाइकार्बोनेट में बदल देती है, अर्थात् जल में कार्बोनेट की उपलब्धता घट जाती है। कैल्सियम कार्बोनेट के कवच और कंकाल बनाने वाले जीव — प्रवाल, शंख-सीपियाँ, टेरोपोड, तथा कोकोलिथोफ़ोर जैसे सूक्ष्म शैवाल — इसी कार्बोनेट पर निर्भर हैं, इसलिए उनके लिए कवच बनाना कठिन होता जाता है और बने हुए कवच घुलने लगते हैं। प्रवाल भित्तियाँ इसी कारण दोहरे दबाव में हैं, क्योंकि उन्हें ऊष्मीय दबाव से होने वाला विरंजन भी झेलना पड़ता है। एक बात और, जो प्रश्न को दूसरी दिशा से भी हल कर देती है : विकल्पों में केवल एक ही गैस ऐसी है जो जल में घुलकर व्यापक पैमाने पर अम्ल बनाती है और जिसकी वायुमंडलीय मात्रा इतनी बड़ी है कि पूरे महासागर का रसायन बदल सके।
- (b)कार्बन मोनोऑक्साइड — कार्बन मोनोऑक्साइड जल में बहुत कम घुलनशील है और घुलकर कोई अम्ल नहीं बनाती, इसलिए वह महासागरों का pH बदलने वाली गैस नहीं है। उसका महत्त्व दूसरे कारणों से है : वह अपूर्ण दहन से बनने वाली विषैली गैस है, जो रक्त के हीमोग्लोबिन से कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में कहीं अधिक दृढ़ता से जुड़कर ऑक्सीजन के परिवहन को बाधित करती है, और इसी कारण बंद स्थानों में अंगीठी या जनरेटर जलाना घातक होता है। वायुमंडल में वह अल्पकालिक भी है और अन्य गैसों के साथ अभिक्रिया कर बदल जाती है। नाम में ‘कार्बन’ होने के कारण यह विकल्प आकर्षक लगता है, और आयोग ऐसे नाम-आधारित भ्रम बार-बार रखता है, इसलिए गैस को नाम से नहीं, उसकी जल-रसायन से पहचानिए।
- (c)हाइड्रोजन सल्फाइड — हाइड्रोजन सल्फाइड जल में घुलकर दुर्बल अम्ल अवश्य बनाती है, इसलिए यह विकल्प पूरी तरह निराधार नहीं लगता; किंतु उसका प्रभाव स्थानीय होता है, वैश्विक नहीं। वह मुख्यतः वहाँ मिलती है जहाँ ऑक्सीजन का अभाव है — गहरे समुद्र के तापीय जल-छिद्रों के आसपास, अवायवीय तलछटों में, अथवा काला सागर जैसे स्तरित बेसिनों की निचली परतों में — और वहीं वह जल-रसायन को प्रभावित करती है। पूरे महासागर के pH को खिसकाने के लिए जिस पैमाने की गैस चाहिए, हाइड्रोजन सल्फाइड उस पैमाने पर वायुमंडल में उपस्थित ही नहीं है। इसलिए प्रश्न के शब्द ‘मुख्य कारण’ पर ध्यान दीजिए : यह विकल्प एक स्थानीय कारक का नाम है, मुख्य कारण का नहीं।
- (d)क्लोरोफ्लुओरोकार्बन — क्लोरोफ्लुओरोकार्बन का संबंध एक बिल्कुल भिन्न पर्यावरणीय समस्या से है — समतापमंडलीय ओज़ोन परत का क्षरण, जिसके नियंत्रण के लिए 1987 का मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल किया गया और जिसके अंतर्गत इन पदार्थों का उत्पादन चरणबद्ध रूप से समाप्त किया गया। ये प्रबल हरितगृह गैसें भी हैं, पर वे जल में घुलकर अम्ल नहीं बनातीं और महासागरों का pH नहीं बदलतीं। परीक्षा की दृष्टि से इस विकल्प का काम यही देखना है कि अभ्यर्थी दो अलग-अलग समस्याओं — ओज़ोन क्षरण और अम्लीभवन — को अलग रख पाता है या नहीं। एक रोचक तथ्य यह भी है कि समुद्र-विज्ञान में इन्हीं यौगिकों को जल-राशियों की आयु जानने के लिए अनुरेखक के रूप में प्रयोग किया जाता है, अर्थात् महासागर से उनका संबंध है, पर अम्लीभवन का कारक बनकर नहीं।
महासागर वायुमंडल की कार्बन डाइऑक्साइड के सबसे बड़े अवशोषकों में हैं, और यही अवशोषण दो विपरीत परिणाम देता है। एक ओर वह वैश्विक तापन की गति धीमी करता है, क्योंकि उतनी गैस वायुमंडल में नहीं रहती; दूसरी ओर वह जल का रसायन बदल देता है। घुली हुई कार्बन डाइऑक्साइड जल से मिलकर कार्बोनिक अम्ल बनाती है, जो हाइड्रोजन आयन और बाइकार्बोनेट आयन में विघटित होता है; हाइड्रोजन आयनों की वृद्धि pH घटाती है और साथ ही कार्बोनेट आयनों से क्रिया कर उन्हें बाइकार्बोनेट में बदल देती है। इसका जैविक अर्थ यह है कि कैल्सियम कार्बोनेट की संतृप्ति अवस्था गिरती है और अरेगोनाइट तथा कैल्साइट के कवच बनाना कठिन होता जाता है। यहीं तीन शब्द अलग-अलग रखिए, क्योंकि प्रश्न इन्हीं को मिलाते हैं : वैश्विक तापन कार्बन डाइऑक्साइड और अन्य हरितगृह गैसों से जुड़ा है; ओज़ोन क्षरण क्लोरोफ्लुओरोकार्बन जैसे पदार्थों से; और अम्ल वर्षा मुख्यतः सल्फर तथा नाइट्रोजन के ऑक्साइडों से, जो वर्षा-जल को अम्लीय बनाते हैं। महासागरीय अम्लीभवन का मुख्य कारक इनमें से केवल पहला है।
इस विषय की परीक्षा-प्रासंगिकता दो कारणों से है। पहला, यह जलवायु परिवर्तन के उन परिणामों में है जो तापमान से सीधे नहीं जुड़े — इसीलिए इसे प्रायः ‘दूसरी कार्बन डाइऑक्साइड समस्या’ कहा जाता है — और प्रश्न यह परखते हैं कि अभ्यर्थी तापन और अम्लीभवन को अलग-अलग तंत्र के रूप में समझता है या नहीं। दूसरा, इसके आर्थिक और सामाजिक परिणाम हैं : प्रवाल भित्तियाँ मात्स्यिकी, तटीय सुरक्षा और पर्यटन तीनों का आधार हैं, और शंख-सीपी उद्योग पर सीधा असर पड़ता है, इसलिए यह विषय सतत विकास लक्ष्यों में भी आता है, जहाँ महासागरों से जुड़े लक्ष्य में अम्लीभवन को न्यूनतम करने की बात कही गई है। भारत के संदर्भ में इसका महत्त्व लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार की प्रवाल भित्तियों तथा मन्नार की खाड़ी जैसे क्षेत्रों के कारण है। उत्तर देते समय शब्द पर ध्यान दीजिए : ‘अम्लीभवन’ दिशा बताता है, अवस्था नहीं, और यही भेद इस विषय के अधिकांश कथन-आधारित प्रश्नों की कुंजी है।
- महासागरीय अम्लीभवन का मुख्य कारण वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड का समुद्री जल में घुलना है, जिससे कार्बोनिक अम्ल बनता है और वह हाइड्रोजन तथा बाइकार्बोनेट आयनों में विघटित होता है।
- औद्योगिक युग के आरंभ से सतही महासागर का pH लगभग 0·1 इकाई घटा है, और चूँकि pH लघुगणकीय है, इसका अर्थ हाइड्रोजन आयनों की सांद्रता में लगभग तीस प्रतिशत की वृद्धि है।
- अम्लीभवन का अर्थ महासागरों का अम्लीय हो जाना नहीं है — समुद्री जल अब भी क्षारीय है और उसका pH आठ के आसपास है; शब्द परिवर्तन की दिशा बताता है।
- बढ़े हुए हाइड्रोजन आयन कार्बोनेट आयनों को बाइकार्बोनेट में बदल देते हैं, जिससे कैल्सियम कार्बोनेट की संतृप्ति घटती है और प्रवाल, शंख-सीपी तथा टेरोपोड जैसे जीवों के लिए कवच बनाना कठिन हो जाता है।
- कार्बन मोनोऑक्साइड जल में लगभग अघुलनशील है और अम्ल नहीं बनाती; उसका महत्त्व विषाक्तता में है, क्योंकि वह हीमोग्लोबिन से जुड़कर ऑक्सीजन परिवहन बाधित करती है।
- क्लोरोफ्लुओरोकार्बन ओज़ोन परत के क्षरण से जुड़े हैं, जिनके नियंत्रण के लिए 1987 का मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल किया गया; वे महासागरों का pH नहीं बदलते।
- ‘अम्लीभवन’ को महासागरों के अम्लीय हो जाने के अर्थ में पढ़ लेना; समुद्री जल अब भी क्षारीय है और शब्द केवल दिशा बताता है।
- नाम में ‘कार्बन’ देखकर कार्बन मोनोऑक्साइड चुन लेना; वह जल में घुलकर अम्ल नहीं बनाती।
- स्थानीय कारक को मुख्य कारण मान लेना; हाइड्रोजन सल्फाइड ऑक्सीजन-रहित क्षेत्रों में ही महत्त्वपूर्ण है।
- ओज़ोन क्षरण और अम्लीभवन को एक समस्या मान लेना; क्लोरोफ्लुओरोकार्बन का संबंध पहली से है, दूसरी से नहीं।
- अम्ल वर्षा और महासागरीय अम्लीभवन के कारकों को मिला देना; पहली मुख्यतः सल्फर और नाइट्रोजन के ऑक्साइडों से जुड़ी है।
पर्यावरण खंड से यह विषय तीन रूपों में आता है। पहला रूप कारण पूछने का है, जैसा यहाँ है, और उसमें विकल्प जान-बूझकर मिलते-जुलते नामों से बनाए जाते हैं — कार्बन डाइऑक्साइड के साथ कार्बन मोनोऑक्साइड, अथवा किसी अन्य गैस के साथ उसका ऑक्साइड। दूसरा रूप परिणाम पूछने का है : अम्लीभवन से किन जीवों पर सबसे पहले असर पड़ेगा, अथवा कार्बोनेट की उपलब्धता का क्या होगा। तीसरा रूप कथन-आधारित है, जिसमें दो-तीन कथन देकर पूछा जाता है कि कौन-सा सही है, और वहाँ प्रायः एक कथन यह होता है कि महासागरों का जल अम्लीय हो चुका है — जिसे उसी परिभाषा-भेद से काटना पड़ता है। तैयारी का सार यह है : अभिक्रिया की शृंखला एक बार लिख लीजिए, pH में हुए परिवर्तन का आँकड़ा याद रखिए, और तीनों वैश्विक समस्याओं — तापन, ओज़ोन क्षरण, अम्ल वर्षा — के कारक अलग-अलग सूचियों में रखिए।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
महासागरीय अम्लीभवन का सबसे प्रत्यक्ष जैविक परिणाम निम्नलिखित में से क्या है?
- (a)कार्बोनेट आयनों की उपलब्धता घटने से कवच और कंकाल बनाना कठिन होना
- (b)समुद्र-तल की ऊँचाई बढ़ना
- (c)समतापमंडलीय ओज़ोन का क्षरण
- (d)समुद्री जल की लवणता का बढ़ जाना
उत्तर(a) कार्बोनेट आयनों की उपलब्धता घटने से कवच और कंकाल बनाना कठिन होना
- practice — not a real PYQ
‘महासागरीय अम्लीभवन’ पद का सही अर्थ क्या है?
- (a)समुद्री जल का pH घट रहा है, यद्यपि वह अब भी क्षारीय बना हुआ है
- (b)समुद्री जल का pH सात से नीचे जा चुका है
- (c)समुद्री जल में लवण की मात्रा बढ़ रही है
- (d)समुद्री जल का ताप बढ़ने से उसमें ऑक्सीजन घट रही है
उत्तर(a) समुद्री जल का pH घट रहा है, यद्यपि वह अब भी क्षारीय बना हुआ है