दो वस्तुओं के बीच अप्रत्यास्थ संघट्ट के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन सही है?
- (a)गतिज ऊर्जा संरक्षित रहेगी, लेकिन संवेग नहीं।
- (b)संवेग संरक्षित रहेगा, लेकिन गतिज ऊर्जा नहीं।
- (c)गतिज ऊर्जा और संवेग दोनों संरक्षित रहेंगे।
- (d)न तो गतिज ऊर्जा और न ही संवेग संरक्षित रहेगा।
सही उत्तर — B, (b) संवेग संरक्षित रहेगा, लेकिन गतिज ऊर्जा नहीं। — यही अप्रत्यास्थ संघट्ट की परिभाषा है। पहले संवेग को देखिए, क्योंकि उसका संरक्षण संघट्ट के प्रकार पर निर्भर ही नहीं करता। जब दो वस्तुएँ टकराती हैं तो वे एक-दूसरे पर बल लगाती हैं, और न्यूटन के तीसरे नियम से वे बल परिमाण में बराबर तथा दिशा में विपरीत होते हैं। इसलिए एक वस्तु का संवेग जितना बढ़ता है, दूसरी का उतना ही घटता है, और यदि निकाय पर कोई बाहरी बल न लगे तो दोनों का कुल संवेग अपरिवर्तित रहता है। यही कारण है कि संवेग-संरक्षण प्रत्यास्थ और अप्रत्यास्थ, दोनों प्रकार के संघट्टों में समान रूप से लागू होता है। अब गतिज ऊर्जा देखिए। संघट्ट में वस्तुएँ विरूपित होती हैं, ध्वनि उत्पन्न होती है, और ऊष्मा निकलती है। ये सभी ऊर्जा के दूसरे रूप हैं, और उनमें जो ऊर्जा जाती है वह गतिज ऊर्जा में से ही जाती है। अतः अप्रत्यास्थ संघट्ट के बाद निकाय की कुल गतिज ऊर्जा पहले से कम होती है। यहाँ एक बात स्पष्ट रखिए, क्योंकि परीक्षा उसी पर फिसलाती है : ऊर्जा नष्ट नहीं होती, कुल ऊर्जा सदा संरक्षित रहती है; जो संरक्षित नहीं रहती वह गतिज ऊर्जा है। प्रत्यास्थ संघट्ट इसका अपवाद है : वहाँ विरूपण अस्थायी होता है और वस्तुएँ अपने मूल रूप में लौट आती हैं, इसलिए गतिज ऊर्जा भी उतनी ही बची रहती है जितनी पहले थी। परमाणुओं और अणुओं के संघट्ट इसके निकटतम उदाहरण हैं। दैनिक जीवन के अधिकांश संघट्ट अप्रत्यास्थ होते हैं — गेंद का फ़र्श पर गिरकर पहले से नीची उछलना, दो वाहनों की टक्कर, गीली मिट्टी की गोली का दीवार से चिपक जाना। इसी क्रम में एक और श्रेणी याद रखिए। पूर्णतः अप्रत्यास्थ संघट्ट वह है जिसमें वस्तुएँ टकराकर एक साथ जुड़ जाती हैं और एक ही वेग से चलती हैं; इसमें गतिज ऊर्जा की हानि उतनी होती है जितनी संवेग-संरक्षण की शर्त के भीतर अधिकतम संभव है। इन तीनों श्रेणियों को प्रत्यवस्थान गुणांक (coefficient of restitution) से भी पहचाना जाता है : प्रत्यास्थ में उसका मान एक, अप्रत्यास्थ में शून्य और एक के बीच, तथा पूर्णतः अप्रत्यास्थ में शून्य। विकल्पों की बनावट भी सीधी है — चारों संभावनाएँ क्रम से रखी गई हैं, इसलिए निर्णय केवल इस पर है कि कौन-सी राशि सदा बचती है और कौन-सी संघट्ट के प्रकार पर निर्भर करती है।
- (a)गतिज ऊर्जा संरक्षित रहेगी, लेकिन संवेग नहीं। — यह कथन दोनों राशियों की भूमिकाएँ आपस में बदल देता है, और यही इस प्रश्न का मुख्य जाल है। गतिज ऊर्जा वह राशि है जो संघट्ट के प्रकार पर निर्भर करती है : प्रत्यास्थ संघट्ट में वह बची रहती है और अप्रत्यास्थ में उसका एक भाग ऊष्मा, ध्वनि और विरूपण में चला जाता है। संवेग इसके विपरीत है — बाहरी बल की अनुपस्थिति में वह हर संघट्ट में संरक्षित रहता है, क्योंकि संघट्ट के दौरान लगने वाले बल आंतरिक हैं और न्यूटन के तीसरे नियम से बराबर तथा विपरीत हैं। इसलिए ऐसा कोई संघट्ट होता ही नहीं जिसमें गतिज ऊर्जा तो बच जाए पर संवेग न बचे। यह विकल्प उसी अभ्यर्थी को फँसाता है जो नियम याद रखता है पर यह भूल जाता है कि किस राशि पर संघट्ट का प्रकार असर डालता है।
- (c)गतिज ऊर्जा और संवेग दोनों संरक्षित रहेंगे। — यह कथन प्रत्यास्थ संघट्ट का वर्णन है, अप्रत्यास्थ का नहीं। प्रत्यास्थ संघट्ट में विरूपण अस्थायी रहता है, वस्तुएँ अपने मूल रूप में लौट आती हैं, ऊष्मा या ध्वनि में ऊर्जा नहीं जाती, इसलिए संवेग के साथ-साथ गतिज ऊर्जा भी संरक्षित रहती है और प्रत्यवस्थान गुणांक का मान एक होता है। ऐसे संघट्ट आदर्श स्थिति हैं और सूक्ष्म कणों — परमाणुओं, अणुओं, नाभिकीय कणों — के टकरावों में उनके निकट पहुँचा जाता है। दैनिक जीवन में पूर्णतः प्रत्यास्थ संघट्ट व्यावहारिक रूप से नहीं मिलते, क्योंकि कुछ न कुछ ऊर्जा ध्वनि और ऊष्मा में जाती ही है। इसलिए यह विकल्प सही तो है, पर एक भिन्न प्रकार के संघट्ट के लिए, और प्रश्न अप्रत्यास्थ संघट्ट की बात कर रहा है।
- (d)न तो गतिज ऊर्जा और न ही संवेग संरक्षित रहेगा। — यह कथन संवेग-संरक्षण को वैकल्पिक बना देता है, जो भौतिकी में स्वीकार्य नहीं। संवेग-संरक्षण संघट्ट के प्रकार से नहीं, इस शर्त से जुड़ा है कि निकाय पर कोई परिणामी बाहरी बल न लगे; संघट्ट में लगने वाले बल आंतरिक होते हैं और वे कुल संवेग को बदल नहीं सकते। इसीलिए संवेग-संरक्षण उन कुछ नियमों में है जिनसे टकराव की समस्याएँ हल की जाती हैं, चाहे उनमें ऊर्जा की कितनी भी हानि हो। यह विकल्प उस भ्रम से भी बनता है कि जब कुछ नष्ट हो रहा है तो सब कुछ नष्ट हो रहा होगा — जबकि नष्ट होने वाली राशि केवल गतिज ऊर्जा है, और कुल ऊर्जा भी नष्ट नहीं होती, वह केवल दूसरे रूपों में बदल जाती है।
संघट्ट के प्रश्नों में दो नियम अलग-अलग स्थान रखते हैं। रैखिक संवेग का संरक्षण सार्वत्रिक है : किसी निकाय पर परिणामी बाहरी बल न लगे तो उसका कुल संवेग नहीं बदलता, और संघट्ट के क्षणों में वस्तुएँ जो बल एक-दूसरे पर लगाती हैं वे आंतरिक तथा न्यूटन के तीसरे नियम से बराबर और विपरीत होते हैं। गतिज ऊर्जा का संरक्षण सशर्त है : वह केवल प्रत्यास्थ संघट्ट में मिलता है। इसी आधार पर संघट्ट तीन श्रेणियों में बाँटे जाते हैं — प्रत्यास्थ, जिसमें गतिज ऊर्जा भी बच जाती है; अप्रत्यास्थ, जिसमें उसका कुछ भाग ऊष्मा, ध्वनि और स्थायी विरूपण में चला जाता है; और पूर्णतः अप्रत्यास्थ, जिसमें वस्तुएँ जुड़कर एक साथ चलती हैं और हानि अधिकतम होती है। इन्हें प्रत्यवस्थान गुणांक से भी पहचाना जाता है, जो पृथक्करण वेग और अभिगमन वेग का अनुपात है : प्रत्यास्थ में एक, अप्रत्यास्थ में शून्य और एक के बीच, पूर्णतः अप्रत्यास्थ में शून्य। ध्यान रखिए कि ऊर्जा-संरक्षण का व्यापक नियम हर स्थिति में लागू रहता है; प्रश्न केवल यह है कि ऊर्जा गतिज रूप में बची या किसी और रूप में चली गई।
यह भेद केवल पुस्तक की बात नहीं है, वह अभियांत्रिकी में सीधे काम आता है। वाहनों के डिज़ाइन में जान-बूझकर ऐसे भाग बनाए जाते हैं जो टक्कर में मुड़ जाएँ, ताकि गतिज ऊर्जा विरूपण में खप जाए और यात्रियों तक कम पहुँचे — अर्थात् संघट्ट को यथासंभव अप्रत्यास्थ बनाया जाता है। खेलों में इसका उलटा होता है : गेंदों और बल्लों की सामग्री ऐसी चुनी जाती है जिसमें प्रत्यवस्थान अधिक हो, ताकि टकराव के बाद अधिक गतिज ऊर्जा बची रहे। परीक्षा की दृष्टि से इस विषय के प्रश्न प्रायः तीन ही बिंदुओं पर टिकते हैं : कौन-सी राशि सदा संरक्षित है, कौन-सी सशर्त, और उस शर्त का नाम क्या है। इसके साथ यह भी याद रखिए कि संवेग एक सदिश राशि है, इसलिए द्विविमीय संघट्टों में उसका संरक्षण दोनों दिशाओं में अलग-अलग लिखा जाता है, जबकि गतिज ऊर्जा अदिश है और उसका एक ही समीकरण बनता है।
- बाहरी बल की अनुपस्थिति में कुल रैखिक संवेग हर संघट्ट में संरक्षित रहता है, क्योंकि संघट्ट के बल आंतरिक तथा न्यूटन के तीसरे नियम से बराबर और विपरीत होते हैं।
- गतिज ऊर्जा केवल प्रत्यास्थ संघट्ट में संरक्षित रहती है; अप्रत्यास्थ संघट्ट में उसका एक भाग ऊष्मा, ध्वनि और स्थायी विरूपण में बदल जाता है।
- ऊर्जा-संरक्षण का व्यापक नियम फिर भी लागू रहता है — कुल ऊर्जा नष्ट नहीं होती, केवल गतिज रूप से दूसरे रूपों में चली जाती है।
- पूर्णतः अप्रत्यास्थ संघट्ट में वस्तुएँ जुड़कर एक ही वेग से चलती हैं और गतिज ऊर्जा की हानि संवेग-संरक्षण की शर्त के भीतर अधिकतम संभव होती है।
- प्रत्यवस्थान गुणांक पृथक्करण वेग और अभिगमन वेग का अनुपात है : प्रत्यास्थ संघट्ट में एक, अप्रत्यास्थ में शून्य और एक के बीच, पूर्णतः अप्रत्यास्थ में शून्य।
- संवेग सदिश राशि है, इसलिए द्विविमीय संघट्ट में उसका संरक्षण दोनों दिशाओं में अलग-अलग लिखा जाता है, जबकि गतिज ऊर्जा अदिश है।
- दोनों राशियों की भूमिकाएँ आपस में बदल देना; संवेग सदा संरक्षित है और गतिज ऊर्जा सशर्त।
- प्रत्यास्थ संघट्ट का वर्णन अप्रत्यास्थ के उत्तर के रूप में चुन लेना; दोनों श्रेणियों के कथन विकल्पों में साथ-साथ रखे जाते हैं।
- यह मान लेना कि अप्रत्यास्थ संघट्ट में ऊर्जा नष्ट हो जाती है; कुल ऊर्जा संरक्षित रहती है, केवल गतिज ऊर्जा घटती है।
- संवेग-संरक्षण को संघट्ट के प्रकार पर निर्भर मान लेना; वह बाहरी बल की अनुपस्थिति पर निर्भर है।
- अप्रत्यास्थ और पूर्णतः अप्रत्यास्थ को एक मान लेना; दूसरे में वस्तुएँ जुड़ जाती हैं और हानि अधिकतम होती है।
संघट्ट से प्रश्न तीन रूपों में आते हैं। पहला रूप वैचारिक है, जैसा यहाँ है : संघट्ट का प्रकार बताकर पूछना कि कौन-सी राशि संरक्षित रहेगी, और विकल्पों में चारों संभावनाएँ क्रम से रख देना। दूसरा रूप संख्यात्मक है : दो द्रव्यमान और दो वेग देकर टक्कर के बाद का वेग या गतिज ऊर्जा की हानि पुछवाना, जहाँ पूर्णतः अप्रत्यास्थ स्थिति में संवेग-संरक्षण का एक ही समीकरण पर्याप्त होता है। तीसरा रूप उदाहरण-आधारित है : कोई दैनिक जीवन की घटना देकर पूछना कि वह किस प्रकार का संघट्ट है — गीली मिट्टी की गोली का दीवार से चिपकना, गेंद का पहले से नीचा उछलना, या अणुओं का टकराव। तीनों के लिए यही तैयारी पर्याप्त है : दो नियमों की शर्तें अलग-अलग याद रखिए, तीनों श्रेणियों के प्रत्यवस्थान गुणांक कंठस्थ कर लीजिए, और हर उदाहरण को उसी कसौटी पर परखिए।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
पूर्णतः अप्रत्यास्थ संघट्ट में प्रत्यवस्थान गुणांक (coefficient of restitution) का मान क्या होता है?
- (a)शून्य
- (b)एक
- (c)शून्य और एक के बीच
- (d)एक से अधिक
उत्तर(a) शून्य
- practice — not a real PYQ
दो वस्तुओं के प्रत्यास्थ संघट्ट में निम्नलिखित में से क्या संरक्षित रहता है?
- (a)केवल संवेग
- (b)केवल गतिज ऊर्जा
- (c)संवेग और गतिज ऊर्जा दोनों
- (d)न संवेग, न गतिज ऊर्जा
उत्तर(c) संवेग और गतिज ऊर्जा दोनों