षोडश आधारी संख्या 5A6D का दशमलव तुल्यांक क्या है?
- (a)23149
- (b)23148
- (c)23147
- (d)13149
सही उत्तर — A, (a) 23149 — स्थानीय मानों से जोड़िए और उत्तर सीधे निकल आता है। षोडश आधारी (hexadecimal) पद्धति में सोलह अंक होते हैं : 0 से 9 तक साधारण अंक, और उसके आगे A से F तक अक्षर, जो क्रमशः 10, 11, 12, 13, 14 और 15 के लिए हैं। दाईं ओर से स्थानीय मान 1, 16, 256, 4096 चलते हैं, अर्थात् सोलह की बढ़ती घातें। अब 5A6D को खोलिए। सबसे बाईं ओर 5 है, जिसका स्थानीय मान 4096 है : 5 × 4096 = 20480। उसके बाद A है, अर्थात् 10, जिसका स्थानीय मान 256 है : 10 × 256 = 2560। फिर 6 है, स्थानीय मान 16 : 6 × 16 = 96। और अंत में D है, अर्थात् 13, स्थानीय मान 1 : 13। चारों को जोड़िए — 20480 + 2560 + 96 + 13 = 23149। यही गणना बिना बड़ी घातें याद किए भी हो जाती है, यदि हॉर्नर की रीति से बाएँ से दाएँ चला जाए : हर चरण पर अब तक का मान सोलह से गुणा कीजिए और अगला अंक जोड़ दीजिए। 5 × 16 + 10 = 90; 90 × 16 + 6 = 1446; 1446 × 16 + 13 = 23136 + 13 = 23149। परीक्षा में यह रीति अधिक सुरक्षित है, क्योंकि इसमें केवल सोलह से गुणा करना पड़ता है और 4096 जैसी संख्याएँ याद नहीं रखनी पड़तीं। अब वे तीन जाँचें देखिए जो पूरी गणना से पहले ही अधिकांश विकल्प काट देती हैं। पहली, परिसर की जाँच : चार अंकों की कोई भी षोडश आधारी संख्या, जो 5 से आरंभ होती है, 5 × 4096 = 20480 और 6 × 4096 = 24576 के बीच ही पड़ेगी, इसलिए 13149 इस परिसर से बाहर होने के कारण तुरंत हट जाता है। दूसरी, सम-विषम की जाँच : अंतिम अंक D अर्थात् 13 विषम है और शेष सभी पद सोलह के गुणज होने से सम हैं, इसलिए दशमलव मान विषम ही होगा — 23148 इसी से कट जाता है। तीसरी, शेषफल की जाँच : संख्या को 16 से भाग देने पर शेष अंतिम अंक के बराबर, अर्थात् 13, आना चाहिए; 23147 को 16 से भाग देने पर शेष 11 आता है, इसलिए वह भी हट जाता है। तीनों जाँचों के बाद केवल 23149 बचता है, और स्थानीय मानों वाली गणना उसी की पुष्टि करती है। एक और बात, जो द्विआधारी से जुड़ने के कारण उपयोगी है : षोडश आधारी का हर अंक ठीक चार बिट के बराबर होता है, इसलिए 5A6D को सीधे 0101 1010 0110 1101 लिखा जा सकता है।
- (b)23148 — 23148 सही उत्तर से ठीक एक कम है, और इस तक पहुँचने का सबसे संभावित रास्ता अंतिम अंक D को 13 के बजाय 12 पढ़ लेना है — अर्थात् अक्षरों की गिनती एक स्थान खिसक जाना, मानो A से गिनती 9 से आरंभ हो रही हो। सही क्रम कंठस्थ रखिए : A दस, B ग्यारह, C बारह, D तेरह, E चौदह, F पंद्रह। यह विकल्प सम-विषम की जाँच से बिना किसी गणना के कट जाता है : शेष तीनों पद — 5 × 4096, 10 × 256 और 6 × 16 — सोलह के गुणज होने के कारण सम हैं, इसलिए पूरे योग की सम-विषमता केवल अंतिम अंक से तय होती है, और वह अंक 13 अर्थात् विषम है। इसलिए उत्तर विषम संख्या ही हो सकता है, और 23148 सम है।
- (c)23147 — 23147 सही उत्तर से दो कम है, और यह उस स्थिति में निकलेगा जब अंतिम अंक D को 11 मान लिया जाए। इसे काटने की सबसे साफ़ जाँच शेषफल वाली है : किसी भी षोडश आधारी संख्या का दशमलव मान 16 से भाग देने पर जो शेष देता है, वह उसका अंतिम अंक ही होता है, क्योंकि शेष सभी पद सोलह के गुणज हैं। यहाँ अंतिम अंक D अर्थात् 13 है, इसलिए उत्तर को 16 से भाग देने पर शेष 13 आना चाहिए। 23147 को 16 से भाग देने पर भागफल 1446 और शेष 11 आता है, इसलिए वह अंतिम अंक D से मेल ही नहीं खाता। यही जाँच उलटकर पुष्टि भी करती है : 23149 में से 13 घटाने पर 23136 बचता है, जो 16 से पूरा-पूरा विभाजित हो जाता है।
- (d)13149 — 13149 के अंतिम तीन अंक सही उत्तर से मिलते हैं और पहला अंक बदल गया है, अर्थात् भूल सबसे ऊँचे स्थानीय मान पर हुई है — दस हज़ार का अंतर उसी एक स्थान से आता है। इसे काटने के लिए किसी गणना की आवश्यकता ही नहीं, केवल परिसर देख लेना पर्याप्त है : जिस षोडश आधारी संख्या का पहला अंक 5 है और जिसमें चार अंक हैं, उसका दशमलव मान कम-से-कम 5 × 4096 = 20480 होगा और 6 × 4096 = 24576 से कम रहेगा। 13149 इस परिसर से बहुत नीचे है, इसलिए वह किसी भी दशा में 5 से आरंभ होने वाली चार-अंकीय षोडश आधारी संख्या नहीं हो सकता। ध्यान दीजिए कि यह विकल्प शेषफल वाली जाँच से नहीं कटता, क्योंकि उसे 16 से भाग देने पर भी शेष 13 ही आता है — इसीलिए परिसर की जाँच अलग से करनी पड़ती है।
संख्या पद्धतियों का पूरा विषय एक ही विचार पर खड़ा है — स्थानीय मान। किसी r आधार वाली संख्या में दाईं ओर से अंकों के स्थानीय मान 1, r, r वर्ग, r घन के क्रम में बढ़ते हैं, और संख्या का मान प्रत्येक अंक को उसके स्थानीय मान से गुणा करके जोड़ने पर मिलता है। षोडश आधारी पद्धति में आधार सोलह है और अंकों की कमी पूरी करने के लिए A से F तक अक्षर लिए जाते हैं, जो 10 से 15 तक के मान रखते हैं। दशमलव में बदलने की दो रीतियाँ हैं : स्थानीय मानों से गुणा करके जोड़ना, अथवा हॉर्नर की रीति, जिसमें बाएँ से दाएँ चलते हुए हर चरण पर पिछला मान आधार से गुणा करके अगला अंक जोड़ा जाता है। उलटी दिशा में, दशमलव से षोडश आधारी बनाने के लिए संख्या को बार-बार सोलह से भाग दीजिए और शेषफलों को नीचे से ऊपर पढ़िए। कंप्यूटर में यह पद्धति इसलिए प्रचलित है कि सोलह दो की चौथी घात है, अर्थात् षोडश आधारी का एक अंक ठीक चार द्विआधारी अंकों के बराबर होता है; इसी कारण स्मृति-पते, रंग-संकेत और मशीन-कूट षोडश आधारी में लिखे जाते हैं। यही संबंध अष्टाधारी पद्धति में तीन बिट के साथ बनता है।
इस प्रकार के प्रश्न में गणना छोटी होती है, इसलिए वास्तविक परीक्षा शुद्धता और गति की होती है, और उसमें तीन आदतें निर्णायक हैं। पहली, अक्षरों के मान बिना अटके याद रखना — A से F तक दस से पंद्रह — क्योंकि अधिकांश भूलें यहीं होती हैं। दूसरी, परिसर की जाँच : पहला अंक और अंकों की संख्या मिलकर उत्तर की सीमाएँ तय कर देते हैं, और इससे प्रायः एक विकल्प तुरंत हट जाता है। तीसरी, अंतिम अंक की जाँच : दशमलव मान को आधार से भाग देने पर शेष अंतिम अंक के बराबर आना चाहिए, और सम-विषमता भी अंतिम अंक से ही तय होती है, क्योंकि शेष सभी पद आधार के गुणज हैं। ये तीनों जाँचें उन विकल्पों को काटने के लिए बनी हैं जो सही उत्तर के आसपास जान-बूझकर रखे जाते हैं। ध्यान दीजिए कि यहाँ भी विकल्प इसी ढंग से रखे गए हैं — एक कम, दो कम, और दस हज़ार कम — अर्थात् तीनों भूलें भिन्न प्रकार की हैं और उन्हें भिन्न जाँचें ही पकड़ती हैं।
- षोडश आधारी पद्धति में सोलह अंक होते हैं और A से F तक के अक्षर क्रमशः 10, 11, 12, 13, 14 तथा 15 के लिए प्रयुक्त होते हैं।
- 5A6D का मान स्थानीय मानों से इस प्रकार निकलता है : 5 × 4096 = 20480, 10 × 256 = 2560, 6 × 16 = 96 और 13 × 1 = 13, जिनका योग 23149 है।
- हॉर्नर की रीति से वही उत्तर बड़ी घातें याद किए बिना मिलता है : 5 × 16 + 10 = 90, 90 × 16 + 6 = 1446, 1446 × 16 + 13 = 23149।
- चार अंकों की 5 से आरंभ होने वाली षोडश आधारी संख्या का मान 20480 और 24576 के बीच रहता है, इसलिए इस परिसर से बाहर का कोई विकल्प तुरंत हट जाता है।
- दशमलव मान को 16 से भाग देने पर शेष अंतिम अंक के बराबर आता है, और योग की सम-विषमता भी अंतिम अंक से ही तय होती है, क्योंकि शेष सभी पद सोलह के गुणज हैं।
- षोडश आधारी का एक अंक ठीक चार द्विआधारी अंकों के बराबर होता है, इसलिए 5A6D को सीधे 0101 1010 0110 1101 लिखा जा सकता है।
- A से F तक के मान एक स्थान खिसका देना; इसी भूल से उत्तर एक या दो से चूक जाता है और वही दोनों विकल्प समुच्चय में रखे गए हैं।
- स्थानीय मान उलट देना, अर्थात् सबसे बाएँ अंक को इकाई मान लेना; स्थानीय मान सदा दाईं ओर से 1, 16, 256, 4096 के क्रम में बढ़ते हैं।
- परिसर की जाँच न करना; पहला अंक और अंकों की संख्या मिलकर उत्तर की सीमाएँ तय कर देते हैं और उससे बाहर का विकल्प बिना गणना के कट जाता है।
- केवल एक ही जाँच पर भरोसा करना; यहाँ शेषफल वाली जाँच से 13149 नहीं कटता, उसे परिसर की जाँच ही काटती है।
- जल्दबाज़ी में 4096 के गुणन में भूल कर देना; हॉर्नर की रीति से केवल सोलह से गुणा करना पड़ता है और यह जोखिम घट जाता है।
संख्या पद्धतियों से इस स्तर पर तीन ढंग के प्रश्न आते हैं। पहला सीधा रूपांतरण है, जैसा यहाँ है, और उसमें विकल्प जान-बूझकर सही उत्तर के आसपास रखे जाते हैं, ताकि अक्षरों के मान या स्थानीय मानों की छोटी भूल भी एक तैयार विकल्प में जा गिरे। दूसरा ढंग द्विआधारी से जुड़ा है : षोडश आधारी को द्विआधारी में या द्विआधारी को अष्टाधारी में बदलना, जहाँ चार-चार अथवा तीन-तीन बिट के समूह बनाकर काम एक पंक्ति में हो जाता है। तीसरा ढंग अंकगणितीय है : द्विआधारी जोड़-घटाव, दो का पूरक, अथवा किसी संख्या का किसी आधार में अंकों की संख्या पूछना। तीनों के लिए एक ही अभ्यास काम आता है — सोलह की पहली चार घातें और A से F तक के मान कंठस्थ कीजिए, हर उत्तर पर परिसर तथा अंतिम अंक की जाँच लगाइए, और रूपांतरण दोनों दिशाओं में करके देखिए।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
षोडश आधारी संख्या 2F का दशमलव तुल्यांक क्या है?
- (a)47
- (b)45
- (c)31
- (d)62
उत्तर(a) 47
- practice — not a real PYQ
दशमलव संख्या 255 का षोडश आधारी रूप क्या है?
- (a)FE
- (b)FF
- (c)F0
- (d)100
उत्तर(b) FF