निम्नलिखित प्रकार के प्रचालन तंत्रों में से कौन-सा एक, किसी घटना के प्रति पूर्व-निर्धारित समय के अंदर अनुक्रिया देने के लिए अभिकल्पित है?
- (a)अन्तःस्थापित (Embedded)
- (b)सद्य (Real time)
- (c)बहु-उपयोक्ता (Multiuser)
- (d)तुल्यकालिक (Synchronized)
सही उत्तर — B, (b) सद्य (Real time) — वास्तविक-समय प्रचालन तंत्र की परिभाषा ही यह है कि वह किसी घटना का उत्तर एक निश्चित, पहले से तय समय-सीमा के भीतर दे। साधारण प्रचालन तंत्र का लक्ष्य औसत निष्पादन अच्छा रखना है — अधिक कार्य निपटें, प्रोसेसर व्यस्त रहे, उपयोक्ता को प्रतीक्षा कम लगे। वास्तविक-समय तंत्र का लक्ष्य इससे भिन्न है : वहाँ औसत नहीं, सबसे बुरी स्थिति मायने रखती है। प्रश्न यह नहीं होता कि उत्तर कितनी जल्दी आया, प्रश्न यह होता है कि क्या उत्तर हर बार, हर परिस्थिति में, तय सीमा के भीतर आ जाएगा। इसी गुण को नियततावाद (determinism) कहते हैं और यही ऐसे तंत्रों की कसौटी है। इसे संभव बनाने के लिए तंत्र की बनावट ही बदलनी पड़ती है : प्राथमिकता-आधारित पूर्वक्रयकारी (pre-emptive) अनुसूचन, ताकि अधिक प्राथमिकता वाला कार्य आते ही चल रहे कार्य को हटा सके; व्यवधान-विलंब (interrupt latency) का न्यूनतम और ज्ञात होना; और प्राथमिकता-प्रतिलोमन जैसी स्थितियों से बचने के उपाय, जिनमें कम प्राथमिकता वाला कार्य किसी संसाधन को पकड़कर ऊँची प्राथमिकता वाले कार्य को रोक देता है। वास्तविक-समय तंत्र दो प्रकार के होते हैं और यह भेद परीक्षा में सीधे पूछा जाता है। कठोर वास्तविक-समय तंत्र में समय-सीमा चूकना तंत्र की विफलता है — हृदय-गति नियामक, वायुयान की उड़ान-नियंत्रण प्रणाली, प्रतिरोधी ब्रेक प्रणाली, संयंत्रों की प्रक्रिया-नियंत्रण प्रणालियाँ। मृदु वास्तविक-समय तंत्र में देर होने से गुणवत्ता गिरती है पर तंत्र विफल नहीं होता — वीडियो प्रवाहण, इंटरनेट टेलीफ़ोनी, बहुमाध्यम प्रस्तुति। हिन्दी शब्दावली पर एक सावधानी : पुस्तिका ने real time के लिए ‘सद्य’ लिखा है, जो सामान्य प्रयोग का शब्द नहीं है — प्रचलित रूप ‘वास्तविक समय’ है, और ‘सद्य’ का साधारण अर्थ ‘अभी का, ताज़ा’ होता है। यहाँ कोष्ठक में अंग्रेज़ी दे दी गई है, इसलिए भ्रम टल जाता है; पर यदि किसी दिन कोष्ठक न हो तो शब्द से नहीं, परिभाषा से पहचानिए — जिस तंत्र में समय-सीमा वचन की तरह बाँधी जाती है, वही वास्तविक-समय तंत्र है।
- (a)अन्तःस्थापित (Embedded) — अंत:स्थापित प्रचालन तंत्र वह है जो किसी बड़े उपकरण के भीतर बैठाकर उसी उपकरण का सीमित और निर्दिष्ट काम चलाता है — वाशिंग मशीन का नियंत्रक, सेट-टॉप बॉक्स, राउटर, कार का इंजन-नियंत्रण एकक। ध्यान दीजिए कि यह वर्गीकरण इस आधार पर है कि तंत्र कहाँ चलता है और किस सीमित उद्देश्य के लिए बना है, न कि इस आधार पर कि वह उत्तर कितनी निश्चित सीमा में देता है। दोनों श्रेणियाँ आपस में काफ़ी ओवरलैप करती हैं, क्योंकि बहुत-से अंत:स्थापित उपकरण वास्तविक-समय तंत्र ही चलाते हैं — और यही इस विकल्प को आकर्षक बनाता है। किंतु प्रश्न ने कसौटी स्पष्ट लिखी है : पूर्व-निर्धारित समय के भीतर अनुक्रिया। वह गुण परिभाषा से वास्तविक-समय तंत्र का है, अंत:स्थापित तंत्र का नहीं, क्योंकि हर अंत:स्थापित उपकरण समय-सीमा का वचन नहीं देता।
- (c)बहु-उपयोक्ता (Multiuser) — बहु-उपयोक्ता तंत्र वह है जो कई उपयोक्ताओं को एक ही कंप्यूटर पर एक साथ काम करने देता है, और इसका शास्त्रीय उदाहरण यूनिक्स तथा समय-विभाजन वाली प्रणालियाँ हैं। यहाँ अनुसूचक का उद्देश्य संसाधनों का उचित बँटवारा और सबको त्वरित अनुक्रिया का अनुभव देना है : प्रोसेसर का समय छोटे-छोटे टुकड़ों में बाँटकर बारी-बारी सबको दिया जाता है, ताकि किसी को यह न लगे कि वह प्रतीक्षा कर रहा है। पर यह ‘तेज़ी का अनुभव’ किसी समय-सीमा का वचन नहीं है — भार बढ़ने पर उत्तर देर से आ सकता है और तंत्र फिर भी ठीक माना जाएगा। बहु-उपयोक्ता होना और बहु-कार्यन होना भी अलग-अलग बातें हैं, और इनमें से कोई भी उस नियततावाद का पर्याय नहीं जिसकी माँग इस प्रश्न में है।
- (d)तुल्यकालिक (Synchronized) — तुल्यकालिक कोई मान्य प्रचालन तंत्र श्रेणी है ही नहीं — यह विकल्प प्रचालन तंत्र की शब्दावली से उठाया गया एक परिचित शब्द है, जिसे श्रेणी की तरह रख दिया गया है। तुल्यकालन (synchronization) प्रचालन तंत्र के भीतर की एक समस्या और उसका समाधान है : जब कई प्रक्रियाएँ एक ही साझा संसाधन तक पहुँचती हैं तो क्रांतिक खंड, म्युटेक्स, सेमाफ़ोर और मॉनिटर जैसी युक्तियों से उनके क्रम को नियंत्रित किया जाता है, ताकि दौड़-स्थिति और गतिरोध न बनें। यह विषय वास्तविक-समय तंत्रों से जुड़ा अवश्य है, क्योंकि ग़लत तुल्यकालन से प्राथमिकता-प्रतिलोमन होकर समय-सीमा चूक सकती है, पर वह तंत्र का प्रकार नहीं है। विकल्प-समुच्चय में इस प्रकार का ‘सुनी-सुनाई शब्दावली वाला’ विकल्प रखना आयोग का सामान्य ढंग है।
प्रचालन तंत्र को कई कसौटियों पर वर्गीकृत किया जाता है, और इस प्रश्न की कुंजी यह पहचानने में है कि पूछ किस कसौटी की है। कार्य-प्रस्तुति के ढंग से — बैच तंत्र, जिसमें कार्य समूह बनाकर चलाए जाते हैं, और अन्तःक्रियात्मक तंत्र, जिसमें उपयोक्ता सीधे संवाद करता है। उपयोक्ताओं की संख्या से — एकल-उपयोक्ता और बहु-उपयोक्ता। कार्यों की संख्या से — एकल-कार्य और बहु-कार्यन। तैनाती के स्थान से — साधारण, अंत:स्थापित, वितरित, नेटवर्क और क्लस्टर तंत्र। और समय के वचन से — साधारण तंत्र, जो केवल औसत निष्पादन का ध्यान रखते हैं, तथा वास्तविक-समय तंत्र, जो हर घटना का उत्तर एक ज्ञात ऊपरी सीमा के भीतर देने का वचन देते हैं। यही अंतिम कसौटी इस प्रश्न की कसौटी है। वास्तविक-समय तंत्र में नियततावाद, प्राथमिकता-आधारित पूर्वक्रयकारी अनुसूचन और न्यूनतम व्यवधान-विलंब अनिवार्य लक्षण हैं, और वे कठोर तथा मृदु दो रूपों में मिलते हैं। प्रचलित उदाहरणों में वीएक्सवर्क्स, क्यूएनएक्स और फ़्रीआरटीओएस जैसे तंत्र गिनाए जाते हैं।
श्रेणियों का यह प्रश्न इसलिए कठिन लगता है कि श्रेणियाँ परस्पर अपवर्जी नहीं हैं : एक ही तंत्र अंत:स्थापित भी हो सकता है, बहु-कार्यन भी और वास्तविक-समय भी। ऐसे प्रश्नों में उत्तर उस श्रेणी का होता है जिसकी परिभाषा में स्टेम की कसौटी लिखी हो, न कि उस श्रेणी का जिसमें वह कसौटी प्रायः पाई जाती हो। यहाँ स्टेम की कसौटी है — पूर्व-निर्धारित समय के भीतर अनुक्रिया — और वह वास्तविक-समय तंत्र की परिभाषा है, जबकि अंत:स्थापित तंत्र में वह अकसर मिलती है, परिभाषा में नहीं। यह भेद पकड़ लेने पर ऐसे बहुत-से प्रश्न कुछ ही क्षणों में निकल जाते हैं। व्यावहारिक उदाहरणों से जोड़कर याद रखने पर श्रेणियाँ और स्थिर हो जाती हैं : किसी संयंत्र का ताप-नियंत्रण जहाँ उत्तर में देर होना दुर्घटना बन जाती है, वहाँ कठोर वास्तविक-समय तंत्र चाहिए; वीडियो कॉल में कुछ मिलीसेकंड की देर से चित्र अटकता है पर तंत्र चलता रहता है, अर्थात् मृदु वास्तविक-समय; और किसी विश्वविद्यालय के साझा सर्वर पर सैकड़ों उपयोक्ताओं का एक साथ काम करना बहु-उपयोक्ता तंत्र है।
- वास्तविक-समय प्रचालन तंत्र की परिभाषा यह है कि वह प्रत्येक घटना का उत्तर एक ज्ञात, पूर्व-निर्धारित समय-सीमा के भीतर दे; उसकी कसौटी औसत गति नहीं, सबसे बुरी स्थिति में भी सीमा का पालन है।
- इस गुण को नियततावाद कहते हैं, और इसे संभव बनाने के लिए प्राथमिकता-आधारित पूर्वक्रयकारी अनुसूचन तथा न्यूनतम एवं ज्ञात व्यवधान-विलंब आवश्यक हैं।
- कठोर वास्तविक-समय तंत्र में समय-सीमा चूकना विफलता है — हृदय-गति नियामक, उड़ान-नियंत्रण, प्रतिरोधी ब्रेक प्रणाली; मृदु वास्तविक-समय तंत्र में देर से गुणवत्ता गिरती है, जैसे वीडियो प्रवाहण।
- अंत:स्थापित तंत्र की पहचान यह है कि वह किसी उपकरण के भीतर बैठकर सीमित काम करता है; वह प्रायः वास्तविक-समय तंत्र होता है, पर उसकी परिभाषा में समय-सीमा का वचन नहीं है।
- बहु-उपयोक्ता तंत्र का उद्देश्य संसाधनों का उचित बँटवारा और त्वरित अनुक्रिया का अनुभव है, कोई समय-सीमा का वचन नहीं; समय-विभाजन इसी परिवार की तकनीक है।
- तुल्यकालन प्रचालन तंत्र के भीतर की समस्या और तकनीक है — म्युटेक्स, सेमाफ़ोर, क्रांतिक खंड — कोई तंत्र-श्रेणी नहीं।
- अंत:स्थापित और वास्तविक-समय को पर्याय मान लेना; पहली श्रेणी स्थान और उद्देश्य से बनती है, दूसरी समय-सीमा के वचन से।
- ‘तेज़ अनुक्रिया’ और ‘निश्चित सीमा में अनुक्रिया’ को एक समझ लेना; समय-विभाजन तंत्र तेज़ लगते हैं, पर सीमा का वचन नहीं देते।
- तुल्यकालिक जैसे परिचित शब्द को श्रेणी मान लेना; तुल्यकालन तंत्र के भीतर की तकनीक है।
- ‘सद्य’ शब्द से अटक जाना; कोष्ठक में दी गई अंग्रेज़ी और परिभाषा दोनों उसे वास्तविक-समय बताती हैं।
- यह मान लेना कि श्रेणियाँ परस्पर अपवर्जी हैं; उत्तर उसी श्रेणी का होगा जिसकी परिभाषा में स्टेम की कसौटी लिखी है।
प्रचालन तंत्र से इस स्तर पर तीन तरह के प्रश्न आते हैं। पहला परिभाषा-से-श्रेणी वाला है, जैसा यहाँ है : कोई एक लक्षण देकर पूछना कि वह किस प्रकार के तंत्र का है, और विकल्पों में दो-तीन ऐसी श्रेणियाँ रखना जो व्यवहार में उससे जुड़ी रहती हैं। दूसरा उदाहरण-से-श्रेणी वाला है : कोई उपकरण या स्थिति देकर पूछना कि वहाँ कौन-सा तंत्र चाहिए — हृदय-गति नियामक, यातायात-संकेत, विश्वविद्यालय का साझा सर्वर। तीसरा भीतर की अवधारणाओं का है : अनुसूचन की विधियाँ, गतिरोध, आभासी स्मृति, पृष्ठ-प्रतिस्थापन। पहले दो प्रकारों के लिए एक ही तैयारी पर्याप्त है — हर श्रेणी की एक-पंक्ति परिभाषा और दो उदाहरण लिख लीजिए, और परिभाषा में वह शब्द रेखांकित कीजिए जो उस श्रेणी को दूसरों से अलग करता है।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
कठोर वास्तविक-समय (hard real time) तंत्र की पहचान क्या है?
- (a)समय-सीमा चूक जाने पर भी तंत्र सामान्य रूप से कार्य करता रहता है
- (b)समय-सीमा का चूकना तंत्र की विफलता मानी जाती है
- (c)उसमें एक समय में केवल एक ही उपयोक्ता कार्य कर सकता है
- (d)वह केवल बैच रूप में कार्य स्वीकार करता है
उत्तर(b) समय-सीमा का चूकना तंत्र की विफलता मानी जाती है
- practice — not a real PYQ
समय-विभाजन (time-sharing) प्रचालन तंत्र का मुख्य उद्देश्य क्या है?
- (a)प्रत्येक घटना का उत्तर एक ज्ञात ऊपरी समय-सीमा के भीतर देना
- (b)प्रोसेसर का समय छोटे-छोटे अंशों में बाँटकर कई उपयोक्ताओं को एक साथ कार्य करने देना
- (c)किसी उपकरण के भीतर बैठकर उसका एक ही निर्दिष्ट कार्य चलाना
- (d)साझा संसाधनों पर प्रक्रियाओं का क्रम नियंत्रित करना
उत्तर(b) प्रोसेसर का समय छोटे-छोटे अंशों में बाँटकर कई उपयोक्ताओं को एक साथ कार्य करने देना