संतोष ट्रॉफी टूर्नामेंट, 2023 के बारे में, निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? 1. फाइनल मैच रियाद में खेला गया था। 2. फाइनल मैच कर्नाटक और मेघालय के बीच खेला गया था। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए।
- (a)केवल 1
- (b)केवल 2
- (c)1 और 2 दोनों
- (d)न तो 1 और न ही 2
सही उत्तर — C, (c) 1 और 2 दोनों — फ़ाइनल सचमुच रियाद में खेला गया और वह कर्नाटक तथा मेघालय के बीच ही था। कथन 1 सही है। संतोष ट्रॉफी के इस संस्करण का निर्णायक चरण भारत में नहीं, सऊदी अरब की राजधानी रियाद में हुआ, और फ़ाइनल वहीं किंग फ़हद इंटरनैशनल स्टेडियम में खेला गया। यह अपने-आप में असामान्य है, क्योंकि यह भारत की घरेलू राष्ट्रीय प्रतियोगिता है; ऐसा अक्तूबर 2022 में अखिल भारतीय फ़ुटबॉल महासंघ और दक्षिण एशियाई फ़ुटबॉल महासंघ के बीच हुए एक समझौता-ज्ञापन के कारण संभव हुआ, जिसमें सेमीफ़ाइनल, तीसरे स्थान का मुक़ाबला और फ़ाइनल रियाद में कराने की सहमति थी। 1941 में आरंभ हुई इस प्रतियोगिता के इतिहास में यह पहला अवसर था जब उसका कोई हिस्सा भारत के बाहर खेला गया। कथन 2 भी सही है। फ़ाइनल 4 मार्च 2023 को कर्नाटक और मेघालय के बीच हुआ, जिसमें कर्नाटक ने 3–2 से जीत दर्ज की। यह कर्नाटक का पाँचवाँ ख़िताब था। दोनों कथन सही हैं, इसलिए उत्तर 'दोनों' पर जाता है। एक बात नाम को लेकर स्पष्ट कर लीजिए, क्योंकि वह भ्रम पैदा कर सकती है। प्रश्न इसे 'संतोष ट्रॉफी टूर्नामेंट, 2023' कहता है, जबकि यह वस्तुतः 2022–23 का संस्करण है — प्रतियोगिता के आरंभिक चरण 2022 में हुए और निर्णायक चरण मार्च 2023 में। खेल-जगत के प्रश्नों में यह अंतर बार-बार आता है, इसलिए 'किस वर्ष' पढ़ते समय यह देख लीजिए कि प्रश्न आयोजन-वर्ष की बात कर रहा है या संस्करण-वर्ष की। एक भाषा-टिप्पणी भी दर्ज कर लीजिए : हिन्दी स्तंभ 'फाइनल मैच' और 'टूर्नामेंट' जैसे अंग्रेज़ी शब्दों को देवनागरी में ज्यों का त्यों रखता है, अनुवाद नहीं करता — जो खेल की शब्दावली में सामान्य है, पर ध्यान देने योग्य है।
- (a)केवल 1 — यह विकल्प रियाद वाली बात तो मान लेता है पर फ़ाइनल खेलने वाली टीमों को अस्वीकार कर देता है। कथन 2 में जो दो नाम दिए गए हैं वे दोनों ठीक हैं — फ़ाइनल कर्नाटक और मेघालय के बीच ही हुआ और कर्नाटक 3–2 से जीता। इस विकल्प पर पहुँचने की सबसे आम वजह यह होती है कि अभ्यर्थी संतोष ट्रॉफी के साथ पश्चिम बंगाल या केरल जैसे परंपरागत रूप से मज़बूत नामों को जोड़कर रखता है, इसलिए मेघालय जैसा नाम फ़ाइनल में अटपटा लगता है। पर पूर्वोत्तर की टीमें पिछले वर्षों में इस प्रतियोगिता में लगातार आगे बढ़ी हैं, और यही इस संस्करण की उल्लेखनीय बात भी रही। परीक्षा के लिए इससे एक सामान्य सीख निकलती है : किसी टीम को इसलिए मत काटिए कि वह चर्चित नहीं है, क्योंकि यही धारणा प्रश्न-निर्माता के काम आती है।
- (b)केवल 2 — यह विकल्प टीमों को तो सही मान लेता है पर स्थान को अस्वीकार कर देता है, और वह इसलिए कि भारत की एक राष्ट्रीय राज्य-स्तरीय प्रतियोगिता का फ़ाइनल किसी दूसरे देश में हो, यह पहली नज़र में असंभव लगता है। पर यही इस संस्करण की सबसे उल्लेखनीय बात थी : अक्तूबर 2022 के एक समझौता-ज्ञापन के अंतर्गत सेमीफ़ाइनल, तीसरे स्थान का मुक़ाबला और फ़ाइनल रियाद में कराए गए, और 1941 से चली आ रही इस प्रतियोगिता के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ। समसामयिक खेल-प्रश्नों में यही सबसे उपयोगी सूत्र है : जो बात असामान्य लगे, प्रायः वही पूछी जाती है, क्योंकि प्रश्न-निर्माता उसी को समाचार-योग्य मानता है। इसलिए किसी कथन को केवल 'यह तो होता ही नहीं' के आधार पर काटना जोखिम भरा है।
- (d)न तो 1 और न ही 2 — यह विकल्प दोनों कथनों को एक साथ ठुकराता है और इसलिए दोहरी भूल करता है — स्थान भी सही है और टीमें भी। ऐसे प्रश्नों में 'न तो, न ही' वाला विकल्प तब चुना जाता है जब अभ्यर्थी को विषय की कोई जानकारी नहीं होती और वह सबसे सुरक्षित दिखने वाला विकल्प खोजता है; पर यह सुरक्षित नहीं होता, क्योंकि उसे सही होने के लिए दोनों कथनों का ग़लत होना आवश्यक है, और दो स्वतंत्र तथ्यों के एक साथ ग़लत होने की संभावना अपेक्षाकृत कम रहती है। ग़लत उत्तर पर एक-तिहाई अंक कटने वाली इस परीक्षा में, जब दोनों कथनों में से कम-से-कम एक के बारे में भी ठोस जानकारी हो, तो उस जानकारी के आधार पर विकल्प घटाना अनुमान लगाने से बेहतर होता है। यहाँ यदि केवल इतना भी याद हो कि फ़ाइनल विदेश में हुआ था, तो यह विकल्प तुरंत कट जाता है।
संतोष ट्रॉफी भारत की राष्ट्रीय फ़ुटबॉल प्रतियोगिता है, जिसमें राज्यों तथा क्षेत्रीय संघों की टीमें भाग लेती हैं और जिसका संचालन अखिल भारतीय फ़ुटबॉल महासंघ करता है। यह 1941 में आरंभ हुई और इसका नाम संतोष के महाराजा सर मन्मथनाथ रॉय चौधरी के नाम पर रखा गया, जो भारतीय फ़ुटबॉल संघ के अध्यक्ष रह चुके थे और जिनका 1939 में निधन हुआ था। सबसे अधिक बार यह ख़िताब पश्चिम बंगाल ने जीता है। 2022–23 का संस्करण दो कारणों से याद रखा जाता है : उसका निर्णायक चरण भारत के बाहर, रियाद में हुआ, जो प्रतियोगिता के इतिहास में पहली बार था; और उसमें कर्नाटक ने मेघालय को 3–2 से हराकर अपना पाँचवाँ ख़िताब जीता। फ़ाइनल 4 मार्च 2023 को किंग फ़हद इंटरनैशनल स्टेडियम में खेला गया।
समसामयिक खेल-प्रश्नों की तैयारी का ढंग सामान्य ज्ञान से थोड़ा अलग होता है, और यह प्रश्न उसका अच्छा उदाहरण है। यहाँ पूछी गई दोनों बातें — स्थान और फ़ाइनल की दोनों टीमें — वे हैं जो समाचार की सुर्ख़ी में आती हैं, और प्रश्न-निर्माता प्रायः सुर्ख़ी से ही प्रश्न बनाता है। इसलिए किसी बड़े टूर्नामेंट के लिए चार बातें दर्ज कर लेना पर्याप्त होता है : विजेता, उपविजेता, स्थान और कोई एक असामान्य तथ्य। इस संस्करण में असामान्य तथ्य स्वयं स्थान ही था। एक और सावधानी वर्ष को लेकर है : खेल-प्रतियोगिताएँ प्रायः दो कैलेंडर वर्षों में फैलती हैं, इसलिए 'संतोष ट्रॉफी, 2023' कहने पर भी संस्करण 2022–23 का ही है। यही भ्रम अन्य प्रतियोगिताओं में भी होता है, इसलिए संस्करण-वर्ष और फ़ाइनल की तिथि दोनों याद रखना अधिक सुरक्षित है। भाषा की दृष्टि से ध्यान दीजिए कि हिन्दी स्तंभ खेल की शब्दावली का अनुवाद नहीं करता — 'फाइनल मैच' और 'टूर्नामेंट' देवनागरी में लिखे अंग्रेज़ी शब्द ही हैं।
- संतोष ट्रॉफी भारत की राष्ट्रीय फ़ुटबॉल प्रतियोगिता है, जिसमें राज्यों और क्षेत्रीय संघों की टीमें खेलती हैं और जिसका संचालन अखिल भारतीय फ़ुटबॉल महासंघ करता है।
- प्रतियोगिता 1941 में आरंभ हुई और इसका नाम संतोष के महाराजा सर मन्मथनाथ रॉय चौधरी के नाम पर है, जो भारतीय फ़ुटबॉल संघ के अध्यक्ष रहे और जिनका 1939 में निधन हुआ।
- 2022–23 के संस्करण का फ़ाइनल 4 मार्च 2023 को रियाद, सऊदी अरब के किंग फ़हद इंटरनैशनल स्टेडियम में खेला गया।
- फ़ाइनल कर्नाटक और मेघालय के बीच हुआ, जिसमें कर्नाटक ने 3–2 से जीत दर्ज की — यह उसका पाँचवाँ ख़िताब था।
- अक्तूबर 2022 में अखिल भारतीय फ़ुटबॉल महासंघ और दक्षिण एशियाई फ़ुटबॉल महासंघ के बीच हुए समझौता-ज्ञापन के अंतर्गत सेमीफ़ाइनल, तीसरे स्थान का मुक़ाबला और फ़ाइनल रियाद में कराए गए।
- प्रतियोगिता के इतिहास में यह पहला अवसर था जब उसका कोई भाग भारत के बाहर खेला गया।
- सबसे अधिक बार यह ख़िताब पश्चिम बंगाल ने जीता है।
- प्रश्न इसे '2023' कहता है, पर संस्करण 2022–23 का है — आरंभिक चरण 2022 में और निर्णायक चरण मार्च 2023 में।
- मेघालय जैसे कम चर्चित नाम को केवल इसी आधार पर काट देना; फ़ाइनल कर्नाटक और मेघालय के बीच ही हुआ था।
- 'भारत की घरेलू प्रतियोगिता विदेश में कैसे' सोचकर रियाद वाला कथन ठुकरा देना; यही इस संस्करण की सबसे उल्लेखनीय बात थी।
- संस्करण-वर्ष और आयोजन-वर्ष को मिला देना; प्रश्न '2023' कहता है, पर संस्करण 2022–23 का है।
- जानकारी न होने पर 'न तो 1 और न ही 2' को सुरक्षित मान लेना; उसके सही होने के लिए दोनों कथनों का ग़लत होना आवश्यक है।
- संतोष ट्रॉफी को किसी और खेल या किसी क्लब-स्तरीय लीग से जोड़ देना; यह राज्यों और क्षेत्रीय संघों की फ़ुटबॉल प्रतियोगिता है।
समसामयिक खेल-प्रश्न तीन ढंग से आते हैं। पहला यही — किसी हाल की प्रतियोगिता के बारे में दो कथन देकर पूछना कि कौन सही है, जहाँ कथन प्रायः विजेता, उपविजेता, स्थान या स्कोर के होते हैं। दूसरा सीधा तथ्य वाला है : कौन जीता, कहाँ हुआ, या कौन-सा संस्करण था। तीसरा पृष्ठभूमि वाला है : प्रतियोगिता कब आरंभ हुई, किसके नाम पर है, कौन-सी संस्था कराती है, या सबसे सफल टीम कौन-सी है। तीनों के लिए एक ही तैयारी काफ़ी है — हर बड़ी प्रतियोगिता के लिए चार पंक्तियाँ लिख लीजिए : विजेता, उपविजेता, स्थान और एक असामान्य तथ्य। असामान्य तथ्य वाली पंक्ति सबसे अधिक काम आती है, क्योंकि प्रश्न प्रायः वहीं से बनता है, जैसा इस प्रश्न में स्थान के साथ हुआ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- practice — not a real PYQ
संतोष ट्रॉफी में सर्वाधिक बार विजेता रहने वाली टीम कौन-सी है?
- (a)पश्चिम बंगाल
- (b)केरल
- (c)पंजाब
- (d)कर्नाटक
उत्तर(a) पश्चिम बंगाल
- practice — not a real PYQ
संतोष ट्रॉफी प्रतियोगिता किस वर्ष आरंभ हुई थी?
- (a)1932
- (b)1941
- (c)1951
- (d)1960
उत्तर(b) 1941