लेखकों की सूची – I को 1857 की पुस्तकों की सूची – II से मिलाएँ और नीचे दिए गए कोड से उत्तर चुनें : सूची – I सूची – II a. वी. डी. सावरकर i. प्रथम स्वतंत्रता संग्राम b. एस. एन. सेन ii. किसान और राज c. एरिक स्टोक्स iii. नागरिक विद्रोह और भारतीय विद्रोह में d. एस. बी. चौधरी iv. अठारह सौ सत्तावन कोड : a b c d
- (a)i iv ii iii
- (b)iv ii i iii
- (c)ii iii i iv
- (d)उपरोक्त में से कोई नहीं
सही — (a) i iv ii iii। हर जोड़ी अपने आप में स्वतन्त्र रूप से तय है, इसलिए यह कोड किसी निराकरण की प्रक्रिया से नहीं, चार अलग-अलग तथ्यों से निकलता है। वी. डी. सावरकर ने विद्रोह का वह राष्ट्रवादी इतिहास लिखा जो 1909 में 'द इण्डियन वॉर ऑफ़ इण्डिपेंडेंस, 1857' के रूप में प्रकाशित हुआ और बाद के संस्करणों में उसी शब्दावली से आया जो सूची-II काम में लेती है — इसलिए a का मेल (i) से है। एस. एन. सेन, अर्थात् सुरेन्द्रनाथ सेन, ने 'अठारह सौ सत्तावन' लिखी, जो 1957 में सूचना मन्त्रालय के प्रकाशन विभाग द्वारा विद्रोह की शताब्दी पर भारत सरकार के आधिकारिक इतिहास के रूप में प्रकाशित हुई — इसलिए b का मेल (iv) से है। एरिक स्टोक्स ने 'द पेज़ेंट एण्ड द राज: स्टडीज़ इन एग्रेरियन सोसाइटी एण्ड पेज़ेंट रिबेलियन इन कोलोनियल इण्डिया' लिखी, जो केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस से आई और जिसने 1857 को एक आन्दोलन के बजाय स्थानीय कृषक विद्रोहों के समुच्चय के रूप में फिर से गढ़ा — इसलिए c का मेल (ii) से है। एस. बी. चौधरी ने 'सिविल रिबेलियन इन द इण्डियन म्यूटिनीज़, 1857-1859' लिखी, जो 1957 में प्रकाशित हुई — इसलिए d का मेल (iii) से है। अतः क्रम i, iv, ii, iii बनता है, जो कोड (a) है। एक छपी हुई विचित्रता दर्ज करने योग्य है, सुधारने योग्य नहीं: सूची-II की प्रविष्टि (iii) 'नागरिक विद्रोह और भारतीय विद्रोह में' छपी है, जिसमें एक फ़ालतू 'और' है और अन्त में एक अधूरा परसर्ग 'में', जबकि वास्तविक शीर्षक ऐसा नहीं है। यही दोष अंग्रेज़ी स्तम्भ में भी है, जहाँ 'Civil Rebellion and in the Indian Mutinies' छपा है — अर्थात् यह किसी एक भाषा की चूक नहीं, प्रश्नपत्र की अपनी है। इससे कोई दूसरा सम्भावित मेल नहीं बनता, क्योंकि सूची की कोई और पुस्तक इससे मिलती-जुलती नहीं है।
- (b)iv ii i iii — यह पहली तीन जोड़ियों को सबसे नुक़सानदेह ढंग से उलट देता है: यह सावरकर को भारत सरकार का आधिकारिक शताब्दी इतिहास दे देता है और एस. एन. सेन को केम्ब्रिज का कृषक अध्ययन। ये दोनों लेखक इतिहास-लेखन के दो छोरों पर बैठते हैं — एक 1909 में निर्वासन में लिखने वाला क्रान्तिकारी राष्ट्रवादी, दूसरा 1957 में राज्य द्वारा नियुक्त पेशेवर इतिहासकार — इसलिए यह जोड़ी पूरी सूची का मर्म ही उलट देती है।
- (c)ii iii i iv — यह सावरकर को एरिक स्टोक्स की पुस्तक और एस. एन. सेन को चौधरी का शीर्षक दे देता है, फिर सेन की अपनी 'अठारह सौ सत्तावन' एस. बी. चौधरी को थमा देता है। केवल तीसरी जोड़ी संयोग से बच जाती है। यही वह विकल्प है जिस पर वह अभ्यर्थी पहुँचता है जो चारों लेखकों में से किसी को जाने बिना दोनों सूचियों को छपे हुए क्रम में मिला देता है।
- (d)उपरोक्त में से कोई नहीं — यह बचाव-विकल्प तभी सही होता जब तीनों कोड विफल हो जाते, और कोड (a) हर जोड़ी को ठीक-ठीक दोहराता है। एक बात ज़रूर ध्यान देने वाले पाठक को इसकी ओर खींच सकती है — सूची-II की प्रविष्टि (iii) का फ़ालतू 'और' तथा अन्त का अधूरा 'में', जिससे छपा हुआ शीर्षक असली शीर्षक से भिन्न हो जाता है। पर ग़लत छपा शीर्षक ग़लत मेल नहीं होता: पुस्तक फिर भी विशिष्ट रूप से पहचानी जा रही है, और उस पर कोई दूसरी प्रविष्टि दावा नहीं करती।
1857 के बारे में लिखा कैसे गया, यह स्वयं एक परीक्षोपयोगी विषय है, क्योंकि उन्हीं घटनाओं के चार अलग-अलग नाम और चार अलग-अलग व्याख्याएँ रही हैं। तत्कालीन ब्रिटिश दृष्टि उसे सिपाही विद्रोह कहती थी — चर्बी लगे कारतूसों से भड़की सैन्य अवज्ञा — और वही पाठ के तथा मैलेसन की पुस्तकों के शीर्षकों में बचा हुआ है। राष्ट्रवादी दृष्टि, जिसका शास्त्रीय कथन सावरकर ने 1909 में दिया, उसे भारत का प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम कहती थी और विद्रोह को एक सुनियोजित, अखिल भारतीय राष्ट्रीय उभार के रूप में पढ़ती थी; वह पुस्तक प्रकाशन से पहले ही प्रतिबन्धित हो गई और भूमिगत रूप से चली, जो उसके महत्त्व का एक कारण है। शताब्दी पर भारत का आधिकारिक आकलन, जो एस. एन. सेन ने 1957 में सरकार के अनुरोध पर लिखा, अधिक संयत था — उसने एक वास्तविक जन-आयाम स्वीकार किया पर एक ही समन्वित राष्ट्रीय योजना के दावे से इनकार किया। बाद की अकादमिक लहर, जिसका प्रमुख नाम एरिक स्टोक्स हैं, प्रश्न को राष्ट्रीय राजनीति से हटाकर कृषक समाज की ओर ले गई और तर्क दिया कि यह विद्रोह एक कारण वाला एक आन्दोलन नहीं, बल्कि भू-राजस्व, ऋणग्रस्तता तथा बेदख़ली से चले अनेक स्थानीय आन्दोलनों का समुच्चय था। एस. बी. चौधरी भी दृष्टि के इसी विस्तार के हैं, जो सैनिक विद्रोह के साथ-साथ चले नागरिक विद्रोह की जाँच करते हैं।
सुमेलन के प्रश्न उन जोड़ियों को पक्का करके जीते जाते हैं जिनके बारे में आप निश्चित हैं, और फिर उन्हीं से कोड काटे जाते हैं — चारों को हल करने से नहीं। यहाँ सबसे आसान दो लंगर हैं सावरकर के साथ स्वतन्त्रता-संग्राम वाला शीर्षक, जो लगभग हर अभ्यर्थी जानता है, और एस. एन. सेन के साथ 'अठारह सौ सत्तावन', जिसका केवल तिथि वाला शीर्षक एक बार मिल जाने पर भुलाया नहीं जाता। अकेले ये दो कोड (b) और (c) को मार देते हैं, जिसके बाद (a) और बचाव-विकल्प आमने-सामने रह जाते हैं। फिर बची हुई जोड़ी को मान लेने के बजाय जाँच लीजिए: स्टोक्स कृषकों के इतिहासकार हैं और चौधरी नागरिक विद्रोह के, और शीर्षक ठीक यही कहते हैं। आम तौर पर उपयोगी आदत यह है कि हर इतिहासकार को एक शब्द के लेबल के साथ थामिए — सावरकर राष्ट्रवादी, सेन आधिकारिक, स्टोक्स कृषक, चौधरी नागरिक विद्रोह — क्योंकि BPSC और UPSC, दोनों इस सूची को कई दिशाओं से पूछते हैं। और जब कोई छपा हुआ शीर्षक थोड़ा ग़लत दिखे, जैसा यहाँ सूची-II (iii) दिखता है, तो उसे प्रश्नपत्र की मुद्रण त्रुटि मानिए, इस प्रमाण के रूप में नहीं कि मेल असम्भव है।
- वी. डी. सावरकर की 'द इण्डियन वॉर ऑफ़ इण्डिपेंडेंस, 1857' पहली बार 1909 में प्रकाशित हुई और उसने विद्रोह को सुनियोजित स्वतन्त्रता संग्राम के रूप में राष्ट्रवादी पाठ दिया।
- एस. एन. सेन की 'अठारह सौ सत्तावन' 1957 में सूचना मन्त्रालय के प्रकाशन विभाग से आई — विद्रोह की शताब्दी पर भारत सरकार का आधिकारिक इतिहास।
- एरिक स्टोक्स ने केम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस के लिए 'द पेज़ेंट एण्ड द राज: स्टडीज़ इन एग्रेरियन सोसाइटी एण्ड पेज़ेंट रिबेलियन इन कोलोनियल इण्डिया' लिखी; उनकी मरणोपरान्त कृति 'द पेज़ेंट आर्म्ड: द इण्डियन रिवोल्ट ऑफ़ 1857', सी. ए. बेली द्वारा सम्पादित, 1986 में आई।
- एस. बी. चौधरी की 'सिविल रिबेलियन इन द इण्डियन म्यूटिनीज़, 1857-1859' 1957 में प्रकाशित हुई — पुस्तिका की सूची-II उसका शीर्षक एक फ़ालतू 'और' के साथ छापती है, जो मुद्रण दोष है, कोई दूसरी पुस्तक नहीं।
- इस घटना के चार नाम — सिपाही विद्रोह, प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम, 1857 का विद्रोह, तथा कृषक विद्रोहों का समुच्चय — उन्हीं चार इतिहास-लेखन की स्थितियों से मेल खाते हैं जिनका प्रतिनिधित्व यह सूची करती है।
उभारी गई पंक्तियों को ऊपर से नीचे पढ़ने पर a-i, b-iv, c-ii, d-iii बनता है, जो कोड (a) है। हर जोड़ी अपने आप में तय है, इसलिए चारों लेबल जान लेने के बाद किसी निराकरण की आवश्यकता ही नहीं।
- छपे हुए शीर्षक को 'सुधारने' की कोशिश करना। सूची-II (iii) में एक फ़ालतू 'और' तथा अन्त में अधूरा 'में' है; पुस्तक फिर भी विशिष्ट रूप से पहचानी जा रही है और मेल पर कोई असर नहीं पड़ता।
- सावरकर के 1909 के राष्ट्रवादी इतिहास को एस. एन. सेन के 1957 के आधिकारिक इतिहास से गड्डमड्ड कर लेना। इस प्रश्न पर कि विद्रोह सुनियोजित राष्ट्रीय संग्राम था या नहीं, दोनों उलटी स्थिति लेते हैं।
- दोनों सूचियों को छपे हुए क्रम में मिला देना। इस प्रश्न में उससे कोड (c) बनता है, जिसमें केवल एक जोड़ी सही बैठती है — सुमेलन का प्रश्न कभी स्थान से हल नहीं होता।
BPSC लेखक तथा पुस्तक के लिए सुमेलन का रूप किसी भी अन्य विषय से अधिक काम में लाता है, और विशेष रूप से 1857 का इतिहास-लेखन अपेक्षित रखता है, क्योंकि जगदीशपुर के कुँवर सिंह के कारण बिहार इस विद्रोह का बड़ा रंगमंच था। UPSC ने इन्हीं लेखकों को व्यापक पुस्तक-लेखक सूचियों के भीतर पूछा है, और उसके अलावा वह व्याख्या वाला प्रश्न पसन्द करता है — विद्रोह का समर्थन किसने किया, कौन तटस्थ रहा, किसी समकालीन प्रेक्षक ने उसके बारे में क्या कहा।
सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए : सूची I (पुस्तकें) I. द फ़र्स्ट इण्डियन वॉर ऑफ़ इण्डिपेंडेंस II. आनन्द मठ III. लाइफ़ डिवाइन IV. साधना सूची II (लेखक) A) रवीन्द्रनाथ टैगोर B) श्री अरविन्द C) बंकिम चन्द्र चटर्जी D) विनायक दामोदर सावरकर
- (a) I-D, II-C, III-B, IV-A
- (b) I-C, II-D, III-A, IV-B
- (c) I-D, II-A, III-C, IV-B
- (d) I-C, II-B, III-A, IV-D
उत्तर(a) I-D, II-C, III-B, IV-A
वही पुस्तक और वही लेखक, वही रूप — UPSC की सूची I 'द फ़र्स्ट इण्डियन वॉर ऑफ़ इण्डिपेंडेंस' से आरम्भ होती है और उसे सावरकर से जोड़कर उत्तर देती है, और यही वह लंगर जोड़ी है जो इस प्रश्न के तीन में से दो कोड मार देती है।
1857 के विद्रोह के प्रमुख नेता कुँवर सिंह निम्नलिखित में से किस स्थान के थे ?
- (a) बिहार
- (b) मध्य प्रदेश
- (c) राजस्थान
- (d) उत्तर प्रदेश
उत्तर(a) बिहार
यह समझाता है कि बिहार के प्रश्नपत्रों में 1857 बार-बार क्यों लौटता है। जगदीशपुर के कुँवर सिंह ने शाहाबाद को इस विद्रोह के गम्भीर रंगमंचों में से एक बना दिया, और इसीलिए BPSC घटनाओं के साथ-साथ उन पर लिखी गई पुस्तकों की भी अपेक्षा रखता है।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
विद्रोह की शताब्दी पर भारत सरकार का आधिकारिक इतिहास 'अठारह सौ सत्तावन' किसने लिखा ?
- (a)वी. डी. सावरकर
- (b)एस. एन. सेन
- (c)आर. सी. मजूमदार
- (d)एरिक स्टोक्स
उत्तर(b) एस. एन. सेन — यह 1957 में सूचना मन्त्रालय के प्रकाशन विभाग से प्रकाशित हुई। आर. सी. मजूमदार ने उसी शताब्दी वर्ष में विद्रोह पर अपना अधिक सन्देहशील विवरण लिखा था, पर आधिकारिक दायित्व सेन को मिला।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
1857 के विद्रोह के प्रमुख व्यक्ति कुँवर सिंह ने विद्रोह का नेतृत्व कहाँ किया ?
- (a)बिहार में जगदीशपुर
- (b)बंगाल में बैरकपुर
- (c)रुहेलखण्ड में बरेली
- (d)दक्कन में सतारा
उत्तर(a) बिहार में जगदीशपुर — शाहाबाद ज़िले के जगदीशपुर के अस्सी पार कर चुके ज़मींदार, जिन्होंने 1857 में मोर्चा सँभाला और जो आज भी इस विद्रोह के केन्द्रीय बिहारी व्यक्ति हैं।