भौतिक रूप में किस प्रकार हाइड्रोजन को भण्डारित किया जाता है ?
- (a)हाइड्रोजन गैस के संपीड़न से
- (b)हाइड्राइड के रूप में
- (c)जल के रूप में
- (d)उपर्युक्त में से कोई नहीं
सही — (a) हाइड्रोजन गैस के संपीड़न से। इस प्रश्न में असली काम 'भौतिक रूप में' शब्द कर रहा है, क्योंकि हाइड्रोजन का भण्डारण औपचारिक रूप से ठीक दो परिवारों में बँटा है और यह विभाजन इसी बात पर टिका है कि हाइड्रोजन अणु ज्यों का त्यों बचा रहता है या नहीं। संयुक्त राज्य अमेरिका का ऊर्जा विभाग इसे इन शब्दों में रखता है: हाइड्रोजन को भौतिक रूप में या तो गैस के रूप में या द्रव के रूप में रखा जा सकता है; गैस के रूप में रखने के लिए सामान्यतः उच्च दाब वाले टैंक (350–700 बार) चाहिए; द्रव के रूप में रखने के लिए अति-निम्न ताप चाहिए, क्योंकि एक वायुमण्डलीय दाब पर हाइड्रोजन का क्वथनांक −252.8 °C है; और हाइड्रोजन को ठोसों की सतह पर (अधिशोषण द्वारा) या ठोसों के भीतर (अवशोषण द्वारा) भी रखा जा सकता है। इनमें से पहले दो भौतिक विधियाँ हैं; तीसरा परिवार — हाइड्रोजन का किसी पदार्थ के भीतर या उसकी सतह पर बँधा होना — पदार्थ-आधारित या रासायनिक मार्ग है। गैस को उच्च दाब वाले टैंक में संपीड़ित करने से अणु में कुछ भी नहीं बदलता; बस उतने ही आयतन में उनकी संख्या बढ़ जाती है, और यहाँ 'भौतिक' का अर्थ ठीक यही है। संपीड़न की आवश्यकता ही क्यों पड़ती है, यह जानना भी उपयोगी है, क्योंकि हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था की पूरी अभियान्त्रिकी समस्या यही है: किसी भी ईंधन की तुलना में हाइड्रोजन की प्रति इकाई द्रव्यमान ऊर्जा सबसे अधिक है, पर सामान्य ताप और दाब पर यह इतनी विरल होती है कि इसकी प्रति इकाई आयतन ऊर्जा बहुत कम रह जाती है। एक किलोग्राम हाइड्रोजन बहुत ऊर्जा रखता है पर बेहूदा बड़ा स्थान घेरता है, इसलिए किसी वाहन में उपयोगी मात्रा भरने से पहले इस ईंधन को 350 या 700 बार तक दबाना पड़ता है, या द्रव रूप में 20 केल्विन तक ठंडा करना पड़ता है।
- (b)हाइड्राइड के रूप में — यह वास्तविक भण्डारण है, और दूसरे परिवार का मानक उदाहरण है। धात्विक हाइड्राइड, जटिल हाइड्राइड या रासायनिक हाइड्रोजन वाहक में हाइड्रोजन किसी ठोस यौगिक के भीतर रासायनिक रूप से बँधा होता है और उसे गरम करके या किसी रासायनिक अभिक्रिया से मुक्त करना पड़ता है। ऊर्जा विभाग का अपना वर्गीकरण भी अवशोषण द्वारा ठोसों के भीतर रखी गई हाइड्रोजन को इस रेखा के पदार्थ-आधारित पक्ष में रखता है, भौतिक पक्ष के सामने। यह 'हाइड्रोजन का रासायनिक भण्डारण कैसे होता है' प्रश्न का सही उत्तर है, जो पूछा ही नहीं गया।
- (c)जल के रूप में — जल वह जगह है जहाँ से हाइड्रोजन आती है, वह जगह नहीं जहाँ उसे रखा जाता है। H₂O एक स्थायी यौगिक है; उससे हाइड्रोजन निकालने का अर्थ है विद्युत्-अपघटन, जिसमें उतनी ऊर्जा लगती है जितनी वह हाइड्रोजन बाद में लौटाएगी नहीं। जल को भण्डारण माध्यम कहना कच्चे माल को भण्डार समझ लेना है — और वैसे भी यौगिक रासायनिक होता है, भौतिक नहीं, इसलिए यह विकल्प प्रश्न के क्रियाविशेषण पर दो बार विफल होता है।
- (d)उपर्युक्त में से कोई नहीं — बचाव-विकल्प के लिए तीनों नामित कथनों का विफल होना आवश्यक है, जबकि पहला कथन तो पाठ्यपुस्तक वाली भौतिक विधि को ठीक-ठीक बताता है। इसे सहारा देने वाला एकमात्र पाठ शब्दजाल भर है — कि −252.8 °C पर द्रवण भी एक भौतिक विधि है और विकल्प केवल संपीड़न का नाम लेता है — पर एक सच्ची भौतिक विधि का नाम लेना यह दावा करना नहीं है कि वही अकेली विधि है, और प्रश्न 'कैसे' पूछ रहा है, 'केवल कैसे' नहीं।
ईंधन के रूप में हाइड्रोजन दो कारणों से आकर्षक है और एक कारण से कठिन। किसी भी ईंधन की तुलना में इसकी प्रति किलोग्राम ऊर्जा सबसे अधिक है — लगभग पेट्रोल की तीन गुनी — और इसके जलने से केवल जलवाष्प बनती है, कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फ़र ऑक्साइड या कण-प्रदूषक नहीं। कठिनाई घनत्व की है: कमरे के ताप और वायुमण्डलीय दाब पर गैस के रूप में यह प्रति लीटर बहुत कम ऊर्जा रखती है, इसलिए पूरी अभियान्त्रिकी पर भण्डारण ही छाया रहता है। तीन भौतिक उत्तर हैं — प्रबलित टैंक में 350 या 700 बार तक संपीड़न, −252.8 °C से नीचे अति-निम्न ताप पर द्रवण, और दोनों को मिलाने वाला क्रायो-संपीड़न। पदार्थ-आधारित उत्तर हाइड्रोजन को किसी पदार्थ के भीतर या उसकी सतह पर रखते हैं — धात्विक हाइड्राइड, जटिल हाइड्राइड, अमोनिया या द्रव कार्बनिक हाइड्रोजन वाहक जैसे रासायनिक वाहक, तथा बड़े पृष्ठ-क्षेत्रफल वाले अधिशोषक जो अधिशोषण द्वारा हाइड्रोजन को थामते हैं। भारत की नीतिगत रुचि हाल की और विशिष्ट है: केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल ने 4 जनवरी 2023 को राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को 19,744 करोड़ रुपये के आरम्भिक परिव्यय के साथ स्वीकृति दी, जिसका लक्ष्य 2030 तक प्रतिवर्ष कम से कम 50 लाख मीट्रिक टन हरित हाइड्रोजन, साथ में लगभग 125 गीगावाट नई नवीकरणीय क्षमता, तथा प्रतिवर्ष लगभग 5 करोड़ टन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी है।
इसका उत्तर स्मरण से नहीं, वर्गीकरण से दीजिए। हर विकल्प से पूछिए: क्या हाइड्रोजन अणु हाइड्रोजन अणु ही बना रहता है ? गैस को संपीड़ित कीजिए तो बना रहता है — आपने केवल अणुओं को पास-पास ठूँस दिया है। उसे किसी हाइड्राइड में बाँध दीजिए तो नहीं बना रहता — अब वह किसी यौगिक का अंश है और उसे रासायनिक रूप से मुक्त करना पड़ेगा। जल में रखिए तो वह कभी हाइड्रोजन गैस थी ही नहीं। यही अकेली कसौटी ऊर्जा विभाग की शब्दावली याद किए बिना तीनों नामित विकल्पों को छाँट देती है, और यह हर जगह लागू होती है: भौतिकी और रसायन में 'भौतिक' परिवर्तन का अर्थ है संघटन अपरिवर्तित, और 'रासायनिक' परिवर्तन का अर्थ है नया पदार्थ। दो बातें साथ रखने योग्य हैं। दाब परीक्षोपयोगी संख्याएँ हैं — संपीड़ित गैस के लिए 350 बार और 700 बार — और वैसा ही द्रवण का ताप, एक वायुमण्डल पर −252.8 °C। और भण्डारण इतना मायने क्यों रखता है, इसका कारण है हाइड्रोजन की प्रति द्रव्यमान ऊर्जा, जो किसी भी ईंधन में सबसे अधिक है, और उसकी प्रति आयतन ऊर्जा, जो बहुत कम है — इन दोनों का विरोधाभास।
- अमेरिकी ऊर्जा विभाग: हाइड्रोजन को भौतिक रूप में गैस के रूप में, 350 से 700 बार वाले उच्च दाब टैंकों में, या द्रव के रूप में अति-निम्न ताप पर रखा जा सकता है; एक वायुमण्डलीय दाब पर उसका क्वथनांक −252.8 °C है।
- दूसरा परिवार पदार्थ-आधारित भण्डारण है — हाइड्रोजन को ठोसों की सतह पर अधिशोषण द्वारा या ठोसों के भीतर अवशोषण द्वारा रखना, जैसा धात्विक हाइड्राइड, जटिल हाइड्राइड और रासायनिक हाइड्रोजन वाहकों में होता है।
- किसी भी ईंधन की तुलना में हाइड्रोजन की प्रति इकाई द्रव्यमान ऊर्जा सबसे अधिक है, पर सामान्य ताप पर कम घनत्व के कारण उसकी प्रति इकाई आयतन ऊर्जा बहुत कम है — यही कारण है कि भण्डारण ही केन्द्रीय अभियान्त्रिकी समस्या है।
- भारत के राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन को केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल ने 4 जनवरी 2023 को 19,744 करोड़ रुपये के आरम्भिक परिव्यय के साथ स्वीकृति दी, जिसमें 17,490 करोड़ रुपये SIGHT कार्यक्रम के लिए हैं।
- मिशन के 2030 के लक्ष्य: प्रतिवर्ष कम से कम 50 लाख मीट्रिक टन हरित हाइड्रोजन, लगभग 125 गीगावाट सम्बद्ध नवीकरणीय क्षमता, 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश तथा प्रतिवर्ष लगभग 5 करोड़ टन ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी।
'भौतिक रूप में' ही पूरा प्रश्न है। भौतिक परिवर्तन = संघटन अपरिवर्तित; रासायनिक परिवर्तन = नया पदार्थ। यही एक कसौटी बिना कोई शब्दावली याद किए तीनों नामित विकल्पों को छाँट देती है।
- क्रियाविशेषण को पढ़े बिना आगे बढ़ जाना। 'भौतिक रूप में' ही पूरा प्रश्न है — हाइड्राइड तो इसी प्रश्न के रासायनिक-भण्डारण वाले रूप का सही उत्तर हैं।
- जल को हाइड्रोजन का भण्डार मान लेना। वह कच्चा माल है जिसका विद्युत्-अपघटन करना पड़ता है, और उस अपघटन में उतनी ऊर्जा लगती है जितनी हाइड्रोजन लौटाती नहीं।
- यह मान लेना कि संपीड़न ही एकमात्र भौतिक विधि है। −252.8 °C पर द्रवण और क्रायो-संपीड़न भी भौतिक हैं; विकल्प एक सच्ची विधि का नाम लेता है, और इतना पर्याप्त है।
BPSC नई ऊर्जा प्रौद्योगिकी को एक पंक्ति के वर्गीकरण के रूप में पूछता है और भेद को एक ही क्रियाविशेषण में छिपा देता है, इसलिए यह प्रश्न तकनीकी गहराई से अधिक सावधान पठन को पुरस्कृत करता है। UPSC आस-पास के गुणधर्म अधिक पसन्द करता है — किस ईंधन का ईंधन-मान सबसे अधिक है, कौन-सा ईंधन सबसे कम प्रदूषण करता है, ईंधन सेल से क्या निकलता है — और अब हरित हाइड्रोजन को भण्डारण की अभियान्त्रिकी के बजाय मिशन के लक्ष्यों के रास्ते पूछता है।
निम्नलिखित में से किसका ईंधन-मान सर्वाधिक है ?
- (a) हाइड्रोजन
- (b) चारकोल
- (c) प्राकृतिक गैस
- (d) गैसोलीन
उत्तर(a) हाइड्रोजन
यह वही गुणधर्म बताता है जो भण्डारण की समस्या पैदा करता है। हाइड्रोजन प्रति किलोग्राम किसी भी अन्य ईंधन से अधिक ऊर्जा रखती है पर प्रति लीटर बहुत कम, और ठीक इसीलिए उसे ढोने से पहले सैकड़ों वायुमण्डल तक दबाना पड़ता है।
निम्नलिखित में से कौन-सा ईंधन न्यूनतम पर्यावरणीय प्रदूषण करता है ?
- (a) डीज़ल
- (b) कोयला
- (c) हाइड्रोजन
- (d) मिट्टी का तेल
उत्तर(c) हाइड्रोजन
हाइड्रोजन के पक्ष का दूसरा आधा तर्क — उसके जलने से केवल जलवाष्प बनती है। ईंधन-मान वाले प्रश्न के साथ मिलाकर यह समझाता है कि 700 बार पर गैस रखने जैसी बेढब अभियान्त्रिकी समस्या हल करने लायक़ क्यों है।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
हाइड्रोजन को द्रव के रूप में रखने के लिए उसे लगभग किस ताप से नीचे ठंडा करना पड़ता है ?
- (a)−78 °C
- (b)−183 °C
- (c)−253 °C
- (d)−40 °C
उत्तर(c) −253 °C — एक वायुमण्डल पर हाइड्रोजन का क्वथनांक −252.8 °C है, इसीलिए द्रव हाइड्रोजन के भण्डारण में अति-निम्न ताप वाले उपकरण चाहिए। लगभग −183 °C ऑक्सीजन का क्वथनांक है और −78 °C वह ताप है जिस पर ठोस कार्बन डाइऑक्साइड ऊर्ध्वपातित होती है।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
जनवरी 2023 में केन्द्रीय मन्त्रिमण्डल द्वारा स्वीकृत राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन का 2030 तक वार्षिक हरित हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता का लक्ष्य कम से कम है
- (a)10 लाख मीट्रिक टन
- (b)50 लाख मीट्रिक टन
- (c)2 करोड़ मीट्रिक टन
- (d)5 करोड़ मीट्रिक टन
उत्तर(b) 50 लाख मीट्रिक टन — साथ में लगभग 125 गीगावाट सम्बद्ध नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता, और मिशन का आरम्भिक परिव्यय 19,744 करोड़ रुपये।