राज एक बिंदु X से Y की तरफ 80 मीटर की सीधी दूरी तय करता है । वह दाएँ मुड़कर 50 मीटर चलता है, फिर पुन: दाएँ मुड़कर 70 मीटर चलता है । अंत में, दाएँ मुड़कर 50 मीटर चलता है । वह प्रारंभिक बिन्दु से कितनी दूर है ?
- (a)20 मीटर
- (b)10 मीटर
- (c)45 मीटर
- (d)30 मीटर
सही — (b), 10 मीटर। X को ग्रिड के मूल बिन्दु पर रखिए और पहली चाल को ठीक उत्तर दिशा में मान लीजिए; कौन-सी दिशा चुनी गई, इससे कोई अंतर नहीं पड़ता, क्योंकि इस प्रश्न का हर मोड़ दाहिना मोड़ है और इसलिए आकृति चाहे किसी भी दिशा से शुरू करें, वही बनती है। राज X से 80 मीटर उत्तर चलकर Y पहुँचता है, अतः Y (0, 80) पर है। वह दाएँ मुड़ता है, अब उसका मुँह पूर्व की ओर है, और 50 मीटर चलकर (50, 80) पर आता है। फिर दाएँ मुड़ता है, अब मुँह दक्षिण की ओर, और 70 मीटर चलकर (50, 10) पर आता है। तीसरी बार दाएँ मुड़ता है, अब मुँह पश्चिम की ओर, और 50 मीटर चलकर (0, 10) पर पहुँचता है। उसकी अंतिम स्थिति (0, 10) है और प्रारंभिक बिन्दु (0, 0), इसलिए वह 10 मीटर दूर है — और दोनों बिन्दु एक ही उत्तर-दक्षिण रेखा पर हैं, इसलिए वर्गमूल की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। अंकगणित के पीछे की संरचना देख लेना उपयोगी है, क्योंकि उससे बिना निर्देशांक लिए ही उत्तर स्पष्ट हो जाता है। चार चालें और तीन दाहिने मोड़ मिलकर एक ऐसा आयत बनाते हैं जो लगभग बंद हो जाता है। दोनों पार्श्व चालें 50-50 मीटर की हैं, एक पूर्व की ओर और एक पश्चिम की ओर, इसलिए वे ठीक-ठीक कट जाती हैं और पूर्व-पश्चिम विस्थापन शून्य रह जाता है। दोनों ऊर्ध्वाधर चालें 80 मीटर उत्तर और 70 मीटर दक्षिण की हैं, और वे नहीं कटतीं: उनका अंतर, 80 में से 70, दस मीटर है — और यही पूरा उत्तर है। जब भी दिशा-ज्ञान के किसी प्रश्न में चार चालें और एक ही ओर के तीन मोड़ हों, प्रारंभ से दूरी बस दोनों विपरीत जोड़ों का अंतर होती है — यहाँ आड़ा जोड़ा कट जाता है और खड़े जोड़े का अंतर 10 बचता है।
- (a)20 मीटर — यह उत्तर तब मिलता जब तीसरी चाल 70 के बजाय 60 मीटर होती — यानी यह विकल्प एक अंक ग़लत पढ़ने से बनता है। यह उस अभ्यर्थी को भी लुभाता है जो समझ तो गया है कि उत्तर लंबाइयों का अंतर है, पर ग़लत जोड़े को घटा देता है। दोनों 50-मीटर की चालें कट जाती हैं; जो अंतर बचता है वह 80 में से 70 है।
- (c)45 मीटर — चालों के किसी भी संगत पाठ से यह संख्या नहीं निकलती। यह उस अभ्यर्थी के लिए रखा गया चारा है जो रेखांकन छोड़कर बीच का कोई प्रशंसनीय-सा मान अंदाज़ लगा लेता है, और इसकी उपस्थिति याद दिलाती है कि ऋणात्मक अंकन वाले प्रश्नपत्र में इस प्रकार के प्रश्न पर अनुमान लगाना खाली छोड़ने से भी बुरा है।
- (d)30 मीटर — यह भी अंकगणितीय रूप से प्रशंसनीय पर निराधार संख्या है — यह तब बनती जब पार्श्व चालों को असमान मान लिया जाए, या 80 में से 50 घटा दिया जाए। चूँकि दोनों 50-मीटर की चालें बराबर और विपरीत हैं, अंतिम विस्थापन में उनका कोई योगदान नहीं है।
दिशा-ज्ञान के प्रश्न कहानी के भेस में निर्देशांक ज्यामिति ही हैं, और भरोसेमंद तरीका यही है कि भेस को खोल दिया जाए। प्रारंभिक बिन्दु को मूल बिन्दु मान लीजिए, एक बार तय कर लीजिए कि उत्तर किधर है, और हर चाल के बाद स्थिति को निर्देशांकों के जोड़े के रूप में लिखते चलिए। दाहिने मोड़ मुँह की दिशा को उत्तर, पूर्व, दक्षिण, पश्चिम और फिर उत्तर के क्रम में घुमाते हैं; बाएँ मोड़ उल्टे क्रम में। पूर्व और पश्चिम के विस्थापन एक अक्ष पर जोड़े-घटाए जाते हैं, उत्तर और दक्षिण के दूसरे अक्ष पर, और प्रारंभ से सीधी दूरी दोनों शुद्ध विस्थापनों का कर्ण होती है — यह पाइथागोरस वाला चरण तभी चाहिए जब दोनों शुद्ध विस्थापन शून्य से भिन्न हों। सबसे आम रचनाएँ देखते ही पहचान लेनी चाहिए: चार चालें और एक ही ओर के तीन मोड़ लगभग-आयत बनाते हैं, इसलिए उत्तर दो लंबाइयों का अंतर होता है; एक मोड़ वाला L-आकार का पथ सच्चा समकोण त्रिभुज बनाता है, जहाँ उत्तर वर्गमूल होता है और संख्याएँ लगभग हमेशा 3-4-5 या 5-12-13 त्रिक की होती हैं।
समय के दबाव में इन्हें दो अनुशासन सुरक्षित बनाते हैं। पहला यह कि चित्र बनाइए, चाहे कितना ही मोटा-मोटी क्यों न हो। हाशिये में चार रेखाओं का रेखाचित्र, जिस पर लंबाइयाँ लिखी हों, इस पूरे प्रश्न-प्रकार की सबसे आम भूल रोक देता है — मोड़ के बाद मुँह की दिशा भूल जाना, क्योंकि 'दाएँ मुड़ा' चलने वाले के सापेक्ष है, पन्ने के सापेक्ष नहीं। दूसरा यह जाँचना कि उत्तर के लिए पाइथागोरस चाहिए भी या नहीं। यहाँ नहीं चाहिए, क्योंकि पूर्व-पश्चिम विस्थापन कट जाते हैं और दोनों बिन्दु एक ही रेखा पर आ जाते हैं; जो अभ्यर्थी वर्गमूल की ओर हाथ बढ़ाता है, उसने ज्यामिति ग़लत पढ़ी है और बीस सेकंड गँवाएगा। यह भी ध्यान दीजिए कि प्रश्न पूछता क्या नहीं है। वह पूछता है कि राज प्रारंभिक बिन्दु से कितनी दूर है, यह नहीं कि किस दिशा में, और यह भी नहीं कि वह कुल कितना चला। कुल चली गई दूरी 250 मीटर है; विस्थापन 10 मीटर है; और X से दिशा ठीक उत्तर है। इस प्रकार के प्रश्नपत्र साथ वाले प्रश्न में दिशा भी पूछ लेते हैं, इसलिए आगे बढ़ने से पहले रेखाचित्र से यह पढ़ लेना उचित है।
- निर्देशांक रेखांकन, X को (0,0) और पहली चाल को उत्तर मानकर: Y (0,80) → पूर्व 50 चलकर (50,80) → दक्षिण 70 चलकर (50,10) → पश्चिम 50 चलकर (0,10)। X से दूरी = 10 मीटर।
- दाहिने मोड़ मुँह की दिशा को उत्तर → पूर्व → दक्षिण → पश्चिम → उत्तर के क्रम में घुमाते हैं; बाएँ मोड़ उल्टे क्रम में।
- दोनों 50-मीटर की चालें बराबर और विपरीत हैं, इसलिए कट जाती हैं; जो विस्थापन बचता है वह 80-मीटर और 70-मीटर की चालों का अंतर है।
- कुल चली गई दूरी 80 + 50 + 70 + 50 = 250 मीटर है, जबकि प्रारंभ से विस्थापन केवल 10 मीटर — प्रश्न दूसरा पूछता है, पहला नहीं।
- राज की अंतिम स्थिति X के ठीक उत्तर में है, इसलिए दिशा पूछने वाले साथ के प्रश्न का उत्तर 'उत्तर' होता।
वर्गमूल की कोई आवश्यकता नहीं। पूर्व और पश्चिम वाली चालें दोनों 50 मीटर की हैं और ठीक-ठीक कट जाती हैं, जिससे चलने वाला प्रारंभिक बिन्दु की उसी उत्तर-दक्षिण रेखा पर रह जाता है।
- मोड़ के बाद मुँह की दिशा खो देना। 'दाएँ मुड़ा' चलने वाले के सापेक्ष है, पन्ने के सापेक्ष नहीं, इसलिए हर मोड़ पर दिशा दोबारा निकालनी पड़ती है।
- जहाँ आवश्यकता नहीं, वहाँ पाइथागोरस की ओर हाथ बढ़ाना। यदि दोनों शुद्ध विस्थापनों में से एक शून्य है, तो उत्तर बस दूसरा वाला है।
- प्रारंभिक बिन्दु से दूरी, यानी 10 मीटर, के बजाय कुल चली गई दूरी 250 मीटर उत्तर में लिख देना।
BPSC तीन-चार तर्कशक्ति के प्रश्न सीधे सामान्य अध्ययन प्रश्नपत्र-I में ही रखता है, क्योंकि राज्य प्रारंभिक परीक्षा में अलग से कोई अभिरुचि प्रश्नपत्र नहीं है, और दिशा-ज्ञान इनमें स्थायी है — दिसंबर 2024 की 70वीं CCE के प्रश्नपत्र में लगभग ऐसी ही चार-चाल वाली यात्रा आई थी। इन पर वही एक अंक मिलता है जो बिहार भूगोल के प्रश्न पर, और समय इनमें अंश भर लगता है, जिससे ये प्रश्नपत्र के सबसे अधिक प्रतिफल वाले प्रश्न बन जाते हैं। UPSC यह सब CSAT प्रश्नपत्र-II में रखता है, जो केवल 33 प्रतिशत पर अर्हकारी है।
गौरव उत्तर की ओर 20 मीटर चलता है; फिर वह बाईं ओर मुड़ता है और 40 मीटर चलता है। वह फिर से बाईं ओर मुड़ता है और 20 मीटर चलता है और उसके बाद दाईं ओर मुड़कर 20 मीटर चलता है। वह अपनी मूल स्थिति से कितनी दूरी पर है ?
- (a) 20 मीटर
- (b) 40 मीटर
- (c) 30 मीटर
- (d) 60 मीटर
उत्तर(d) 60 मीटर
दिसंबर 2024 की 70वीं CCE के प्रश्नपत्र ने इस बैठक से तीन सप्ताह पहले यही प्रश्न-प्रकार दिया था, दाहिने के बजाय बाएँ मोड़ों के साथ और एक चाल दिशा उलटती हुई। विधि वही है — मूल बिन्दु तय कीजिए, हर मोड़ पर मुँह की दिशा दोबारा निकालिए, और हर अक्ष पर शुद्ध विस्थापन अलग-अलग जोड़िए।
एक कंपनी की चार शाखाएँ M, N, O और P पर स्थित हैं। M, N के उत्तर में 4 कि० मी० की दूरी पर है; P, O के दक्षिण में 2 कि० मी० की दूरी पर है; N, O से 1 कि० मी० दक्षिण-पूर्व में है। M और P के बीच की दूरी कि० मी० में क्या है?
- (a) 5·34
- (b) 6·74
- (c) 28·5
- (d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर(a) 5·34
उसी कौशल का 69वीं CCE वाला रूप, जिसे तिरछी दिशा — सीधी दिशा के बजाय दक्षिण-पूर्व — ने कठिन बना दिया है, ताकि दोनों शुद्ध विस्थापन शून्य से भिन्न रहें और पाइथागोरस वाला चरण सचमुच आवश्यक हो जाए। यह देखने के लिए कि वर्गमूल की ज़रूरत सचमुच कब पड़ती है, इसे इस प्रश्न के बाद हल करना उपयोगी है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
एक व्यक्ति पूर्व की ओर 30 मीटर चलता है, फिर बाएँ मुड़कर 40 मीटर चलता है। वह अपने प्रारंभिक बिन्दु से कितनी दूर है ?
- (a)50 मीटर
- (b)70 मीटर
- (c)10 मीटर
- (d)35 मीटर
उत्तर(a) 50 मीटर — दोनों चालें समकोण पर हैं, इसलिए विस्थापन 30-40 वाले समकोण त्रिभुज का कर्ण है, यानी 50। यही 3-4-5 त्रिक इन प्रश्नों में सबसे अधिक बार आता है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
एक बिन्दु से चलकर कोई व्यक्ति 25 मी० उत्तर, फिर 15 मी० पूर्व, फिर 25 मी० दक्षिण, फिर 5 मी० पश्चिम चलता है। वह प्रारंभिक बिन्दु से कितनी दूर और किस दिशा में है ?
- (a)10 मी० पूर्व
- (b)10 मी० पश्चिम
- (c)20 मी० पूर्व
- (d)5 मी० पूर्व
उत्तर(a) 10 मी० पूर्व — उत्तर और दक्षिण की 25-25 मी० की चालें ठीक-ठीक कट जाती हैं, और शुद्ध पूर्व-पश्चिम विस्थापन 15 मी० पूर्व में से 5 मी० पश्चिम घटाकर 10 मी० पूर्व बचता है।