ग्रे क्रांति किससे संबंधित है ?
- (a)तिलहन
- (b)आलू
- (c)उर्वरक
- (d)मत्स्य पालन
सही — C, उर्वरक। भारत की तथाकथित रंग-क्रांतियों की शब्दावली में ग्रे क्रांति उर्वरक के उत्पादन और उपयोग के विस्तार को कहती है — वही रासायनिक निवेश, जिसने हरित क्रांति की अधिक उपज देने वाली क़िस्मों को बोने लायक बनाया, क्योंकि गेहूँ या धान की बौनी क़िस्म पारंपरिक क़िस्म से बेहतर तभी करती है जब उसे खिलाया जाए। इस उत्तर के पक्ष में सबसे मज़बूत तर्क रंग नहीं, विकल्प-समूह है, और उसे पूरा देख लेना चाहिए, क्योंकि अंक तक पहुँचने का सबसे तेज़ रास्ता वही है। बाक़ी तीनों विकल्प पहले से किसी दूसरे रंग के हैं। तिलहन पीली क्रांति है, जो 1986 के तिलहन प्रौद्योगिकी मिशन से शुरू हुई, ताकि आयातित खाद्य तेल पर भारत की निर्भरता घटे। आलू गोल (राउंड) क्रांति है। मत्स्य पालन और जल-कृषि नीली क्रांति है, वही कार्यक्रम जिसके बल पर भारत विश्व के सबसे बड़े मछली उत्पादकों में आया। इसके बाद उर्वरक के पास दावा करने को कोई और रंग नहीं बचता, और ग्रे के पास जुड़ने को कोई और विषय नहीं। एक बात छिपाने के बजाय ईमानदारी से कह देनी चाहिए: यह रंग-पट्टी भारतीय सामान्य ज्ञान लेखन की एक परिपाटी है, भारत सरकार की कोई आधिकारिक नामावली नहीं, और कुछ रंगों के एक से अधिक अर्थ चलते हैं — ग्रे कभी-कभी, कम बार, ऊन के विकास के लिए भी बरता जाता है। चूँकि विकल्पों में ऊन है ही नहीं और बाक़ी तीनों विषय पहले ही किसी और रंग के हैं, इसलिए इस प्रश्न में उर्वरक ही एकमात्र संभव पाठ है।
- (a)तिलहन — यह पीली क्रांति है, और यह रंग याद रखना आसान है, क्योंकि सरसों और सूरजमुखी के खेत पीले होते हैं। यह 1986 में तिलहन प्रौद्योगिकी मिशन बनने के बाद तिलहन उत्पादन में आई तेज़ बढ़त को कहती है, जिससे एक दशक तक भारत का खाद्य तेल आयात-बिल घटा, फिर माँग उससे आगे निकल गई।
- (b)आलू — यह गोल (राउंड) क्रांति है, जिसका नाम किसी रंग से नहीं, कंद के आकार से पड़ा — और ठीक इसीलिए वह भूलने में आसान है और भ्रमकारी विकल्प के रूप में बोने में भी आसान। पूरी सूची में उसका उल्लेख सबसे कम होता है, और वह यहाँ चौथी जगह भरने के लिए है।
- (d)मत्स्य पालन — यह नीली क्रांति है — अंतर्देशीय तथा समुद्री मछली उत्पादन और जल-कृषि की वृद्धि, जिसे हाल के वर्षों में प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के रास्ते आगे बढ़ाया गया है। यह रंग इतना सहज है कि जिस अभ्यर्थी को इस सूची की एक ही प्रविष्टि याद हो, उसे प्रायः यही याद होती है — और इसीलिए यहाँ अनुमान के तौर पर यह कमज़ोर चुनाव है।
रंग-क्रांतियाँ 1960 के दशक से आगे भारतीय कृषि में हुए क्षेत्रवार रूपांतरणों का संक्षिप्त नाम हैं। हरित क्रांति इन सबकी जननी है: 1960 के दशक के मध्य से गेहूँ और धान की अधिक उपज देने वाली अर्ध-बौनी क़िस्मों ने, सुनिश्चित सिंचाई, रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों के साथ मिलकर, भारत के खाद्यान्न उत्पादन को पुरानी क़िल्लत से बाहर निकाला — और सबसे नाटकीय रूप से पंजाब, हरियाणा तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में। हर दूसरा रंग किसी एक जिंस में हुई इसी प्रकार की बढ़त बताता है। श्वेत क्रांति, यानी ऑपरेशन फ़्लड, 1970 से वर्गीज़ कुरियन और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के नेतृत्व में आनंद के सहकारी प्रतिरूप पर चली और भारत को विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक बनाया। नीली क्रांति ने वही मछली के लिए किया, पीली ने तिलहन के लिए, स्वर्ण ने बाग़वानी और शहद के लिए, रजत ने अंडे तथा कुक्कुट के लिए, गुलाबी ने प्याज़ और झींगे के लिए, और ग्रे ने उर्वरक के लिए। यह समूह आधिकारिक कार्यक्रम-नामों की सूची नहीं, पढ़ाने का एक उपकरण है, पर परीक्षा में उसे सूची की तरह ही पूछा जाता है — इसलिए उसे सूची की तरह ही याद करना पड़ता है।
दो आदतें इन प्रश्नों को तेज़ बना देती हैं। पहली, जो रंग पूछा गया है उसे याद करने की कोशिश करने के बजाय बाक़ी को काटकर उत्तर तक पहुँचिए: चार विकल्पों वाले ऐसे समूह में प्रायः तीन विकल्प उन रंगों के होते हैं जो आपको पहले से पता हैं, और चौथा अपने आप उत्तर बन जाता है। यहाँ यह ग्रे का अर्थ स्वतंत्र रूप से जाने बिना भी काम कर जाता है। दूसरी, सूची को इस आधार पर समूहबद्ध कीजिए कि रंग चुना कैसे गया, क्योंकि उसी से वह याद रहता है — कुछ रंग शाब्दिक हैं (दूध के लिए सफ़ेद, पानी के लिए नीला, सरसों के खेतों के लिए पीला, मांस और टमाटर के लिए लाल), कुछ आकार या उत्पाद से जुड़े हैं (आलू के लिए गोल, जूट के लिए स्वर्ण रेशा, कपास के लिए रजत रेशा), और ग्रे उन अमूर्त रंगों में से है, जो किसी फ़सल की दिखावट से नहीं, उर्वरक के रंग से लिया गया है। अंत में इस विशेष रंग के पीछे की असली बात देखिए: हरित क्रांति ग्रे क्रांति पर निर्भर थी। अधिक उपज वाली क़िस्में अपनी बनावट में ही उर्वरक-प्रतिक्रियाशील हैं, और इसीलिए भारत की उर्वरक खपत, घरेलू यूरिया क्षमता और उर्वरक सब्सिडी, तीनों खाद्यान्न उत्पादन के साथ-साथ बढ़ीं — और इसीलिए वह सब्सिडी आज भी संघीय बजट की सबसे बड़ी एकल मदों में है।
- आम तौर पर पढ़ाई जाने वाली रंग-पट्टी: हरित — खाद्यान्न; श्वेत (ऑपरेशन फ़्लड) — दूध; नीली — मत्स्य पालन; पीली — तिलहन; ग्रे — उर्वरक; गोल — आलू; स्वर्ण — बाग़वानी और शहद; स्वर्ण रेशा — जूट; रजत — अंडे और कुक्कुट; रजत रेशा — कपास; गुलाबी — प्याज़ और झींगा; लाल — मांस और टमाटर; काली — पेट्रोलियम।
- पीली क्रांति 1986 में बने तिलहन प्रौद्योगिकी मिशन के बाद आई; श्वेत क्रांति 1970 से चला ऑपरेशन फ़्लड थी, जिसका नेतृत्व वर्गीज़ कुरियन ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के माध्यम से आनंद के सहकारी प्रतिरूप पर किया।
- अधिक उपज देने वाली अर्ध-बौनी क़िस्में अपनी बनावट में ही उर्वरक-प्रतिक्रियाशील हैं, इसलिए उर्वरक आपूर्ति के समानांतर विस्तार के बिना हरित क्रांति चल ही नहीं सकती थी — और उसी विस्तार का नाम ग्रे क्रांति है।
- यह रंग-पट्टी भारतीय सामान्य ज्ञान लेखन की परिपाटी है, भारत सरकार की आधिकारिक नामावली नहीं, और कुछ रंगों के एक से अधिक अर्थ चलते हैं — ग्रे कभी-कभी ऊन के लिए भी बरता जाता है।
- बिहार का अपना उर्वरक-नाता बेगूसराय ज़िले का बरौनी है, जहाँ सार्वजनिक क्षेत्र में बना यूरिया संयंत्र बंद हुआ और बाद में पुनर्जीवित किया गया, और जो ऐसे राज्य को आपूर्ति देता है जिसकी खेती छोटी जोतों से चलती है।
ईमानदारी से कहें तो: यह रंग-पट्टी भारतीय सामान्य ज्ञान लेखन की परिपाटी है, भारत सरकार की आधिकारिक नामावली नहीं, और ग्रे कभी-कभी ऊन के लिए भी बरता जाता है। ऊन विकल्पों में है ही नहीं, और बाक़ी तीनों विषय पहले से किसी और रंग के हैं, इसलिए यह प्रश्न केवल उर्वरक वाला पाठ ही स्वीकार करता है।
- पूछे गए रंग को याद करने की कोशिश करना, बजाय बाक़ी को काटने के। ऐसे समूह में चार में से तीन विकल्प सामान्यतः उन्हीं रंगों के होते हैं जो आपको पहले से पता हैं।
- यह मान लेना कि यह रंग-पट्टी आधिकारिक है। यह परीक्षा-लेखन की परिपाटी है, और कुछ रंगों के एक से अधिक अर्थ हैं — इसीलिए निर्णय विकल्प-समूह को ही करना पड़ता है।
- गोल क्रांति को स्वर्ण क्रांति से गड्डमड्ड कर देना। गोल आलू है; स्वर्ण बाग़वानी, फल और शहद है।
BPSC रंग-क्रांतियाँ लगभग हर चक्र में पूछता है, प्रायः एक रंग और उसके नीचे चार जिंसों के रूप में, और उस अभ्यर्थी को पुरस्कृत करता है जिसने पूरी पट्टी याद कर रखी हो। UPSC इस सूची से पूरी तरह हट चुका है और उसकी जगह उन्हीं अंतर्निहित कार्यक्रमों के बारे में पूछता है — ऑपरेशन फ़्लड ने क्या किया, पोषक-तत्व आधारित सब्सिडी किसलिए है, नीम-लेपित यूरिया अनिवार्य क्यों किया गया — इसलिए वही सामग्री शब्दावली के रूप में नहीं, नीति के रूप में जाननी पड़ती है।
भारत सरकार कृषि में 'नीम-लेपित यूरिया' के प्रयोग को बढ़ावा क्यों देती है ?
- (a) मिट्टी में नीम तेल के निकलने से मृदा सूक्ष्मजीवों द्वारा नाइट्रोजन स्थिरीकरण बढ़ता है
- (b) नीम का लेप मिट्टी में यूरिया के घुलने की दर धीमी कर देता है
- (c) फ़सल के खेतों से ग्रीनहाउस गैस नाइट्रस ऑक्साइड वायुमंडल में बिलकुल नहीं निकलती
- (d) यह विशेष फ़सलों के लिए खरपतवारनाशी और उर्वरक का संयोजन है
उत्तर(b) नीम का लेप मिट्टी में यूरिया के घुलने की दर धीमी कर देता है
वही विषय, शब्दावली के बजाय नीति के रूप में पूछा गया। जहाँ BPSC चाहता है कि रंग उर्वरक से जोड़ा जाए, वहाँ UPSC जानना चाहता है कि भारत उर्वरक उपयोग का प्रबंध असल में कैसे करता है — नीम का लेप यूरिया के घुलने की गति धीमी करता है, जिससे अधिक नाइट्रोजन फ़सल तक पहुँचती है और कम मात्रा औद्योगिक उपयोग की ओर मुड़ती है।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारत में श्वेत क्रांति किससे संबंधित है ?
- (a)कपास उत्पादन
- (b)दुग्ध उत्पादन
- (c)नमक उत्पादन
- (d)कुक्कुट उत्पादन
उत्तर(b) दुग्ध उत्पादन — 1970 से चला ऑपरेशन फ़्लड, जिसका नेतृत्व वर्गीज़ कुरियन ने राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के माध्यम से किया, जो आनंद के सहकारी प्रतिरूप पर खड़ा हुआ और जिसने भारत को विश्व का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक बनाया। कुक्कुट और अंडे रजत क्रांति हैं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारत में पीली क्रांति किसके उत्पादन में आई तेज़ वृद्धि को कहती है ?
- (a)मक्का
- (b)तिलहन
- (c)हल्दी
- (d)स्वर्ण भंडार
उत्तर(b) तिलहन — जिसे 1986 में बने तिलहन प्रौद्योगिकी मिशन ने आगे बढ़ाया, और जिसका उद्देश्य आयातित खाद्य तेल पर भारत की निर्भरता घटाना था।