एक पंक्ति में 15 कुर्सियाँ हैं । P का स्थान मध्य में है, और दाईं ओर से गिनती करने पर Q 12 वें स्थान पर है । P और Q के बीच कितनी कुर्सियाँ हैं ?
- (a)3
- (b)2
- (c)5
- (d)4
सही — (a) 3। कुर्सियों को बाईं ओर से 1 से 15 तक संख्या दे दीजिए और कुछ भी गिनने से पहले दोनों व्यक्तियों को उनकी जगह पर बिठा दीजिए। P मध्य में है। कुर्सियों की संख्या विषम हो तो मध्य ठीक-ठीक निकलता है : 15 कुर्सियों के लिए वह आठवीं है, क्योंकि (15 + 1) ÷ 2 = 8, और उस स्थान के दोनों ओर सात-सात कुर्सियाँ हैं — 'मध्य' का अर्थ यही है। Q दाईं ओर से गिनने पर बारहवें स्थान पर है, और दोनों स्थानों की तुलना करने के लिए उन्हें एक ही छोर से नापा जाना चाहिए। बदलने का नियम यह है कि किसी वस्तु का बाएँ से स्थान तथा उसी वस्तु का दाएँ से स्थान जोड़ने पर सदा कुल से एक अधिक बनता है, इसलिए बाएँ से स्थान = 15 − 12 + 1 = 4। अतः Q चौथी कुर्सी पर बैठा है और P आठवीं पर। अब गिनिए कि ठीक इनके बीच क्या है : कुर्सियाँ 5, 6 तथा 7 — तीन कुर्सियाँ। सूत्र के रूप में लिखें तो दो स्थानों के ठीक बीच पड़ने वाली वस्तुओं की संख्या अन्तर में से एक घटाने पर मिलती है, अर्थात् 8 − 4 − 1 = 3। प्रश्न पूछ रहा है कि P और Q के 'बीच' कितनी कुर्सियाँ हैं, और 'बीच' उन दो कुर्सियों को बाहर रखता है जिन पर वे स्वयं बैठे हैं — पूरा प्रश्न इसी एक बिन्दु पर घूमता है। यहाँ का हर ग़लत विकल्प किसी एक पहचानी जा सकने वाली चूक से आता है, और हर एक को पहचान लेना लाभ का सौदा है : 4 केवल अन्तर 8 − 4 है, जो एक सिरा गिन लेता है; 5 चौथी से आठवीं कुर्सी तक की समावेशी गिनती है, जो दोनों सिरे गिन लेती है; और 2 तब आता है जब 15 का मध्य आठवीं के बजाय सातवीं कुर्सी मान लिया जाए। छपाई के बारे में एक बात : हिन्दी पृष्ठ पर क्रमसूचक '12 वें' अंक तथा प्रत्यय के बीच एक ख़ाली स्थान छोड़कर छपा है। अर्थ इससे कुछ नहीं बदलता।
- (b)2 — यह ग़लत गिनती से नहीं, P को ग़लत जगह बिठाने से आता है। यदि 15 कुर्सियों का मध्य सातवीं मान लिया जाए — 15 को आधा करके भिन्न गिरा देने से — तो उसके तथा चौथी कुर्सी के बीच केवल 5 तथा 6 पड़ती हैं, अर्थात् 2। पर 15 विषम है, इसलिए मध्य ठीक-ठीक निकलता है और वह आठवीं कुर्सी है, जिसके दोनों ओर सात-सात कुर्सियाँ हैं; सातवीं के एक ओर छह और दूसरी ओर आठ होंगी।
- (c)5 — यह समावेशी गिनती है। कुर्सियाँ 4, 5, 6, 7 तथा 8 मिलकर पाँच बनती हैं, पर उस परास में वे स्थान भी सम्मिलित हैं जिन पर P तथा Q बैठे हैं। 'बीच' उन कुर्सियों को माँगता है जो ठीक अन्तराल में हों, इसलिए दोनों सिरे छोड़ देने चाहिए। यह उस अभ्यर्थी का उत्तर है जो दोनों व्यक्तियों को सही जगह बिठा लेता है और फिर ग़लत परास गिन लेता है।
- (d)4 — यह दोनों स्थानों का सादा अन्तर है, 8 − 4, जो एक सिरा अधिक गिन लेता है — इसमें या तो चौथी कुर्सी सम्मिलित है या आठवीं, दोनों नहीं। ठीक इसी प्रकार की एक-से-चूक वाली भूलें पकड़ने के लिए ये प्रश्न बनाए जाते हैं, और बचाव यह है कि घटाने के बजाय बीच की संख्याएँ लिखकर देख ली जाएँ।
रैखिक स्थान वाले प्रश्न तीन छोटे नियमों से चलते हैं, और इस प्रकार की लगभग हर मद उन्हीं में से किसी एक का भेस है। पहला, रूपान्तरण का नियम : पंक्ति में n वस्तुएँ हों तो किसी वस्तु का एक छोर से स्थान जमा दूसरे छोर से स्थान n + 1 के बराबर होता है, इसलिए बाएँ से स्थान = n − दाएँ से स्थान + 1। दूसरा, मध्य का नियम : n विषम हो तो मध्य स्थान (n + 1) ÷ 2 होता है और वह अद्वितीय होता है, और n सम हो तो कोई एक मध्य होता ही नहीं — दो केन्द्रीय स्थान n ÷ 2 तथा n ÷ 2 + 1 होते हैं, और यही कारण है कि परीक्षक ये पहेलियाँ विषम कुल के साथ बनाते हैं। तीसरा, अन्तराल का नियम : स्थान a तथा b के ठीक बीच पड़ने वाली वस्तुओं की संख्या अन्तर में से एक कम होती है, जबकि a से b तक समावेशी संख्या अन्तर में एक जोड़ने पर मिलती है। ये दोनों आपस में दो का अन्तर रखते हैं, और इस जैसे प्रश्न के चारों विकल्प प्रायः इस तरह बनाए जाते हैं कि तीनों गिनतियाँ उन्हीं में कहीं मौजूद हों। इससे जुड़ा एक और कुल यही रूपान्तरण उल्टी दिशा में काम में लाता है : किसी व्यक्ति के दोनों छोरों से स्थान दिए हों तो कुल संख्या दोनों स्थानों के योग में से एक घटाने पर मिलती है।
जो आदत इन प्रश्नों को मुफ़्त बना देती है वह यह है कि प्रश्न दोबारा पढ़ने से पहले ही सब कुछ एक ही सन्दर्भ-छोर पर बदल लिया जाए। यहाँ इसका अर्थ है 'दाएँ से बारहवाँ' को तत्काल 'बाएँ से चौथा' बना देना, ताकि दोनों व्यक्ति एक ही पैमाने पर आ जाएँ, और उसके बाद ही यह पूछा जाए कि गिनना क्या है। दूसरी आदत है गिनती वाला शब्द ध्यान से पढ़ना : 'बीच' दोनों सिरों को बाहर रखता है, 'A से B तक' दोनों को भीतर लेता है, और 'A के बाद B तक' एक को। चार विकल्पों वाले प्रश्न में परीक्षक प्रायः तीनों उत्तर पहले से रख देता है, इसलिए जो अभ्यर्थी गणित ठीक करता है पर गिनती वाला शब्द लापरवाही से पढ़ता है, उसे अपनी ग़लत संख्या पृष्ठ पर प्रतीक्षा करती मिल जाएगी — यहाँ 4 तथा 5 ठीक यही कर रहे हैं। तीसरी आदत, पन्द्रह या उससे कम स्थानों वाले किसी भी प्रश्न में, बस संख्याएँ लिख डालना है। पन्द्रह कुर्सियाँ कुछ ही सेकण्ड में पन्द्रह डैश की तरह खींची जा सकती हैं, उन पर P तथा Q अंकित किए जा सकते हैं, और उत्तर सीधे पढ़ लिया जा सकता है — बिना किसी सूत्र के और बिना एक-से-चूक की कोई सम्भावना छोड़े। सूत्र तब के लिए हैं जब संख्याएँ खींचने लायक़ न रह जाएँ।
- पंक्ति में n वस्तुओं के लिए, बाएँ से स्थान + दाएँ से स्थान = n + 1; यहाँ 15 − 12 + 1 से Q चौथी कुर्सी पर आता है
- n विषम हो तो मध्य स्थान (n + 1) ÷ 2 होता है, इसलिए 15 कुर्सियों का मध्य आठवीं है, जिसके दोनों ओर सात-सात कुर्सियाँ हैं
- स्थान a तथा b के ठीक बीच पड़ने वाली वस्तुओं की संख्या |a − b| − 1 होती है; यहाँ 8 − 4 − 1 = 3
- a से b तक की समावेशी गिनती |a − b| + 1 होती है, जो यहाँ 5 है — 'बीच' वाली गिनती से दो अधिक, और विकल्प (c) के रूप में रखी हुई
- स्थानों की संख्या सम हो तो कोई एक मध्य होता ही नहीं, और यही कारण है कि इस प्रकार की पहेलियाँ लगभग सदा विषम कुल के साथ बनाई जाती हैं; सम n के लिए दो केन्द्रीय स्थान n ÷ 2 तथा n ÷ 2 + 1 होते हैं
- आठवीं कुर्सी पर बैठा P बाएँ से भी आठवाँ है और दाएँ से भी आठवाँ, और यही वह जाँच है जो पुष्टि करती है कि 15 की पंक्ति का मध्य सचमुच वही है
- उल्टी दिशा में चलाने पर यही नियम दो स्थानों से कुल संख्या दे देता है : कोई व्यक्ति एक छोर से pवाँ और दूसरे छोर से qवाँ हो तो पंक्ति में p + q − 1 लोग होंगे, क्योंकि अन्यथा वह व्यक्ति दो बार गिना जाता
- अभ्यर्थी जो तीनों गिनतियाँ कर सकता है, वे तीनों विकल्पों में मौजूद हैं — ठीक बीच वाली 3, सादे अन्तर वाली 4 और दोनों सिरे सहित वाली 5 — इसलिए सही गणना भी ग़लत गिनती-शब्द के साथ पढ़ी जाए तो पृष्ठ पर अपना ग़लत उत्तर पा ही लेती है
उत्तर 3, विकल्प (a)। हर ग़लत विकल्प एक विशिष्ट चूक है : मध्य के लिए कुर्सी 7, या ठीक-बीच वाली गिनती की जगह समावेशी गिनती।
- 'बीच' को समावेशी पढ़ लेना; जिन कुर्सियों पर P तथा Q बैठे हैं वे उनके बीच नहीं हैं
- 15 का मध्य आधा करके नीचे गिराकर सातवीं कुर्सी मान लेना; विषम कुल के लिए मध्य (n + 1) ÷ 2 होता है
- दाएँ से स्थान को केवल घटाकर बदल देना — वह n − k + 1 है, n − k नहीं, और वही छूटा हुआ 1 उत्कृष्ट एक-से-चूक है
BPSC हर प्रश्नपत्र में ऐसी एक-दो मदें छोटे अंकगणितीय-तर्क प्रश्नों के रूप में रखता है, छोटी संख्याओं के साथ, इसलिए जिसने तीनों नियम रटे-गढ़े हैं उसके लिए ये उपलब्ध सबसे सस्ते अंक हैं। 2025 का 71वीं CCE का प्रश्नपत्र वही रूपान्तरण कक्षा-रैंक के भेस में पूछता है। UPSC नंगे स्थान-अंकगणित से काफ़ी आगे बढ़कर शर्त-आधारित बैठक-पहेलियों पर चला गया है, जहाँ एक साथ कई प्रतिबन्ध सन्तुष्ट करने पड़ते हैं और स्थान निकालना केवल अन्तिम चरण होता है।
छह व्यक्ति A, B, C, D, E तथा F एक पंक्ति में खड़े हैं। C तथा D एक-दूसरे के पास E के साथ खड़े हैं। B केवल A के बग़ल में खड़ा है। A, F से चौथा है। सिरों पर कौन खड़े हैं ?
- (a) A तथा F
- (b) B तथा D
- (c) B तथा F
- (d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
उत्तर(c) B तथा F
वही रैखिक पंक्ति, पर जहाँ स्थान दिए नहीं गए, पड़ोस की शर्तों से निकालने हैं। ध्यान दीजिए कि 'A, F से चौथा है' उसी समावेशी-बनाम-अपवर्जी वाले ख़तरे को ढोता है जो BPSC वाले प्रश्न को तय करता है।
सात व्यक्ति A, B, C, D, E, F तथा G इसी क्रम में एक क़तार में खड़े हैं। हर एक ने अलग-अलग रंग की टोपी पहनी है — बैंगनी, जामुनी, नीली, हरी, पीली, नारंगी तथा लाल। D अपने सामने हरी तथा नीली देख सकता है, बैंगनी नहीं। E बैंगनी तथा पीली देख सकता है, लाल नहीं। G नारंगी को छोड़कर सभी रंगों की टोपियाँ देख सकता है। यदि E ने जामुनी रंग की टोपी पहनी है, तो F की टोपी का रंग है
- (a) नीला
- (b) बैंगनी
- (c) लाल
- (d) नारंगी
उत्तर(c) लाल
यह दिखाता है कि यह विषय कठिन छोर पर कहाँ जाता है — वही संख्यांकित स्थानों की पंक्ति, पर हर सूत्र दृष्टि-रेखा के रूप में दिया गया है, इसलिए कुछ भी गिनने से पहले स्थान फिर से बनाने पड़ते हैं।
39 विद्यार्थियों की कक्षा में नितिन जोगिन्द्र से 7 रैंक (श्रेणी) आगे है। यदि जोगिन्द्र का रैंक अंतिम से 17 वाँ है तो नितिन का रैंक आरम्भ से कितना है ?
- (a) 17 वाँ
- (b) 15 वाँ
- (c) 18 वाँ
- (d) 16 वाँ
उत्तर(d) 16 वाँ
2025 के 71वीं CCE के प्रश्नपत्र ने ठीक यही रूपान्तरण रैंक के भेस में काम में लिया : 39 − 17 + 1 से जोगिन्द्र आरम्भ से 23वें पर आता है, और उससे सात आगे नितिन 16वें पर। n − k + 1 वाला नियम ही दोनों प्रश्नों का पूरा सार है।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
25 विद्यार्थियों की पंक्ति में रवि बाएँ से नौवें स्थान पर है और सुनील दाएँ से ग्यारहवें स्थान पर। उनके बीच कितने विद्यार्थी हैं ?
- (a)5
- (b)6
- (c)7
- (d)8
उत्तर(a) 5 — सुनील का बाएँ से स्थान 25 − 11 + 1 = 15 है, और स्थान 9 तथा 15 के ठीक बीच वे विद्यार्थी हैं जो 10, 11, 12, 13 तथा 14 पर हैं।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
किसी क़तार में एक लड़का आगे से बारहवें और पीछे से अठारहवें स्थान पर है। क़तार में कुल कितने लोग हैं ?
- (a)28
- (b)29
- (c)30
- (d)31
उत्तर(b) 29 — दोनों स्थान जोड़ने पर कुल से एक अधिक बनता है, इसलिए कुल 12 + 18 − 1 = 29 है; एक घटाए बिना जोड़ देने पर वह लड़का दो बार गिन लिया जाता है।