यदि C, B का भाई है, B, A का पुत्र है, D, C का पिता है और A महिला है, तो A है
- (a)D की पत्नी
- (b)D की माता
- (c)D का पति
- (d)D की बहन
सही — (a) D की पत्नी। चारों कथनों को उस क्रम में लीजिए जिसमें वंश-वृक्ष बनता है, उस क्रम में नहीं जिसमें वे छपे हैं। 'B, A का पुत्र है' से A, B से एक पीढ़ी ऊपर बैठ जाता है और B पुरुष निश्चित हो जाता है। 'C, B का भाई है' से C, B की ही पीढ़ी में आ जाता है और पुरुष निश्चित हो जाता है; इन पहेलियों में भाई का अर्थ सगा भाई होता है, इसलिए C तथा B के माता-पिता एक ही हैं — अर्थात् A, C का भी जनक है। 'D, C का पिता है' से D, C से एक पीढ़ी ऊपर, अर्थात् A की ही पीढ़ी में आता है और पुरुष निश्चित होता है। अब अन्तिम सूत्र अपना काम करता है : 'A महिला है'। A, C का जनक है और महिला है, इसलिए A, C की माता है। D उसी सन्तान का पिता है। जिस परम्परा पर ये पहेलियाँ लिखी जाती हैं, उसमें एक ही सन्तान के माता तथा पिता पति-पत्नी होते हैं — इसलिए A, D की पत्नी है। इस रचना के बारे में दो बातें देखने योग्य हैं। पहली, 'A महिला है' कोई सजावट नहीं है; उसके बिना A तथा D का सम्बन्ध तो निश्चित हो जाता, पर उसके लिए शब्द निश्चित नहीं होता, क्योंकि C के जनक को D के साथ जोड़कर पत्नी भी कहा जा सकता था और पति भी। प्रश्नपत्र दोनों पाठ (a) तथा (c) के रूप में ठीक इसलिए देता है कि जो अभ्यर्थी ढाँचा हल कर लेता है और फिर लिंग वाली पंक्ति की उपेक्षा कर देता है, वह दण्डित हो। दूसरी, पूरी शृंखला भाई वाली कड़ी से होकर जाती है। यदि C, B का भाई न होता तो A का D से कोई सम्बन्ध जुड़ता ही नहीं — A केवल B की माता रह जाती और D एक असम्बद्ध पिता — और प्रश्न का कोई उत्तर ही न होता। वही एक शब्द 'भाई' परिवार के दोनों आधे हिस्सों को जोड़कर वेल्ड कर देता है, और उसे पढ़े बिना आगे बढ़ जाना ही अंक गँवाने का सबसे आम तरीक़ा है।
- (b)D की माता — यह A को D से एक पीढ़ी ऊपर बिठा देता है, जबकि शृंखला दोनों को एक ही पीढ़ी में रखती है — दोनों C के जनक हैं। जाँचिए तो यह टूट जाता है : यदि A, D की माता होती तो D का पुत्र C, A का पोता होता, जबकि B, A का अपना पुत्र है — इस प्रकार B, C का भाई नहीं, चाचा होता, जो पहले कथन का खण्डन है।
- (c)D का पति — सम्बन्ध ठीक पकड़ता है, लिंग चूक जाता है। A, D का जीवनसाथी है, पर प्रश्न स्पष्ट शब्दों में कहता है कि A महिला है, इसलिए जो शब्द चाहिए वह 'पत्नी' है। यह विकल्प उस अभ्यर्थी के लिए है जो वंश-वृक्ष ठीक हल कर लेता है और फिर अन्तिम उपवाक्य पढ़े बिना उत्तर दे देता है — और वह उपवाक्य रखा ही इसीलिए गया है।
- (d)D की बहन — यह A को C का जनक नहीं, उसकी बुआ बना देता है। पर A को C का जनक होना ही है, क्योंकि C, B का भाई है और B, A का पुत्र है। एक ही व्यक्ति एक साथ C की माता और C के पिता की बहन नहीं हो सकती, इसलिए यह विकल्प भाई वाली कड़ी का खण्डन करता है।
रक्त-सम्बन्ध वाले प्रश्न वाक्यों में तर्क करके नहीं, आरेख बनाकर हल होते हैं, क्योंकि वाक्य ऐसे ही लिखे जाते हैं कि उन्हें सिर में सँभालना कठिन हो। मानक संकेत-पद्धति छोटी है : हर पीढ़ी को अपने अलग क्षैतिज स्तर पर रखिए, विवाहित युग्म को दोहरी रेखा से जोड़िए, युग्म से उनकी सन्तानों तक एक खड़ी रेखा उतारिए, और लिंग को धन-ऋण चिह्न से, या वृत्त-वर्ग से, अंकित कीजिए — जो भी एक-सा चले। फिर कोई निष्कर्ष निकालने से पहले हर सूत्र को आरेख पर एक निशान में बदल दीजिए। कुछ पदबन्ध एक साथ दो सूचनाएँ ढोते हैं और उन्हें दो के रूप में ही दर्ज करना चाहिए : 'का पुत्र' पीढ़ी का अन्तर भी तय करता है और लिंग भी, 'का भाई' साझा पीढ़ी भी तय करता है और लिंग भी, तथा 'का पिता' पीढ़ी का अन्तर, लिंग, और यदि माता ज्ञात हो तो एक विवाह भी तय करता है। दो परम्पराएँ इन पहेलियों को निर्णेय बनाती हैं और जब तक प्रश्न कुछ और न कहे तब तक सदा मान ली जाती हैं : भाई-बहन के माता-पिता एक ही होते हैं, अर्थात् कोई सौतेला भाई या सौतेला माता-पिता नहीं; और किसी सन्तान के दोनों जनक पति-पत्नी होते हैं। जहाँ परीक्षक कोई परम्परा तोड़ना चाहता है, वहाँ प्रश्न स्वयं कह देता है, और जहाँ आँकड़े सचमुच कम पड़ जाते हैं वहाँ प्रश्नपत्र स्पष्ट रूप से 'निर्धारित नहीं किया जा सकता' वाला विकल्प देते हैं — UPSC ने वह विकल्प एक से अधिक बार सही रखा है।
काम का किफ़ायती क्रम यह है : पहले पीढ़ियाँ, फिर लिंग, अन्त में शब्द। किसी सम्बन्ध को नाम देने से पहले स्तर खींच लीजिए और सबको उन पर बिठा दीजिए, क्योंकि जल्दी दिया गया नाम आगे ढो लिया जाता है और शेष वृक्ष को बिगाड़ देता है। यहाँ रेखाचित्र दो स्तरों का है — ऊपरी स्तर पर A तथा D, निचले पर B तथा C — और उसे लगभग पन्द्रह सेकण्ड में बनाया जा सकता है। फिर लिंग वाले सूत्र जाँचिए, जो तीन हैं : B पुत्र है, C भाई है, D पिता है, और A के बारे में कहा गया है कि वह महिला है। उसके बाद ही विकल्पों पर जाइए, और हर विकल्प को आरेख के बारे में किए गए दावे की तरह पढ़िए। यहाँ चार में से दो केवल पीढ़ी के आधार पर मारे जा सकते हैं, क्योंकि 'D की माता' तथा 'D की बहन' A को उस स्तर से हटा देंगे जिस पर आरेख ने उसे रखा है, और बची हुई जोड़ी में भेद केवल लिंग का है, जिसे प्रश्न पहले ही तय कर चुका है। इन प्रश्नों का सामान्य आकार यही है : आधे विकल्प ढाँचे पर गिरते हैं और आधे एक ही शब्द पर, इसलिए जो अभ्यर्थी इन दो जाँचों को अलग-अलग करता है उसे कभी अनुमान नहीं लगाना पड़ता।
- 'B, A का पुत्र है' एक साथ दो बातें तय करता है — A, B से एक पीढ़ी ऊपर है, और B पुरुष है
- 'C, B का भाई है' C को B की पीढ़ी में रखता है और सगे भाई-बहन वाली मानक परम्परा पर A को C का भी जनक बना देता है
- 'D, C का पिता है' D को A की पीढ़ी में रखता है और उसे पुरुष बनाता है; एक ही सन्तान के माता तथा पिता को पति-पत्नी माना जाता है
- 'A महिला है' वाला सूत्र वृक्ष के ढाँचे पर कोई असर नहीं डालता — वह केवल यह तय करता है कि A की जगह के लिए शब्द 'पत्नी' होगा या 'पति'
- भार उठाने वाला कथन भाई वाली कड़ी है : 'C, B का भाई है' हटा दीजिए तो A तथा D के बीच कोई सम्बन्ध ही नहीं बचता और प्रश्न अनुत्तरणीय हो जाता है
- पूरा वृक्ष दो स्तरों का है : जनकों के स्तर पर A तथा D, सन्तानों के स्तर पर B तथा C, जिसमें A और D युग्म के रूप में जुड़े हैं और दोनों सन्तानें उसी युग्म से लटकती हैं
- जब तक प्रश्न कुछ और न कहे तब तक दो परम्पराएँ सदा मानी जाती हैं — भाई-बहन के माता-पिता एक ही होते हैं, अर्थात् कोई सौतेला भाई या सौतेला माता-पिता नहीं, और किसी सन्तान के दोनों जनक पति-पत्नी होते हैं; इनके बिना इस प्रकार की लगभग कोई पहेली तय ही नहीं हो सकती
- विकल्प (a) तथा (c) वृक्ष में एक ही जगह का वर्णन करते हैं और केवल उस जगह पर बैठे व्यक्ति के लिंग में भिन्न हैं — यही कारण है कि प्रश्न को यह कहने की ज़रूरत पड़ी कि A महिला है
रेखांकित पंक्तियाँ ही दोनों काम ढोती हैं : भाई वाला सूत्र परिवार के A वाले आधे हिस्से को D वाले हिस्से से जोड़ता है, और लिंग वाला सूत्र एक ही जगह के दो शब्दों में से एक चुन देता है।
- ढाँचा हल कर लेने के बाद लिंग वाला सूत्र अनदेखा कर देना — 'D की पत्नी' तथा 'D का पति' एक ही जगह का वर्णन करते हैं और उन्हें केवल कथित लिंग अलग करता है
- यह चूक जाना कि 'भाई' A को C का भी जनक बना देता है; उस क़दम के बिना A तथा D का कोई सम्बन्ध ही नहीं बनता
- ऐसी सम्भावनाएँ ले आना जिन्हें ये परम्पराएँ बाहर रखती हैं, जैसे सौतेले भाई-बहन या सौतेले माता-पिता, जिनसे इस प्रकार की लगभग हर पहेली अनुत्तरणीय हो जाएगी
BPSC इन्हें छोटा रखता है — चार उपवाक्य, एक प्रश्न, कोई आरेख नहीं — इसलिए अंक उसी को मिलता है जो सेकण्डों में वृक्ष बना ले और फिर अन्तिम उपवाक्य ध्यान से पढ़े। 2025 का 71वीं CCE का प्रश्नपत्र उसका दूसरा प्रिय प्रारूप दिखाता है : एक ही उद्धृत वाक्य, जिसमें सम्बन्धों की शृंखला खोलनी पड़ती है। UPSC कहीं बड़ी पारिवारिक जालियाँ बनाता है, छह-सात लोग जिनके साथ व्यवसाय तथा वैवाहिक स्थिति भी जुड़ी होती है, और प्रायः उनका उत्तर 'निर्धारित नहीं किया जा सकता' रखता है।
छह व्यक्तियों A, B, C, D, E तथा F का एक परिवार है। परिवार में दो विवाहित युग्म हैं। परिवार के सदस्य हैं — वकील, अध्यापक, विक्रेता, अभियन्ता, लेखाकार तथा डॉक्टर। विक्रेता D का विवाह महिला अध्यापक से हुआ है। डॉक्टर का विवाह वकील से हुआ है। लेखाकार F, B का पुत्र तथा E का भाई है। वकील C, A की पुत्रवधू है। E अविवाहित अभियन्ता है। A, F की दादी है। E का F से क्या सम्बन्ध है ?
- (a) भाई
- (b) बहन
- (c) पिता
- (d) निर्धारित नहीं किया जा सकता
उत्तर(d) निर्धारित नहीं किया जा सकता
इस प्रश्न का ठीक-ठीक प्रतिरूप, और यह दिखाने का सबसे अच्छा उदाहरण कि 'A महिला है' वाला सूत्र क्यों मायने रखता है। वहाँ ढाँचा पूरी तरह निश्चित है पर E का लिंग कहीं कहा ही नहीं गया, इसलिए सम्बन्ध के लिए कोई एक शब्द चुना नहीं जा सकता; यहाँ लिंग कहा गया है, और केवल इसी कारण 'पत्नी' को 'पति' पर वरीयता दी जा सकती है।
पाँच व्यक्तियों A, B, C, D तथा E के समूह में एक प्राध्यापक, एक डॉक्टर तथा एक वकील हैं। A तथा D अविवाहित महिलाएँ हैं और काम नहीं करतीं। समूह के विवाहित युग्म में E पति है। B, A का भाई है और न डॉक्टर है न वकील। प्राध्यापक कौन है ?
- (a) B
- (b) C
- (c) A
- (d) उपलब्ध आँकड़ों से निर्धारित नहीं किया जा सकता
उत्तर(a) B
यह दिखाता है कि पारिवारिक जाली को प्रायः व्यवसायों की दूसरी जाली के साथ कैसे मिलाया जाता है, ताकि वैवाहिक स्थिति तथा लिंग को व्यवसाय के साथ-साथ पकड़े रखना पड़े। निराकरण वही है जो यहाँ है — पहले जो निश्चित है उसे बिठाइए, फिर जो बचे उसे पढ़ लीजिए।
मुकेश ने अपने मित्र से कहा, “रीता मेरे पुत्र की पत्नी की बेटी की माँ है।” मुकेश का रीता के साथ क्या रिश्ता है ?
- (a) पिता
- (b) दामाद
- (c) बेटा
- (d) ससुर
उत्तर(d) ससुर
2025 के 71वीं CCE के प्रश्नपत्र ने दूसरा मानक प्रारूप रखा — अलग-अलग उपवाक्यों के बजाय एक ही उद्धृत वाक्य, जिसमें सम्बन्धों की शृंखला बँधी है। दोनों एक ही तरह हल होते हैं, अर्थात् किसी सम्बन्ध को नाम देने से पहले वृक्ष खींचकर, और BPSC स्पष्ट रूप से ऐसा एक प्रश्न हर प्रश्नपत्र में रखता है।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
P, Q की बहन है, Q, R का पुत्र है, S, P की माता है, और T, S का पति है। T का Q से क्या सम्बन्ध है ?
- (a)भाई
- (b)पिता
- (c)चाचा
- (d)दादा
उत्तर(b) पिता — P तथा Q भाई-बहन हैं और S उनकी माता है, इसलिए S का पति T दोनों का पिता है; R को केवल Q का जनक बताया गया है, और वह चाहे जो हो, T का सम्बन्ध इससे नहीं बदलता।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
रक्त-सम्बन्ध की किसी पहेली में 'X, Y का भाई है' यह कथन कौन-सी दो सूचनाएँ देता है ?
- (a)कि X, Y से बड़ा है, और कि X पुरुष है
- (b)कि X पुरुष है, और कि X तथा Y के माता-पिता एक ही हैं
- (c)कि X पुरुष है, और कि X, Y से एक पीढ़ी ऊपर है
- (d)कि X तथा Y एक ही परिवार में विवाहित होकर आए हैं
उत्तर(b) कि X पुरुष है, और कि X तथा Y के माता-पिता एक ही हैं — भाई वाला सूत्र लिंग तथा पीढ़ी दोनों एक साथ तय करता है, और मानक परम्परा पर दोनों को एक ही दो जनकों की सन्तान भी बना देता है।