भारत में वित्त आयोग का प्राथमिक कार्य है
- (a)राष्ट्रपति को वित्तीय मामलों में परामर्श देना
- (b)वार्षिक बजट तैयार करना
- (c)संघ एवं राज्य सरकारों के मंत्रालयों को निधि का आवंटन करना
- (d)केन्द्र और राज्यों के मध्य राजस्व का बँटवारा
सही — (d) केन्द्र और राज्यों के मध्य राजस्व का बँटवारा। संविधान आयोग का प्राथमिक कर्तव्य एक ही खण्ड में कह देता है, और यह विकल्प उसी को दोहराता है। अनुच्छेद 280(3)(क) वित्त आयोग का यह कर्तव्य बनाता है कि वह राष्ट्रपति को 'संघ तथा राज्यों के बीच करों के उन शुद्ध आगमों के वितरण के बारे में, जो इस अध्याय के अधीन उनके बीच विभाजित किए जाने हैं या किए जा सकते हैं, तथा ऐसे आगमों के राज्यों के बीच सम्बन्धित भागों के आवंटन के बारे में' सिफ़ारिश करे। इस एक वाक्य के भीतर दो अलग-अलग कार्य बैठे हैं, और दोनों इसी विकल्प के हैं। ऊर्ध्वाधर हस्तान्तरण यह तय करता है कि संघ के विभाज्य कर-कोष का कितना अंश समग्र रूप से राज्यों को जाएगा — चौदहवें वित्त आयोग ने इसे 32 से बढ़ाकर 42 प्रतिशत किया और पन्द्रहवें ने, जम्मू-कश्मीर के संघ राज्यक्षेत्र बन जाने के बाद, इसे 41 प्रतिशत रखा। फिर क्षैतिज हस्तान्तरण यह तय करता है कि वह कोष राज्यों के बीच किस तरह बँटेगा, और उसके लिए आयोग स्वयं मानदण्ड चुनता है; पन्द्रहवें आयोग ने जनसंख्या, क्षेत्रफल, वन तथा पारिस्थितिकी, आय-दूरी, जनसांख्यिकीय निष्पादन तथा कर-एवं-राजकोषीय प्रयास का प्रयोग किया। अनुच्छेद 280(3) के शेष खण्ड कोई भिन्न प्रयोजन नहीं जोड़ते, उसी राजस्व-बँटवारे वाले प्रयोजन को पूरा करते हैं : खण्ड (ख) भारत की संचित निधि से राज्यों को दिए जाने वाले सहायता-अनुदानों को नियन्त्रित करने वाले सिद्धान्तों से सम्बन्धित है, खण्ड (खख) तथा (ग) राज्य की संचित निधि को बढ़ाने के उन उपायों से जिनसे वह अपनी पंचायतों तथा नगरपालिकाओं को सहारा दे सके, और खण्ड (घ) एक अवशिष्ट शीर्ष है, जिसमें वह सब आता है जो राष्ट्रपति सुदृढ़ वित्त के हित में आयोग को निर्दिष्ट करे। ढाँचे की दृष्टि से, आयोग का गठन राष्ट्रपति अनुच्छेद 280(1) के अन्तर्गत प्रत्येक पाँचवें वर्ष या उससे पहले करते हैं, उसमें एक अध्यक्ष तथा चार अन्य सदस्य होते हैं, और अनुच्छेद 280(2) के अन्तर्गत संसद विधि द्वारा अर्हताएँ विहित कर सकती है। यह सिफ़ारिश करने वाला निकाय है : उसकी रिपोर्ट, की गई कार्रवाई के ज्ञापन के साथ, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष रखी जाती है। सोलहवाँ वित्त आयोग, जिसके अध्यक्ष अरविन्द पनगढ़िया हैं, वर्तमान आयोग है, और उसकी रिपोर्ट संसद के पटल पर रखी जा चुकी है।
- (a)राष्ट्रपति को वित्तीय मामलों में परामर्श देना — रूप में सही और कार्य के वर्णन के रूप में ग़लत। आयोग अपनी सिफ़ारिशें राष्ट्रपति को ही करता है — अनुच्छेद 280(3) यही कहता है — पर वह उसका काम नहीं, उसके काम के पहुँचने का मार्ग है। प्राथमिक कार्य के रूप में पढ़ें तो यह कहीं अधिक ढीला है : यह नियन्त्रक-महालेखापरीक्षक, वित्त मन्त्रालय तथा आधा दर्जन अन्य निकायों पर उतना ही बैठ जाएगा, और यह किसी विषय-वस्तु का नाम तो लेता ही नहीं।
- (b)वार्षिक बजट तैयार करना — अनुच्छेद 112 द्वारा अपेक्षित वार्षिक वित्तीय विवरण वित्त मन्त्रालय तैयार करता है और वित्त मन्त्री उसे संसद में प्रस्तुत करते हैं। उसे बनाने में वित्त आयोग की कोई भूमिका नहीं है। दोनों का सम्बन्ध केवल इतना है कि आयोग जिस हस्तान्तरण की सिफ़ारिश करता है, वह मन्त्रालय के लिखे बजट में एक पंक्ति बनकर आ जाता है।
- (c)संघ एवं राज्य सरकारों के मंत्रालयों को निधि का आवंटन करना — मन्त्रालयों के बीच आवंटन बजट तथा विनियोग की प्रक्रिया से होता है, और हर सरकार अपने लिए स्वयं करती है; राज्यों को योजनावार अन्तरण ऐतिहासिक रूप से योजना आयोग का काम था और अब केन्द्रीय क्षेत्र तथा केन्द्र प्रायोजित योजनाओं के माध्यम से होते हैं। वित्त आयोग सरकार के स्तरों के बीच राजस्व बाँटता है, विभागों के बीच नहीं।
भारत का संविधान कर लगाने की शक्ति और ख़र्च करने के उत्तरदायित्व को जान-बूझकर अलग रखता है। सबसे अधिक उपज देने वाले कर संघ उठाता है, जबकि स्वास्थ्य, शिक्षा, पुलिस, कृषि तथा स्थानीय प्रशासन पर व्यय का बड़ा भाग राज्य ढोते हैं। इसी अन्तर को ऊर्ध्वाधर राजकोषीय असन्तुलन कहते हैं, और वित्त आयोग उसी को पाटने के लिए है — यही कारण है कि वह स्थायी रूप से बैठा नहीं रहता, हर पाँच वर्ष में नए सिरे से गठित होता है। उसका साधन संविधान के भाग बारह का अध्याय एक है : अनुच्छेद 270 संघ द्वारा लगाए गए करों को राज्यों के साथ विभाज्य बनाता है, अनुच्छेद 275 सांविधिक सहायता-अनुदानों का उपबन्ध करता है, अनुच्छेद 280 आयोग की रचना करता है, और अनुच्छेद 281 राष्ट्रपति से अपेक्षा करता है कि वे उसकी सिफ़ारिशें, की गई कार्रवाई के ज्ञापन सहित, दोनों सदनों के समक्ष रखवाएँ। विधि की दृष्टि से आयोग परामर्शी है — कोई खण्ड उसकी सिफ़ारिशों को बाध्यकारी नहीं बनाता — पर परम्परा से उसकी मुख्य हस्तान्तरण-सिफ़ारिशें एक के बाद एक सरकारों ने स्वीकार की हैं, और यही इस संस्था को उसका भार देता है। उसके नीचे 73वें तथा 74वें संशोधनों से बना एक प्रतिबिम्ब है : अनुच्छेद 243झ तथा 243य के अन्तर्गत राज्यपाल द्वारा गठित राज्य वित्त आयोग, जो पंचायतों तथा नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की समीक्षा करता है।
इस तरह के प्रश्न में हर विकल्प किसी एक सच-सी लगने वाली संगति के इर्द-गिर्द गढ़ा जाता है, इसलिए परीक्षा इस बात की है कि अभ्यर्थी सामान्य धारणा के बजाय संविधान का पाठ पकड़े रह सकता है या नहीं। तीन त्वरित छन्ने यह काम कर देते हैं। पहला, बजट कौन तैयार करता है? कार्यपालिका, कोई आयोग कभी नहीं — इसलिए विकल्प (b) बाहर। दूसरा, मन्त्रालयों को धन कौन आवंटित करता है? वही सरकार जिसके वे मन्त्रालय हैं, विनियोग के माध्यम से — इसलिए विकल्प (c) बाहर। तीसरा, बचे हुए दो में से उसे चुनिए जो किसी विषय का नाम लेता है, न कि उसे जो केवल एक सम्बन्ध का : 'राष्ट्रपति को वित्तीय मामलों में परामर्श देना' बताता है कि आयोग किससे बात करता है, जबकि 'केन्द्र और राज्यों के मध्य राजस्व का बँटवारा' बताता है कि वह किस विषय पर बात करता है — और कार्य अपने विषय से परिभाषित होता है। यही तीसरा छन्ना यहाँ की हस्तान्तरणीय कुशलता है। जब भी दो विकल्प दोनों बचाव-योग्य हों, वह जीतता है जो सार बताता है, वह नहीं जो प्रक्रिया बताता है। यह भी आना चाहिए कि संघीय वित्त आयोग को राज्य वित्त आयोग से कैसे अलग किया जाए, क्योंकि BPSC दोनों के बारे में पूछ चुका है, और तत्कालीन योजना आयोग से भी, जिसके अन्तरण वित्त आयोग के सूत्र-आधारित अन्तरणों के विवेकाधीन प्रतिरूप थे।
- अनुच्छेद 280(3)(क) : आयोग का कर्तव्य है संघ तथा राज्यों के बीच विभाज्य करों के शुद्ध आगमों के वितरण की, तथा राज्यों के बीच उनके सम्बन्धित भागों के आवंटन की सिफ़ारिश करना
- अनुच्छेद 280(3)(ख) भारत की संचित निधि से सहायता-अनुदानों को नियन्त्रित करने वाले सिद्धान्तों से सम्बन्धित है; (खख) तथा (ग) किसी राज्य की संचित निधि को उसकी पंचायतों तथा नगरपालिकाओं के लिए बढ़ाने से; (घ) राष्ट्रपति द्वारा निर्दिष्ट विषयों का अवशिष्ट शीर्ष है
- अनुच्छेद 280(1) : राष्ट्रपति प्रत्येक पाँचवें वर्ष या उससे पहले आयोग का गठन करते हैं, जिसमें एक अध्यक्ष तथा चार अन्य सदस्य होते हैं; अनुच्छेद 280(2) संसद को विधि द्वारा अर्हताएँ विहित करने देता है
- ऊर्ध्वाधर हस्तान्तरण : चौदहवें वित्त आयोग ने विभाज्य कोष में राज्यों का अंश 32 से बढ़ाकर 42 प्रतिशत किया, और पन्द्रहवें ने उसे 41 प्रतिशत रखा
- पन्द्रहवें वित्त आयोग के क्षैतिज हस्तान्तरण-सूत्र में जनसंख्या, क्षेत्रफल, वन तथा पारिस्थितिकी, आय-दूरी, जनसांख्यिकीय निष्पादन तथा कर-एवं-राजकोषीय प्रयास का प्रयोग हुआ
- सोलहवें वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविन्द पनगढ़िया हैं और उसकी रिपोर्ट संसद के पटल पर रखी जा चुकी है; सिफ़ारिशें की गई कार्रवाई के ज्ञापन के साथ दोनों सदनों के समक्ष रखी जाती हैं

- 'राष्ट्रपति को परामर्श देना' इसलिए चुन लेना कि आयोग राष्ट्रपति को ही रिपोर्ट करता है; वह मार्ग है, कार्य नहीं
- वित्त आयोग को योजना आयोग या नीति आयोग से गड्डमड्ड कर देना — सूत्र-आधारित सांविधिक अन्तरण बनाम विवेकाधीन या परामर्शी अन्तरण
- यह भूल जाना कि आयोग विधि की दृष्टि से परामर्शी है; अनुच्छेद 280 या 281 में ऐसा कुछ नहीं जो उसकी सिफ़ारिशों को सरकार पर बाध्यकारी बनाता हो
BPSC कार्य को एक पंक्ति में, चार विश्वसनीय-से लगने वाले पुनर्कथनों के साथ पूछता है, इसलिए अंक उसी को मिलता है जो यह स्मरण कर सके कि अनुच्छेद 280(3)(क) वस्तुतः कहता क्या है, न कि यह कि निकाय मोटे तौर पर करता क्या है। UPSC ने इसी संस्था को हर दूसरे कोण से पूछा है — सहायता-अनुदानों के सिद्धान्तों की सिफ़ारिश कौन-सा प्राधिकरण करता है, रिपोर्ट संसद के समक्ष कौन रखता है, पन्द्रहवें आयोग ने क्षैतिज हस्तान्तरण के लिए कौन-से मानदण्ड लिए — इसलिए यह अनुच्छेद खण्ड-दर-खण्ड आना चाहिए।
निम्नलिखित में से कौन-सा प्राधिकरण भारत की संचित निधि से राज्यों को उनके राजस्व के सहायता-अनुदानों को नियन्त्रित करने वाले सिद्धान्तों की सिफ़ारिश करता है ?
- (a) वित्त आयोग
- (b) अन्तर्राज्यीय परिषद्
- (c) संघीय वित्त मन्त्रालय
- (d) लोक लेखा समिति
उत्तर(a) वित्त आयोग
यह उसी अनुच्छेद के ठीक अगले खण्ड की परीक्षा लेता है। जहाँ BPSC अनुच्छेद 280(3)(क) तथा कर-आगमों के विभाजन के बारे में पूछता है, वहाँ UPSC 280(3)(ख) तथा सहायता-अनुदानों के सिद्धान्तों के बारे में — एक ही कर्तव्य की दो भुजाएँ, और दोनों को वित्त मन्त्रालय से अलग करके देखना है।
भारत में वित्त आयोग का प्राथमिक कार्य है
- (a) केन्द्र तथा राज्यों के बीच राजस्व का वितरण करना
- (b) वार्षिक बजट तैयार करना
- (c) राष्ट्रपति को वित्तीय मामलों में परामर्श देना
- (d) संघ तथा राज्य सरकारों के विभिन्न मन्त्रालयों को निधि आवंटित करना
उत्तर(a) केन्द्र तथा राज्यों के बीच राजस्व का वितरण करना
UPSC ने यही प्रश्नवाक्य सवा दो दशक पहले हूबहू पूछा था, वही चार विचार अलग क्रम में और थोड़े अलग शब्दों में रखकर — वहाँ की उत्तर-कुंजी वही तथ्य रखती है जो यहाँ हमारे व्युत्पन्न उत्तर के पीछे है, बस व्याकरण का रूप एक क़दम अलग है। ध्यान रहे कि अक्षर मेल नहीं खाते — अभ्यर्थी को जो सार पहचानना है वह एक ही है, पर उसे कौन-सा विकल्प ढो रहा है यह एक नहीं, और ठीक इसीलिए उत्तर का अक्षर एक प्रश्नपत्र से दूसरे पर कभी नहीं ढोया जा सकता।
निम्नलिखित में से कौन वित्त आयोग के सदस्य के लिए आवश्यक अर्हताओं का निर्धारण करता है ?
- (a) भारत का राष्ट्रपति
- (b) मंत्रिपरिषद्
- (c) संसद विधि द्वारा
- (d) संघीय कैबिनेट
उत्तर(c) संसद विधि द्वारा
2025 के 71वीं CCE के प्रश्नपत्र ने अनुच्छेद 280(2) के बारे में पूछा — ठीक वही खण्ड जो इस प्रश्न को तय करने वाले खण्ड से पहले आता है। BPSC स्पष्ट रूप से अनुच्छेद 280 को प्रश्नपत्रों के आर-पार पंक्ति-दर-पंक्ति पढ़ रहा है, इसलिए केवल उसका प्रयोजन नहीं, पूरा अनुच्छेद सीख लेना ही किफ़ायती तैयारी है।
पंचायतों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा के लिए कौन अधिकृत है?
- (a) मुख्यमंत्री
- (b) ब्लॉक समिति का अध्यक्ष
- (c) जिला परिषद का अध्यक्ष
- (d) राज्यपाल द्वारा गठित वित्त आयोग
उत्तर(d) राज्यपाल द्वारा गठित वित्त आयोग
उसी संस्था का राज्य-स्तरीय प्रतिबिम्ब। संघीय वित्त आयोग केन्द्र तथा राज्यों के बीच राजस्व बाँटता है; राज्य वित्त आयोग, जिसे अनुच्छेद 243झ के अन्तर्गत राज्यपाल गठित करते हैं, वही काम किसी राज्य तथा उसकी पंचायतों के बीच करता है।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
वित्त आयोग की प्रत्येक सिफ़ारिश, की गई कार्रवाई के व्याख्यात्मक ज्ञापन सहित, संसद के प्रत्येक सदन के समक्ष किस अनुच्छेद के अन्तर्गत रखी जाती है ?
- (a)अनुच्छेद 275
- (b)अनुच्छेद 280
- (c)अनुच्छेद 281
- (d)अनुच्छेद 282
उत्तर(c) अनुच्छेद 281 — अनुच्छेद 280 आयोग का गठन करता है और उसके कर्तव्य बताता है, जबकि अनुच्छेद 275 सहायता-अनुदानों का और अनुच्छेद 282 विवेकाधीन अनुदानों का उपबन्ध करता है।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
वित्त आयोग में एक अध्यक्ष के अतिरिक्त कितने अन्य सदस्य होते हैं ?
- (a)दो
- (b)तीन
- (c)चार
- (d)छह
उत्तर(c) चार — अनुच्छेद 280(1) एक अध्यक्ष तथा चार अन्य सदस्यों का उपबन्ध करता है, जिनकी नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं।