भारत में नाभिकीय विद्युत सुविधा को विकसित करने के लिए 'अश्विनी (ASHVINI)' नामक संयुक्त उद्यम में कौन सम्मिलित हैं ?
- (a)एनपीसीआईएल (NPCIL) और एनटीपीसी (NTPC)
- (b)टीएमसी (TMC) और वीईसीसी (VECC)
- (c)एचडब्लूबी (HWB) और बीएआरसी (BARC)
- (d)आईजीएसीआर (IGACR) और एनटीपीसी (NTPC)
सही — A, एनपीसीआईएल (NPCIL) और एनटीपीसी (NTPC)। 'अश्विनी' (अणुशक्ति विद्युत निगम लिमिटेड) न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL, लगभग 51 प्रतिशत) और एनटीपीसी लिमिटेड (लगभग 49 प्रतिशत) के बीच का संयुक्त उद्यम है, जो भारत में नाभिकीय विद्युत परियोजनाओं के निर्माण, स्वामित्व और संचालन के लिए बना है — जैसे राजस्थान के माही बांसवाड़ा में प्रस्तावित 4x700 MWe दाबित भारी जल रिएक्टर। यह NPCIL की नाभिकीय विशेषज्ञता को NTPC की विद्युत-उत्पादन क्षमता से जोड़ता है।
- (b)टीएमसी (TMC) और वीईसीसी (VECC) — टाटा मेमोरियल सेंटर (कैंसर चिकित्सा) और वैरिएबल एनर्जी साइक्लोट्रॉन सेंटर (त्वरक भौतिकी) शोध संस्थान हैं; ये नाभिकीय विद्युत उत्पादन का संयुक्त उद्यम नहीं बनाते।
- (c)एचडब्लूबी (HWB) और बीएआरसी (BARC) — भारी जल बोर्ड और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र परमाणु ऊर्जा विभाग की इकाइयाँ हैं, जो भारी जल उत्पादन और अनुसंधान के लिए हैं; ये किसी वाणिज्यिक विद्युत संयंत्र का संयुक्त उद्यम नहीं हैं।
- (d)आईजीएसीआर (IGACR) और एनटीपीसी (NTPC) — इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र तीव्र रिएक्टरों का शोध केंद्र है; अश्विनी संयुक्त उद्यम NPCIL और NTPC के बीच है, IGCAR के साथ नहीं। (पुस्तिका में IGCAR की जगह 'IGACR' छप गया है।)
नाभिकीय विद्युत क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार ने NPCIL को सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के साथ संयुक्त उद्यम बनाने की अनुमति दी। अश्विनी (अणुशक्ति विद्युत निगम लिमिटेड) NPCIL-NTPC का वह संयुक्त उद्यम है जिसे नाभिकीय संयंत्रों के निर्माण, स्वामित्व और संचालन का अधिकार है; इसके लिए वे सक्षमकारी संशोधन किए गए जिनसे ऐसे संयुक्त उद्यम नाभिकीय परियोजनाएँ रख सकें।
उत्तर इस बात पर टिका है कि अश्विनी परमाणु-विद्युत संचालक (NPCIL) को ताप-विद्युत की बड़ी कंपनी (NTPC) से जोड़ता है। शेष युग्म परमाणु ऊर्जा विभाग के शोध या उत्पादन संस्थान (BARC, IGCAR, VECC, HWB) हैं, जो वाणिज्यिक नाभिकीय विद्युत केंद्र नहीं चलाते।
- अश्विनी अणुशक्ति विद्युत निगम लिमिटेड है, जो NPCIL (लगभग 51%) और NTPC (लगभग 49%) का संयुक्त उद्यम है।
- इसका उद्देश्य माही बांसवाड़ा, राजस्थान जैसी नाभिकीय विद्युत परियोजनाओं का निर्माण, स्वामित्व और संचालन है।
- परमाणु ऊर्जा विभाग के अधीन NPCIL भारत के नाभिकीय विद्युत रिएक्टरों का संचालन करता है।
- 2025 के प्रारंभ में इस संयुक्त उद्यम की व्यवस्था में संशोधन किया गया ताकि अश्विनी नाभिकीय परियोजनाओं का स्वामित्व रख सके; NTPC भारत की सबसे बड़ी विद्युत कंपनी है, जो परंपरागत रूप से ताप-विद्युत में रही है और अब नाभिकीय क्षेत्र में विविधीकरण कर रही है।

- नाभिकीय जैसा नाम सुनकर शोध संस्थानों का युग्म (BARC, IGCAR) चुन लेना — अश्विनी विद्युत-उत्पादन का संयुक्त उद्यम है (NPCIL + NTPC)।
- पुस्तिका में IGCAR की जगह छपे 'IGACR' से भ्रमित हो जाना।
यह किसी नामित नाभिकीय क्षेत्र के संयुक्त उद्यम के घटकों या पूरे नाम के रूप में पूछा जाता है।
No directly related past PYQ was found.
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारत के नाभिकीय विद्युत रिएक्टरों का निर्माण और संचालन करने वाला सार्वजनिक उपक्रम है
- (a)NTPC
- (b)NPCIL
- (c)BHEL
- (d)SJVN
Answer(b) NPCIL — न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
'अश्विनी' (अणुशक्ति विद्युत निगम लिमिटेड) NPCIL और किसके बीच का संयुक्त उद्यम है?
- (a)ONGC
- (b)NTPC
- (c)कोल इंडिया
- (d)SAIL
Answer(b) NTPC।