अष्टांग योग के अन्तर्गत किसे अन्तरंग साधना कहा जाता है ?
- (a)प्रत्याहार
- (b)नियम
- (c)प्राणायाम
- (d)धारणा
सही उत्तर — (d) धारणा। अष्टांग योग (पतंजलि के आठ अंगों वाले योग) को परम्परागत रूप से दो समूहों में विभाजित किया जाता है: पहले पाँच अंग — यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार — बहिरंग साधना ('बाह्य' अभ्यास) हैं, क्योंकि ये अब भी शरीर, श्वास या इन्द्रियों से जुड़े रहते हैं; अन्तिम तीन — धारणा (एकाग्रता), ध्यान (चिन्तन), तथा समाधि (लीनता) — अन्तरंग साधना ('आन्तरिक' अभ्यास) हैं, जो पूर्णतः मन पर कार्य करते हैं। चारों विकल्पों में से केवल धारणा ही इस आन्तरिक समूह से सम्बन्धित है।
- (a)प्रत्याहार — पाँचवाँ अंग — बाह्य वस्तुओं से इन्द्रियों को हटाना — बहिरंग (बाह्य) समूह का अन्तिम अंग है; यह एक संक्रमण-बिन्दु है, परन्तु फिर भी बाह्य ही वर्गीकृत है, आन्तरिक नहीं।
- (b)नियम — दूसरा अंग — आत्म-अनुशासन व संतोष जैसे व्यक्तिगत नियम — बहिरंग (बाह्य) समूह का भाग है।
- (c)प्राणायाम — चौथा अंग — श्वास-नियंत्रण — भी बहिरंग (बाह्य) समूह का भाग है।
पतंजलि के योगसूत्र की शास्त्रीय भाष्य-परम्परा अष्टांग योग के आठ अंगों को दो समूहों में बाँटती है: बहिरंग साधना (यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार — बाह्य, क्योंकि ये अब भी शरीर, श्वास या इन्द्रियों से जुड़े हैं) तथा अन्तरंग साधना (धारणा, ध्यान, समाधि — आन्तरिक, क्योंकि ये पूर्णतः मानसिक हैं)। तीनों अन्तरंग अंगों को संयुक्त रूप से संयम भी कहा जाता है।
परीक्षाएँ एक अंग को अलग करके पूछती हैं कि वह किस समूह से सम्बन्धित है — प्रत्याहार सबसे कठिन भ्रामक विकल्प है, क्योंकि यह पहले से ही इन्द्रियों को भीतर की ओर मोड़ देता है, परन्तु फिर भी इसे अन्तिम बाह्य (बहिरंग) अंग ही माना जाता है, जबकि धारणा ही आन्तरिक (अन्तरंग) पथ की वास्तविक शुरुआत है।
- अष्टांग योग के आठ अंग, क्रम में: यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि।
- बहिरंग साधना (बाह्य): यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार — पहले पाँच अंग।
- अन्तरंग साधना (आन्तरिक): धारणा, ध्यान, समाधि — अन्तिम तीन अंग, जिन्हें संयुक्त रूप से संयम भी कहा जाता है।
- धारणा = एकाग्रता (मन को एक बिन्दु पर स्थिर करना); ध्यान = चिन्तन; समाधि = लीनता।

केवल अन्तिम तीन अंग — धारणा, ध्यान, समाधि — ही अन्तरंग (आन्तरिक) साधना हैं; इस प्रश्न के चार विकल्पों में धारणा ही सही उत्तर है।
- प्रत्याहार को आन्तरिक वर्गीकृत कर देना, क्योंकि इसमें इन्द्रियों को हटाना शामिल है — यह अब भी बहिरंग (बाह्य) साधना के अन्तर्गत ही रखा गया है।
- यह भूल जाना कि अन्तरंग साधना तीन अंगों (धारणा, ध्यान, समाधि) का समूह है, केवल एक नहीं।
MPPSC/UPSC एक मिश्रित सूची में से यह पूछते हैं कि कौन-सा एक अंग बहिरंग या अन्तरंग समूह से सम्बन्धित है — केवल समूहों के नाम नहीं, बल्कि पूरा पाँच-तीन विभाजन याद रखें।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
अष्टांग योग के कौन-से तीन अंग संयुक्त रूप से 'अन्तरंग साधना' (आन्तरिक अभ्यास) के रूप में वर्गीकृत हैं ?
- (a)यम, नियम, आसन
- (b)प्राणायाम, प्रत्याहार, धारणा
- (c)धारणा, ध्यान, समाधि
- (d)आसन, प्राणायाम, प्रत्याहार
उत्तर(c) धारणा, ध्यान, समाधि।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
अष्टांग योग में धारणा, ध्यान तथा समाधि के संयुक्त अभ्यास को और किस नाम से जाना जाता है ?
- (a)संयम
- (b)समाधि
- (c)क्रिया योग
- (d)हठ योग
उत्तर(a) संयम।