भारतीय संविधान की निम्न में से किस अनुसूची में दल-विरोधी अधिनियम के प्रावधान रखे गये हैं ?
- (a)आठवीं अनुसूची
- (b)दसवीं अनुसूची
- (c)द्वितीय अनुसूची
- (d)पाँचवीं अनुसूची
सही — (b) दसवीं अनुसूची। इस अनुसूची का शीर्षक संविधान के अपने शब्दों में है 'दल-बदल के आधार पर निरर्हता के बारे में उपबन्ध', और यह अनुच्छेद 102(2) तथा 191(2) से जुड़ी है — क्रमशः संसद सदस्यों और राज्य विधानमण्डलों के सदस्यों की निरर्हता के खण्डों से। इसे संविधान (बावनवाँ संशोधन) अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया, जो 1 मार्च 1985 से प्रभावी हुआ। पैराग्राफ़ 2 दो सामान्य आधार तय करता है: सदस्य निरर्हित हो जाता है यदि उसने अपने राजनीतिक दल की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ दी हो, या यदि वह सदन में अपने दल द्वारा दिए गए किसी निदेश के विरुद्ध, उस दल की पूर्व अनुमति के बिना, मत दे या मतदान से विरत रहे और वह आचरण पन्द्रह दिन के भीतर क्षमा न किया गया हो। पैराग्राफ़ 4 एकमात्र बची हुई छूट देता है: विलय, जो तभी और केवल तभी हुआ माना जाता है जब सम्बन्धित विधानमण्डल दल के दो-तिहाई से अन्यून सदस्य उस विलय पर सहमत हो जाएँ। पहले एक दूसरी छूट भी थी — पैराग्राफ़ 3, जो विधानमण्डल दल के एक-तिहाई सदस्यों द्वारा किए गए विभाजन को संरक्षण देता था — और उसे संविधान (इक्यानबेवाँ संशोधन) अधिनियम, 2003 द्वारा 1 जनवरी 2004 से हटा दिया गया, ठीक इसलिए कि गढ़े हुए एक-तिहाई विभाजन क़ानून से बच निकलने का सामान्य रास्ता बन चुके थे। यही प्रश्न UPSC ने 1998 में शब्दशः पूछा था, और उसका प्रकाशित उत्तर भी दसवीं अनुसूची ही है — उत्तर का पाठ वही है, यद्यपि वहाँ वह किसी दूसरे अक्षर पर बैठा है क्योंकि विकल्पों का क्रम अलग है।
- (a)आठवीं अनुसूची — आठवीं अनुसूची का शीर्षक बस 'भाषाएँ' है और उसमें संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त बाईस भाषाओं की सूची है — वह सूची जो चौदह से आरम्भ हुई और संशोधनों से बढ़ती गई, जिसमें सबसे हाल का 2003 था जब बोडो, डोगरी, मैथिली और सन्थाली जोड़ी गईं। विधायकों के आचरण से उसका कोई सम्बन्ध नहीं। सामान्य ज्ञान में इसी अनुसूची का उल्लेख सबसे अधिक होता है, इसीलिए यह यहाँ विकल्प-सूची में सबसे ऊपर रखी गई है।
- (c)द्वितीय अनुसूची — दूसरी अनुसूची उपलब्धियाँ, भत्ते और विशेषाधिकार तय करती है — भाग क राष्ट्रपति तथा राज्यपालों के लिए, भाग ग लोक सभा के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, राज्य सभा के सभापति तथा उपसभापति और राज्यों के उनके समकक्षों के लिए, भाग घ उच्चतम न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के लिए, भाग ङ नियन्त्रक-महालेखापरीक्षक के लिए। उसका विषय वेतन है, दलीय अनुशासन नहीं।
- (d)पाँचवीं अनुसूची — पाँचवीं अनुसूची में 'अनुसूचित क्षेत्रों तथा अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन और नियन्त्रण के बारे में उपबन्ध' हैं — राज्यपाल का प्रतिवेदन, जनजाति सलाहकार परिषद्, तथा अनुसूचित क्षेत्रों में विधियों को लागू या संशोधित करने की शक्ति। उसकी समान्तर छठी अनुसूची असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिज़ोरम के जनजातीय क्षेत्रों को समेटती है। दोनों भूभाग और समुदाय से जुड़ी हैं, दल-बदल से नहीं।
दल-बदल विरोधी क़ानून 1960 और 1970 के दशक की उस 'आया राम गया राम' राजनीति की प्रतिक्रिया था, जब विधायक इतनी बार पाला बदलते थे कि सरकारें बार-बार, कभी-कभी दिनों के भीतर, गिर जाती थीं। 52वें संशोधन ने इसका उत्तर यह दिया कि दल-बदल को स्वयं सदन से निरर्हता का आधार बना दिया, और इसका निर्णय न्यायालयों के बजाय सभापति या अध्यक्ष के हाथ में रख दिया। इसके दायरे में सदस्यों की चार श्रेणियाँ हैं: दल के टिकट पर निर्वाचित सदस्य; वह निर्दलीय जो चुनाव के बाद किसी दल में शामिल हो जाए; वह नामनिर्देशित सदस्य जो अपना स्थान ग्रहण करने के छह मास बाद किसी दल में शामिल हो; और विलय के प्रयोजन के लिए विधानमण्डल दल के सदस्य सामूहिक रूप से। इस क़ानून पर तभी से दो संरचनात्मक आपत्तियाँ चली आ रही हैं। पहली, चूँकि व्हिप सदस्य को केवल विश्वास प्रस्ताव या धन विधेयक पर नहीं, हर मतदान पर बाँधता है, इसलिए वह विधायकों को दल के शून्य में बदल देता है और संसद के विचार-विमर्श वाले कार्य को कमज़ोर करता है। दूसरी, यह प्रश्न तय करने वाला पीठासीन अधिकारी प्रायः सत्तारूढ़ दल का ही सदस्य होता है, और उच्चतम न्यायालय ने किहोतो होलोहान (1992) में कहा कि उसका निर्णय, यद्यपि पैराग्राफ़ 6 के अधीन अन्तिम है, न्यायिक पुनर्विलोकन के अधीन है — जिससे विलम्ब की समस्या खुली रह जाती है, क्योंकि जो अध्यक्ष निर्णय ही न करे वह किसी दल-बदल को सदन के पूरे कार्यकाल तक टिका रहने दे सकता है।
इस उत्तर तक कोई तर्क का रास्ता नहीं है; यह क्रमांकित अनुसूची का तथ्य है, और एकमात्र बचाव यह है कि बारहों अनुसूचियाँ एक सूची के रूप में याद हों। इन्हें ऐसी जोड़ियों में सीखिए जिनमें भ्रम होना आसान है: पाँचवीं और छठी दोनों जनजातीय प्रशासन से जुड़ी हैं, पाँचवीं सामान्यतः अनुसूचित क्षेत्रों के लिए और छठी चार पूर्वोत्तर राज्यों के लिए; ग्यारहवीं और बारहवीं दोनों हस्तान्तरणीय विषय गिनाती हैं, पंचायतों के लिए उनतीस और नगरपालिकाओं के लिए अठारह; दूसरी उपलब्धियों की है और तीसरी शपथों की। फिर उन अनुसूचियों को गाँठ बाँध लीजिए जो परीक्षकों को प्रिय हैं: तीन विधायी सूचियों के लिए सातवीं, बाईस भाषाओं के लिए आठवीं, कुछ चुनौतियों से संरक्षित विधियों के लिए नौवीं, और दल-बदल के लिए दसवीं। सूची पक्की हो जाए तो आगे के प्रश्न भी उत्तर देने योग्य हो जाते हैं — यह अनुसूची किस संशोधन ने जोड़ी (52वाँ, 1985), विभाजन वाली छूट किस संशोधन ने हटाई (91वाँ, 2003), विलय के लिए कितना अंश चाहिए (दो-तिहाई), और विरोध में दिए गए मत को क्षमा करने के लिए दल के पास कितने दिन हैं (पन्द्रह)।
- दसवीं अनुसूची का शीर्षक 'दल-बदल के आधार पर निरर्हता के बारे में उपबन्ध' है और यह अनुच्छेद 102(2) तथा 191(2) से जुड़ी है; इसे संविधान (बावनवाँ संशोधन) अधिनियम, 1985 द्वारा जोड़ा गया, जो 1 मार्च 1985 से प्रभावी हुआ।
- पैराग्राफ़ 2 उस सदस्य को निरर्हित करता है जो अपने दल की सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ दे, या जो दल के निदेश के विरुद्ध बिना पूर्व अनुमति मत दे अथवा मतदान से विरत रहे और जिसका आचरण पन्द्रह दिन के भीतर क्षमा न किया जाए।
- पैराग्राफ़ 4 विलय को छूट देता है, जो तभी और केवल तभी हुआ माना जाता है जब सम्बन्धित विधानमण्डल दल के दो-तिहाई से अन्यून सदस्य उस विलय पर सहमत हों।
- पैराग्राफ़ 3, जो विधानमण्डल दल के एक-तिहाई सदस्यों द्वारा किए गए विभाजन को छूट देता था, संविधान (इक्यानबेवाँ संशोधन) अधिनियम, 2003 द्वारा 1 जनवरी 2004 से हटा दिया गया।
- इस विकल्प-सूची की शेष अनुसूचियाँ: दूसरी राष्ट्रपति, राज्यपालों, पीठासीन अधिकारियों, न्यायाधीशों तथा नियन्त्रक-महालेखापरीक्षक की उपलब्धियाँ तय करती है; पाँचवीं अनुसूचित क्षेत्रों तथा अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन को नियन्त्रित करती है; आठवीं भाषाएँ गिनाती है।
यहाँ तर्क का कोई रास्ता है ही नहीं — यह सूची का स्मरण है। अनुसूचियों को भ्रम पैदा करने वाली जोड़ियों में थामिए: जनजातीय प्रशासन के लिए पाँचवीं और छठी, पंचायत तथा नगरपालिका विषयों के लिए ग्यारहवीं और बारहवीं, उपलब्धियों के लिए दूसरी और शपथों के लिए तीसरी।
- आठवीं अनुसूची को दसवीं से गड्डमड्ड कर देना। आठवीं भाषाओं की है; दसवीं दल-बदल की। दोनों बार-बार पूछी जाती हैं और उनकी संख्याएँ आसानी से आपस में बदल जाती हैं।
- यह मानते रहना कि एक-तिहाई का विभाजन आज भी दल-बदल करने वालों को बचाता है। विभाजन वाली छूट 2003 में 91वें संशोधन से हटा दी गई; केवल दो-तिहाई वाला विलय बचा है।
- यह मान लेना कि दसवीं अनुसूची के अधीन अध्यक्ष का निर्णय चुनौती से परे है। पैराग्राफ़ 6 उसे अन्तिम कहता है, पर उच्चतम न्यायालय ने उसे न्यायिक पुनर्विलोकन के लिए खुला माना है।
BPSC अनुसूची को उसकी संख्या से पूछता है और उसके सामने तीन दूसरी अनुसूचियाँ रख देता है, इसलिए यह प्रश्न शुद्ध सूची-स्मरण है जिसमें व्युत्पत्ति का कोई रास्ता नहीं। UPSC ने यही प्रश्न 1998 में पूछा था और उसके बाद से वह इसकी मशीनरी की ओर बढ़ गया है — सदस्यता स्वेच्छा से छोड़ना किसे माना जाएगा, 91वें संशोधन ने क्या बदला, और दल-बदल की याचिका कौन तय करता है।
भारतीय संविधान की निम्नलिखित में से किस अनुसूची में दल-बदल विरोधी अधिनियम के बारे में उपबन्ध हैं ?
- (a) दूसरी अनुसूची
- (b) पाँचवीं अनुसूची
- (c) आठवीं अनुसूची
- (d) दसवीं अनुसूची
उत्तर(d) दसवीं अनुसूची
वही प्रश्न, शब्दशः, और सामने वही चार अनुसूचियाँ — UPSC का प्रकाशित उत्तर दसवीं अनुसूची है। अक्षर केवल इसलिए भिन्न है कि चारों विकल्प अलग क्रम में छपे हैं, और यह इस प्रश्नपत्र का सबसे साफ़ उदाहरण है कि उत्तर को पाठ के रूप में ढोना चाहिए, अक्षर के रूप में कभी नहीं।
भारतीय संविधान के 42वें संशोधन के सम्बन्ध में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : 1. इसने प्रस्तावना में तीन शब्द जोड़े—‘समाजवाद’, ‘धर्मनिरपेक्ष’ और ‘अखंडता’। 2. इसने संविधान में आठ मौलिक कर्तव्य जोड़े। 3. इसने नए निदेशक-सिद्धान्त जोड़े, यानी, अनुच्छेद 39A, अनुच्छेद 43A और अनुच्छेद 47. 4. इसके द्वारा राष्ट्रपति को चुनाव आयोग के परामर्श से राज्य विधान-सभाओं/मण्डलों के सदस्यों को अयोग्य घोषित करने का अधिकार प्रदान किया गया। उपर्युक्त में से कौन-से कथन गलत हैं?
- (a) 1 और 2
- (b) 3 और 4
- (c) 2 और 3
- (d) 1 और 4
उत्तर(c) 2 और 3
सितम्बर 2023 की 69वीं CCE ने पूछा था कि एक क्रमांकित संशोधन ने संविधान की संरचना में क्या किया; यह प्रश्नपत्र पूछता है कि किसी संशोधन ने कौन-सी क्रमांकित अनुसूची बनाई। दोनों एक ही चीज़ को पुरस्कृत करते हैं — संशोधन-से-उपबन्ध का नक्शा थामे रखना, यहाँ 52वाँ संशोधन दसवीं अनुसूची से और 91वाँ संशोधन उसके हटाए गए पैराग्राफ़ 3 से।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
दसवीं अनुसूची के अधीन किसी विधानमण्डल दल का विलय तभी हुआ माना जाता है जब उस पर सहमति देने वाले सदस्य कम से कम हों
- (a)विधानमण्डल दल के सदस्यों का एक-तिहाई
- (b)विधानमण्डल दल के सदस्यों का आधा
- (c)विधानमण्डल दल के सदस्यों का दो-तिहाई
- (d)विधानमण्डल दल के सदस्यों का तीन-चौथाई
उत्तर(c) विधानमण्डल दल के सदस्यों का दो-तिहाई — पैराग्राफ़ 4(2)। पैराग्राफ़ 3 की एक-तिहाई विभाजन वाली छूट 91वें संशोधन अधिनियम, 2003 द्वारा हटा दी गई थी।
- अभ्यास प्रश्न — वास्तविक PYQ नहीं
भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची किससे सम्बन्धित है ?
- (a)शपथ तथा प्रतिज्ञान के प्रारूप
- (b)संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त भाषाएँ
- (c)राज्य सभा में स्थानों का आवंटन
- (d)कुछ अधिनियमों तथा विनियमों का विधिमान्यकरण
उत्तर(b) संविधान द्वारा मान्यता प्राप्त भाषाएँ — इस समय बाईस। शपथें तीसरी अनुसूची में हैं, राज्य सभा के स्थानों का आवंटन चौथी में, और कुछ अधिनियमों का विधिमान्यकरण नौवीं में।