मध्यप्रदेश के दक्षिण-पूर्वी भाग में अधिकांश वर्षा किसके द्वारा होती है ?
- (a)मानसून की अरब सागर शाखा से
- (b)मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा से
- (c)लौटते हुए मानसून से
- (d)चक्रवातों से
सही उत्तर — (b) मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा से। प्रायद्वीपीय भारत से टकराने पर दक्षिण-पश्चिम मानसून अरब सागर शाखा और बंगाल की खाड़ी शाखा में विभाजित हो जाता है; बाद वाली शाखा खाड़ी के ऊपर मुड़कर पश्चिम बंगाल, ओडिशा और छत्तीसगढ़ को पार करती हुई मध्यप्रदेश के दक्षिण-पूर्वी भाग में प्रवेश करती है और उस क्षेत्र में सबसे अधिक वर्षा कराती है — इसी कारण बालाघाट, मंडला, डिंडौरी और सिवनी जैसे जिलों में उल्लेखनीय रूप से अधिक वर्षा होती है।
- (a)मानसून की अरब सागर शाखा से — अरब सागर शाखा भारत के पश्चिमी तट और पश्चिमी दक्कन के आंतरिक भाग की ओर बढ़ती है; यह मध्यप्रदेश के दक्षिण-पूर्वी, अंतर्देशीय-पूर्वी हिस्सों के लिए वर्षा का मुख्य स्रोत नहीं है।
- (c)लौटते हुए मानसून से — लौटता हुआ (उत्तर-पूर्वी) मानसून एक उत्तर-मानसून (अक्टूबर-नवम्बर) चरण है, जिसकी वर्षा से मुख्यतः तमिलनाडु का कोरोमंडल तट लाभान्वित होता है, न कि दक्षिण-पूर्वी मध्यप्रदेश।
- (d)चक्रवातों से — चक्रवात प्रासंगिक (एपिसोडिक), स्थानीय तूफान प्रणालियाँ हैं, इस क्षेत्र के लिए मौसम भर का प्राथमिक व स्थिर वर्षा स्रोत नहीं।
दक्षिण-पश्चिम मानसून प्रायद्वीपीय भारत तक पहुँचने पर दो शाखाओं में विभाजित होता है — अरब सागर शाखा और बंगाल की खाड़ी शाखा। बंगाल की खाड़ी शाखा खाड़ी के ऊपर उत्तर की ओर मुड़ती है, पूर्वी भारतीय तट से टकराती है, और पश्चिम बंगाल, ओडिशा तथा छत्तीसगढ़ को पार करती हुई अंतर्देशीय मार्ग से पूर्वी/दक्षिण-पूर्वी मध्यप्रदेश में पहुँचती है, जहाँ यह उस क्षेत्र की सबसे अधिक वर्षा कराती है।
जाल यह मान लेना है कि एक स्थलरुद्ध, मध्य-भारतीय राज्य पर (अधिक चर्चित) अरब सागर शाखा का ही प्रभुत्व होगा; परन्तु मध्यप्रदेश के दक्षिण-पूर्वी जिले बंगाल की खाड़ी शाखा के मार्ग में आते हैं, जब यह छत्तीसगढ़ के मैदानों को पार करते हुए पश्चिम की ओर बढ़ती है।
- दक्षिण-पश्चिम मानसून प्रायद्वीपीय भारत तक पहुँचने पर अरब सागर शाखा और बंगाल की खाड़ी शाखा में विभाजित हो जाता है।
- बंगाल की खाड़ी शाखा पूर्वी व मध्य भारत (पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ के रास्ते) में आगे बढ़ती है और दक्षिण-पूर्वी मध्यप्रदेश में सबसे अधिक वर्षा लाती है।
- इसी शाखा के कारण बालाघाट, मंडला, डिंडौरी और सिवनी जैसे दक्षिण-पूर्वी मध्यप्रदेश के जिलों में तुलनात्मक रूप से अधिक वर्षा होती है।
- दोनों मानसून शाखाएँ अंततः उत्तर-पश्चिमी गंगा के मैदान पर आकर मिलती हैं।
दक्षिण-पूर्वी मध्यप्रदेश बंगाल की खाड़ी शाखा के अंतर्देशीय मार्ग में स्थित है, जब यह छत्तीसगढ़ के मैदानों को पार करते हुए पश्चिम की ओर बढ़ती है।
- यह मान लेना कि किसी मध्य/स्थलरुद्ध राज्य पर केवल अधिक चर्चित अरब सागर शाखा का ही प्रभुत्व होगा
- 'लौटते हुए मानसून' (अक्टूबर-नवम्बर, मुख्यतः तमिलनाडु) को आगे बढ़ते दक्षिण-पश्चिम मानसून की बंगाल की खाड़ी शाखा के साथ भ्रमित करना
MPPSC के भूगोल प्रश्न प्रायः यह परखते हैं कि कौन-सी मानसून शाखा मध्यप्रदेश के किस भाग को पोषित करती है — राज्य के क्षेत्रों (पश्चिम में मालवा/निमाड़ बनाम महाकोशल/दक्षिण-पूर्व) को उनके प्रमुख वर्षा स्रोत से मिलाकर याद रखें।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
प्रायद्वीपीय भारत तक पहुँचने पर दक्षिण-पश्चिम मानसून दो शाखाओं में विभाजित हो जाता है। ये हैं:
- (a)अरब सागर शाखा और लौटती हुई शाखा
- (b)अरब सागर शाखा और बंगाल की खाड़ी शाखा
- (c)बंगाल की खाड़ी शाखा और उत्तर-पूर्वी शाखा
- (d)कोरोमंडल शाखा और मालाबार शाखा
उत्तर(b) अरब सागर शाखा और बंगाल की खाड़ी शाखा।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
उत्तर-पूर्वी (लौटता हुआ) मानसून भारत के किस राज्य के लिए प्रमुख वर्षा ऋतु है?
- (a)पंजाब
- (b)तमिलनाडु
- (c)मध्यप्रदेश
- (d)राजस्थान
उत्तर(b) तमिलनाडु — इसे अपनी अधिकांश वर्षा अक्टूबर-दिसम्बर में लौटते मानसून की उत्तर-पूर्वी पवनों से मिलती है, जो बंगाल की खाड़ी के ऊपर नमी ग्रहण करती हैं।