वर्ष 2017 में इसरो के किस सेटेलाइट लॉन्च व्हीकल के द्वारा एक ही फ्लाइट में 104 सेटेलाइट सफलतापूर्वक लॉन्च किए गए थे ?
- (a)इनसैट – 3डीआर
- (b)पीएसएलवी – सी55
- (c)जीएसएलवी – एफ12
- (d)पीएसएलवी – सी37
सही उत्तर — (d) पीएसएलवी–सी37। 15 फरवरी 2017 को, इसरो के पोलर सेटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी-सी37) ने श्रीहरिकोटा (सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र) से एक ही लॉन्च में 104 उपग्रहों को कक्षा में स्थापित किया — उस समय का विश्व रिकॉर्ड। मुख्य पेलोड कार्टोसैट-2डी था, भारत का पृथ्वी-प्रेक्षण उपग्रह, जबकि शेष अधिकांश अन्य देशों के सह-यात्री (co-passenger) लघु उपग्रह थे।
- (a)इनसैट – 3डीआर — इनसैट-3डीआर एक उपग्रह है (भारत का एक मौसम-विज्ञान उपग्रह), लॉन्च व्हीकल नहीं — यह 'कौन-सा लॉन्च व्हीकल' के उत्तर के रूप में सही नहीं हो सकता।
- (b)पीएसएलवी – सी55 — एक अलग, बाद की पीएसएलवी मिशन — इसका कहीं अधिक ऊँचा क्रम संख्या (सी55 बनाम सी37) दर्शाता है कि यह 2017 की 104-उपग्रह उड़ान के वर्षों बाद उड़ा।
- (c)जीएसएलवी – एफ12 — यह एक जीएसएलवी (जियोसिंक्रोनस सेटेलाइट लॉन्च व्हीकल) मिशन है, पीएसएलवी नहीं — जीएसएलवी इसरो का भारी जियोस्टेशनरी पेलोड हेतु वाहन है, और यह एक अलग, बाद की मिशन है।
पीएसएलवी (पोलर सेटेलाइट लॉन्च व्हीकल) इसरो का मुख्य रॉकेट है, जिसे उपग्रहों को ध्रुवीय/सूर्य-तुल्यकालिक कक्षाओं में स्थापित करने हेतु बनाया गया है — जो पृथ्वी-प्रेक्षण पेलोड के लिए आदर्श है — और यह वह वाहन है जिसका इसरो एक मुख्य पेलोड के साथ कई छोटे 'सह-यात्री' उपग्रहों को उड़ाने हेतु सबसे अधिक उपयोग करता है।
जाल यह है कि वाहन को नाम-पहचान के आधार पर चुन लिया जाए, न कि सटीक मिशन कोड को सटीक घटना से मिलाया जाए। पीएसएलवी-सी37 की 104-उपग्रह उड़ान (फरवरी 2017) इसरो की सबसे प्रचारित उपलब्धियों में से एक है — इसे 'पीएसएलवी, फरवरी 2017, कार्टोसैट-2डी मुख्य पेलोड, तत्कालीन विश्व रिकॉर्ड' के रूप में स्मरण करें।
- पीएसएलवी-सी37 15 फरवरी 2017 को श्रीहरिकोटा (सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र) से लॉन्च हुआ।
- एक ही उड़ान में 104 उपग्रह ले गया — उस समय का विश्व रिकॉर्ड।
- मुख्य पेलोड: कार्टोसैट-2डी, भारत का पृथ्वी-प्रेक्षण उपग्रह; अधिकांश अन्य उपग्रह विदेशी नैनो-उपग्रह थे।
- पीएसएलवी ध्रुवीय/सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा मिशनों हेतु इसरो का वाहन है; जीएसएलवी भारी जियोस्टेशनरी पेलोड हेतु प्रयुक्त होता है।

- पीएसएलवी को जीएसएलवी के साथ भ्रमित करना — पीएसएलवी = ध्रुवीय/सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा, छोटे/सह-यात्री पेलोड; जीएसएलवी = जियोस्टेशनरी कक्षा, भारी पेलोड।
- किसी बाद की, ऊँची-संख्या वाली पीएसएलवी/जीएसएलवी मिशन को वर्ष व घटना मिलाने के बजाय नाम-पहचान से चुन लेना।
MPPSC व यूपीएससी दोनों 'इसरो मिशन/वाहन को उसकी ऐतिहासिक उपलब्धि से मिलाएँ' पसंद करते हैं — रिकॉर्ड-धारक तथ्यों (पहला, सर्वाधिक, प्रथम-प्रयास) को उनके सटीक मिशन कोड व वर्ष के साथ स्मरण करें।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
पीएसएलवी-सी37 की 104-उपग्रह मिशन (फरवरी 2017) में मुख्य पेलोड के रूप में कौन-सा उपग्रह ले जाया गया था?
- (a)कार्टोसैट-2डी
- (b)चंद्रयान-2
- (c)रीसैट-2बी
- (d)इनसैट-3डीआर
उत्तर(a) कार्टोसैट-2डी — भारत का पृथ्वी-प्रेक्षण उपग्रह, उस उड़ान का मुख्य पेलोड।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
इसरो का कौन-सा लॉन्च व्हीकल मुख्यतः पृथ्वी-प्रेक्षण मिशनों हेतु उपग्रहों को ध्रुवीय/सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा में स्थापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है?
- (a)जीएसएलवी एमके III
- (b)पीएसएलवी
- (c)एसएसएलवी
- (d)एलवीएम3
उत्तर(b) पीएसएलवी — ध्रुवीय/सूर्य-तुल्यकालिक कक्षा पृथ्वी-प्रेक्षण पेलोड हेतु निर्मित, जबकि जीएसएलवी जियोस्टेशनरी कक्षा को लक्षित करता है।