स्वर्गीय श्री बादल भोई कौन थे ?
- (a)प्रसिद्ध आदिवासी समाजसेवी
- (b)प्रसिद्ध आदिवासी संगीतकार
- (c)प्रसिद्ध आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी
- (d)प्रसिद्ध आदिवासी कलाकार
सही उत्तर — (C), एक प्रसिद्ध आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी। बादल भोई (जन्म 1845, ग्राम डुंगरिया तीतरा, तहसील परासिया, छिंदवाड़ा जिला) ने अहिंसक स्वतंत्रता संग्राम में क्षेत्र के गोंड तथा अन्य आदिवासी समुदायों को संगठित किया — वन एवं भूमि अधिकारों के लिए दबाव बनाने हेतु 1923 में एक बड़े आदिवासी जन-समागम का नेतृत्व किया, और बाद में रामाकोना में औपनिवेशिक वन कानून की अवहेलना करते हुए 1930 के वन ('जंगल') सत्याग्रह में शामिल हुए। उनकी अहिंसा के प्रति प्रतिबद्धता ने उन्हें 'छिंदवाड़ा के गांधी' की लोकप्रिय उपाधि दिलाई। मध्यप्रदेश के राज्य आदिवासी संग्रहालय, छिंदवाड़ा को उनके सम्मान में 1997 में श्री बादल भोई राज्य आदिवासी संग्रहालय का नाम दिया गया।
- (a)प्रसिद्ध आदिवासी समाजसेवी — यह आधिकारिक पहचान नहीं है — बादल भोई को विशेष रूप से ब्रिटिश शासन के विरुद्ध आदिवासी प्रतिरोध का नेतृत्व करने के लिए याद किया जाता है, मुख्यतः समाज-सेवा पहलों के लिए नहीं।
- (b)प्रसिद्ध आदिवासी संगीतकार — यह आधिकारिक पहचान नहीं है — मध्यप्रदेश में सुविख्यात आदिवासी संगीतकार अवश्य हैं, किंतु बादल भोई की मान्यता-प्राप्त विरासत एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में है, कलाकार के रूप में नहीं।
- (d)प्रसिद्ध आदिवासी कलाकार — यह आधिकारिक पहचान नहीं है — जिला अभिलेख तथा उनके नाम पर बना राज्य संग्रहालय बादल भोई को एक स्वतंत्रता सेनानी के रूप में श्रेय देते हैं, कलाकार के रूप में नहीं।
मध्यप्रदेश की आदिवासी स्वतंत्रता-सेनानी सूची में राष्ट्रीय स्तर पर प्रलेखित नाम (टंट्या भील, भीमा नायक, शंकर शाह-रघुनाथ शाह) तथा बादल भोई जैसे स्थानीय रूप से स्मरणीय नेता, दोनों शामिल हैं, जिनका प्रतिरोध काफी हद तक क्षेत्रीय रहा किंतु जिला संस्थाओं — यहाँ, उनके सम्मान में नामित एक राज्य आदिवासी संग्रहालय — के माध्यम से संरक्षित है।
जब कोई प्रश्न किसी अपरिचित स्थानीय व्यक्तित्व का नाम लेता है, तो पहले उपलब्ध किसी भी संकेत का उपयोग करते हुए परीक्षणीय श्रेणी (स्वतंत्रता सेनानी बनाम कलाकार बनाम संगीतकार बनाम समाजसेवी) को स्थिर करें — MPPSC राज्य-सामान्य ज्ञान प्रायः ठीक ऐसी ही स्थानीय-व्यक्तित्व-से-श्रेणी स्मरण क्षमता परखता है, जो जिला अभिलेखों एवं राजपत्रों से ली जाती है।
- बादल भोई — मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले की परासिया तहसील के ग्राम डुंगरिया तीतरा के आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी।
- वन एवं भूमि अधिकारों की मांग करते हुए 1923 के एक जन-समागम को संगठित किया, तथा रामाकोना में वन कानून की अवहेलना करते हुए 1930 के वन ('जंगल') सत्याग्रह में शामिल हुए।
- अपनी अहिंसक विधियों के लिए लोकप्रिय रूप से 'छिंदवाड़ा के गांधी' कहलाए।
- छिंदवाड़ा के राज्य आदिवासी संग्रहालय का नाम उनके सम्मान में श्री बादल भोई राज्य आदिवासी संग्रहालय रखा गया (1997)।
- यह मान लेना कि कोई अपरिचित स्थानीय नाम अवश्य ही कलाकार/संगीतकार होगा, बजाय इसके कि उत्तर-कुंजी किस विशिष्ट श्रेणी की परीक्षा ले रही है, यह जाँचा जाए।
- क्षेत्रीय वन सत्याग्रहों (1930) को राष्ट्रीय असहयोग आंदोलन (1920-22) के साथ भ्रमित करना — ये भावना में संबंधित किंतु भिन्न अभियान हैं।
MPPSC राज्य-सामान्य ज्ञान प्रायः किसी स्थानीय रूप से महत्वपूर्ण व्यक्तित्व — प्रायः अच्छी तरह तैयार अभ्यर्थियों के लिए भी अपरिचित — का नाम लेता है और केवल उनकी व्यापक श्रेणी पूछता है; जब जीवनी-संबंधी विवरण अल्प हो तो उनके नाम पर बने जिला-स्तरीय संस्थानों (संग्रहालयों, स्मारकों) से जोड़कर स्मरण रखें।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
श्री बादल भोई राज्य आदिवासी संग्रहालय, जो मध्यप्रदेश के एक आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी की स्मृति में है, किस जिले में स्थित है ?
- (a)बैतूल
- (b)छिंदवाड़ा
- (c)मंडला
- (d)डिंडौरी
उत्तर(b) छिंदवाड़ा — संग्रहालय का नाम 1997 में बादल भोई के सम्मान में रखा गया था।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
1930 का 'वन सत्याग्रह' (जंगल सत्याग्रह), जिसमें बादल भोई जैसे आदिवासी नेताओं ने औपनिवेशिक कानून की अवहेलना की, मुख्य रूप से किसके विरुद्ध विरोध था ?
- (a)औपनिवेशिक वन कानून के अंतर्गत वन उपज एवं भूमि तक पहुँच पर प्रतिबंध
- (b)नमक कर का अधिरोपण
- (c)जमींदारी भू-राजस्व दरें
- (d)विश्व युद्ध हेतु भर्ती
उत्तर(a) औपनिवेशिक वन कानून के अंतर्गत वन उपज एवं भूमि तक पहुँच पर प्रतिबंध — वन सत्याग्रहों की मूल शिकायत।