विश्व की पहली “वैदिक घड़ी” कहाँ पर स्थापित है ?
- (a)वाराणसी
- (b)प्रयागराज
- (c)उज्जैन
- (d)भोपाल
सही उत्तर — (c) उज्जैन। विश्व की पहली 'वैदिक घड़ी' — एक सार्वजनिक प्रतिष्ठापन जो आधुनिक 24-घंटे प्रारूप तथा पारंपरिक वैदिक/पंचांग इकाइयों दोनों में समय प्रदर्शित करती है — 2024 में मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित ऐतिहासिक जंतर मंतर (वेध शाला) वेधशाला में स्थापित की गई। उज्जैन एक स्वाभाविक चयन था: यह प्राचीन काल से खगोलीय समय गणनाओं के लिए भारत का पारंपरिक संदर्भ बिंदु रहा है तथा पहले से ही एक कार्यशील जंतर मंतर वेधशाला की मेज़बानी करता है, जिससे यह वैदिक तथा आधुनिक समय-गणना को जोड़ने वाली घड़ी के लिए उपयुक्त स्थान बनता है।
- (a)वाराणसी — उत्तर प्रदेश का एक प्रमुख गंगा तीर्थ नगर — इस 2024 प्रतिष्ठापन के लिए निर्दिष्ट स्थल नहीं।
- (b)प्रयागराज — उत्तर प्रदेश में त्रिवेणी संगम तथा कुंभ मेले का स्थल — यहाँ निर्दिष्ट स्थल नहीं।
- (d)भोपाल — मध्यप्रदेश की राजधानी नगरी, किन्तु वैदिक घड़ी उज्जैन में स्थापित की गई, भोपाल में नहीं।
उज्जैन प्राचीन काल से भारत का पारंपरिक खगोलीय समय-गणना केंद्र रहा है — वराहमिहिर सहित प्राचीन भारतीय खगोलविदों ने गणनाओं के लिए उज्जैन याम्योत्तर (meridian) को संदर्भ बिंदु के रूप में उपयोग किया। नगर का अपना जंतर मंतर (वेध शाला) भी है, जो महाराजा जय सिंह द्वितीय से जुड़ी परंपरा में निर्मित चिनाई वेधशालाओं में से एक है, दिल्ली, जयपुर, वाराणसी तथा मथुरा की वेधशालाओं के साथ। यही खगोलीय विरासत है जिसके कारण उज्जैन को 'वैदिक घड़ी', एक 2024 समसामयिकी प्रतिष्ठापन, के स्थल के रूप में चुना गया।
यह एक विशिष्ट (niche), एकल-तथ्य वाला समसामयिकी बिंदु है — सुरक्षित संदर्भ उज्जैन की भारत के खगोलीय/समय-गणना संदर्भ नगर के रूप में दीर्घकालिक पहचान है (इसका जंतर मंतर, भारतीय खगोलशास्त्र में इसकी ऐतिहासिक भूमिका), न कि घड़ी की तकनीकी कार्यप्रणाली।
- 'वैदिक घड़ी' 2024 में मध्यप्रदेश के उज्जैन स्थित ऐतिहासिक जंतर मंतर (वेध शाला) वेधशाला में स्थापित की गई
- उज्जैन का अपना जंतर मंतर वेधशाला है, दिल्ली, जयपुर, वाराणसी तथा मथुरा की वेधशालाओं जैसी ही परंपरा में
- उज्जैन पारंपरिक रूप से भारतीय खगोलीय/समय गणनाओं के लिए संदर्भ बिंदु रहा है
- उज्जैन शिप्रा (क्षिप्रा) नदी के तट पर स्थित है तथा महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का भी स्थान है
उज्जैन का अपना जंतर मंतर तथा भारत के खगोलीय संदर्भ नगर के रूप में इसका इतिहास ही इसे 2024 की 'वैदिक घड़ी' का स्थल बनाता है।
- उज्जैन को इस विशिष्ट 2024 प्रतिष्ठापन के स्थल के रूप में अन्य जंतर मंतर नगरों (दिल्ली/जयपुर) से भ्रमित करना
- यह तथ्य नगर-विशिष्ट होते हुए भी मध्यप्रदेश की राजधानी होने के कारण भोपाल मान लेना
मध्यप्रदेश पर समसामयिकी बहुविकल्पीय प्रश्न किसी विशिष्ट नगर के साथ 2024/2025 का कोई प्रतिष्ठापन या उद्घाटन बताते हैं — तथ्य को सटीक नगर (यहाँ उज्जैन) से जोड़ें, केवल 'मध्यप्रदेश में कहीं' से नहीं।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
महाराजा जय सिंह द्वितीय से जुड़ी जंतर मंतर वेधशालाएँ दिल्ली, जयपुर, वाराणसी, मथुरा तथा मध्यप्रदेश के किस नगर में स्थित हैं?
- (a)उज्जैन
- (b)भोपाल
- (c)इंदौर
- (d)ग्वालियर
उत्तर(a) उज्जैन — पाँच ऐतिहासिक जंतर मंतर वेधशालाओं में से एक का स्थान।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
भारतीय खगोलशास्त्र में उज्जैन का पारंपरिक महत्त्व मुख्यतः किसके संदर्भ बिंदु के रूप में इसकी भूमिका से जुड़ा है?
- (a)व्यापार-मार्ग मानचित्रण
- (b)समय तथा देशांतर गणना
- (c)मानसून पूर्वानुमान
- (d)भूकंपीय निगरानी
उत्तर(b) समय तथा देशांतर गणना — प्राचीन भारतीय खगोलविदों ने उज्जैन याम्योत्तर को संदर्भ के रूप में उपयोग किया।