बिरहा किस आदिवासी जनजाति की महिलाओं का लोकप्रिय लोकगीत है ?
- (a)गोंड
- (b)कोल
- (c)भील
- (d)सहरिया
सही उत्तर — (a) गोंड। MPPSC की आधिकारिक उत्तर-कुंजी बिरहा को मध्य प्रदेश की गोंड आदिवासी महिलाओं का लोकप्रिय लोकगीत मानती है। यह नाम 'विरह' (separation) से आया है — बिरहा गीत किसी अनुपस्थित या दूर रह रहे प्रियजन के लिए स्त्री की विरह-वेदना पर आधारित होते हैं, यह विषय मध्य भारत की कई लोकगीत परंपराओं में दोहराया जाता है।
- (b)कोल — आधिकारिक कुंजी के अनुसार यह सही पहचान नहीं है — कुंजी बिरहा को गोंड महिलाओं से जोड़ती है। कोल, मध्य प्रदेश का दूसरा प्रमुख मध्य-भारतीय आदिवासी समूह है, जो बघेलखण्ड क्षेत्र (रीवा-सतना-सीधी-शहडोल) में संकेंद्रित है, और उसकी अपनी समृद्ध लोकगायन परंपरा है।
- (c)भील — आधिकारिक पहचान नहीं है — भील, मध्य प्रदेश का एक अन्य प्रमुख आदिवासी समूह (पश्चिमी झाबुआ-अलीराजपुर क्षेत्र में संकेंद्रित), बिरहा के बजाय अपने विशिष्ट नृत्य रूपों (जैसे भगोरिया, गैर) के लिए जाना जाता है।
- (d)सहरिया — आधिकारिक पहचान नहीं है — सहरिया, मध्य प्रदेश का एक विशेष रूप से सुभेद्य जनजातीय समूह (Particularly Vulnerable Tribal Group) जो ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में संकेंद्रित है, उसे बिरहा लोकगीत का श्रेय नहीं दिया जाता।
बिरहा ('विरह', यानी वियोग, से) एक लोकगीत विधा है जो किसी अनुपस्थित प्रियजन के लिए स्त्री की विरह-वेदना पर आधारित है — यह विषय मध्य भारत के आदिवासी व लोकगीत परंपराओं के कई समुदायों में दोहराया जाता है। MPPSC की आधिकारिक उत्तर-कुंजी इस विशेष लोकगीत रूप का श्रेय गोंड आदिवासी महिलाओं, मध्य प्रदेश के सबसे बड़े आदिवासी समुदाय, को देती है।
MPPSC अक्सर 'कौन-सी आदिवासी जनजाति X गाती/करती है' पूछता है — क्योंकि मध्य प्रदेश की कई जनजातियों की लोकगीत व लोकनृत्य परंपराएँ सुनने में मिलती-जुलती हैं (और कुछ गीत रूप व नाम समुदायों की सीमाओं में साझा होते हैं), सबसे सुरक्षित अध्ययन दृष्टिकोण यह है कि प्रत्येक नामित रूप को आधिकारिक कुंजी द्वारा श्रेय-प्राप्त समुदाय से जोड़ा जाए, न कि केवल गीत के विषय या क्षेत्र से विशिष्टता मान ली जाए।
- बिरहा: 'विरह' (वियोग) के नाम पर एक लोकगीत विधा, जो किसी अनुपस्थित प्रियजन के लिए स्त्री की विरह-वेदना पर केंद्रित है।
- MPPSC की आधिकारिक कुंजी बिरहा का श्रेय गोंड आदिवासी महिलाओं को देती है।
- गोंड: मध्य प्रदेश का सबसे बड़ा आदिवासी समुदाय, जिसकी अपनी अन्य प्रसिद्ध लोकगीत/नृत्य विधाएँ भी हैं (जैसे सैला, करमा)।
- कोल जनजाति: मध्य प्रदेश के बघेलखण्ड क्षेत्र (रीवा, सतना, सीधी, शहडोल) में संकेंद्रित — गोंड के बाद मध्य प्रदेश का दूसरा सबसे बड़ा आदिवासी समूह।
MPPSC की आधिकारिक कुंजी बिरहा लोकगीत का श्रेय गोंड आदिवासी महिलाओं को देती है; अन्य तीन विकल्प विभिन्न क्षेत्रों में संकेंद्रित मध्य प्रदेश की अलग-अलग आदिवासी समुदाय हैं।
- यह मान लेना कि किसी लोकगीत का विषय (वियोग/विरह) किसी एक समुदाय की विशिष्ट पहचान है — ऐसे विषय मध्य भारत की कई आदिवासी परंपराओं में दोहराए जाते हैं।
- मध्य प्रदेश के सभी 'आदिवासी लोकगीतों' को परस्पर विनिमेय मान लेना — MPPSC अपनी आधिकारिक कुंजी से विशिष्ट गीत-समुदाय युग्मों की परीक्षा लेता है।
MPPSC सीधे किसी लोकगीत/लोकनृत्य का नाम लेकर प्रस्तुतकर्ता समुदाय पूछता है — केवल विषय या भूगोल से अनुमान लगाने के बजाय आधिकारिक कुंजी पर आधारित रूप-से-जनजाति तालिका बनाएँ।
इस प्रश्न से सीधे संबंधित कोई पूर्व PYQ उपलब्ध नहीं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
'सैला' और 'करमा', मध्य भारत के प्रसिद्ध लोकनृत्य, मुख्य रूप से किस आदिवासी समुदाय (अन्य के साथ) से जुड़े हैं?
- (a)गोंड
- (b)भील
- (c)कोल
- (d)सहरिया
उत्तर(a) गोंड — सैला और करमा व्यापक रूप से गोंड (और बैगा) नृत्य विधाओं के रूप में उल्लेखित हैं।
- अभ्यास — वास्तविक PYQ नहीं
मध्य प्रदेश की कोल जनजाति राज्य के मुख्यतः किस क्षेत्र में संकेंद्रित है?
- (a)झाबुआ-अलीराजपुर (पश्चिम)
- (b)बघेलखण्ड — रीवा, सतना, सीधी, शहडोल
- (c)मंडला-डिंडौरी (पूर्व)
- (d)ग्वालियर-चंबल (उत्तर)
उत्तर(b) बघेलखण्ड — रीवा, सतना, सीधी, शहडोल — मध्य प्रदेश में कोल जनजाति का मुख्य संकेंद्रण क्षेत्र।